लदनियां प्रखंड मुख्यालय में पानी के लिए तरस रहे लोग बाहर में एक भी चालू चापाकल नहीं सरकार के विकास के दावों की खुल रही पोल
ग्राउंड रिपोर्ट – बिहार हलचल ब्यूरो
मधुबनी जिले का लदनियां प्रखंड मुख्यालय आज सिर्फ नाम का मुख्यालय बनकर रह गया है। विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार की हकीकत देखनी है तो एक बार लदनियां ब्लॉक आइए। यहाँ बाहर में एक भी चालू चापाकल नहीं है जिससे आम लोगों को पीने के पानी तक के लिए तरसना पड़ रहा है।
बता दें कि इस प्रखंड मुख्यालय में 15 पंचायतों के लोग रोज अपने काम से आते हैं। कोई जाति प्रमाण पत्र के लिए, कोई आवास के लिए, तो कोई जमीन के कागजात के लिए। इस भीषण गर्मी में जब लोग घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, तो एक घूंट पानी तक नसीब नहीं होता।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले एक चापाकल गड़ा जरूर गया था, लेकिन खराब पानी आने के कारण उसे बंद कर दिया गया। उसके बाद से आज तक न तो उसे ठीक किया गया और न ही नया चापाकल लगाया गया। नतीजा, प्रखंड आए लोगों और राहगीरों को दुकानदारों से 10-20 रुपये में पानी की बोतल खरीदनी पड़ रही है। यह गरीब जनता के साथ सीधा अन्याय है।
पानी नहीं तो कैसा विकास
जब इस संबंध में अधिकारियों से बात की गई तो उनका घिसा-पिटा जवाब मिला कठिनाई तो है, लेकिन व्यवस्था के लिए ऊपर लिखा गया है।सवाल यह है कि कब तक लिखा-पढ़ी में ही समय बीतेगा।
सरकार हर मंच से कहती है हम विकास पर विकास कर रहे हैं, हर घर नल का जल पहुंचा रहे हैं। लेकिन जहां प्रखंड मुख्यालय में ही एक बूंद पानी न हो, वहां यह विकास कैसा जहां नल-जल फेल हो, चापाकल सूखे पड़े हों, वहां सिर्फ खानापूर्ति और पैसों की बंदरबांट हो रही है।
यह सिर्फ चापाकल का मुद्दा नहीं है, यह सिस्टम की लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। जब प्रखंड मुख्यालय ही प्यासा है, तो गांवों का हाल क्या होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

