लदनियां प्रखंड मुख्यालय से सटे सरकारी जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा प्रशासन मौन
न्यूज डेस्क
मधुबनी जिले के लदनियां प्रखंड मुख्यालय से सटे लदनियां बाजार में सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। NH-227 से गुजरने वाली मुख्य बाजार की करीब 10 एकड़ से अधिक कीमती सरकारी जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा कर पक्के मकान बना लिए गए हैं, लेकिन प्रशासन की नजर इस ओर नहीं जा रही है।
कौन सी जमीन पर है कब्जा
स्थानीय लोगों के अनुसार लदनियां बाजार में सरकारी जमीन के तीन बड़े प्लॉट पर अवैध कब्जा है:
– खाता 365, खेसरा 1198: तीन एकड़।
– खेसरा 1196: सात एकड़।
– खेसरा 970:दस कट्ठा।
इस जमीन पर सरकार स्कूल, अस्पताल या कोई अन्य जनकल्याणकारी भवन बना सकती है। लेकिन स्थानीय दबंगों ने यहां पक्के मकान बनाकर कब्जा जमा रखा है।
खादी भंडार की जमीन भी बंजर, भवन जर्जर
बताया जा रहा है कि इस अतिक्रमण में खादी भंडार की जमीन भी शामिल है। देखरेख के अभाव में खादी भंडार का भवन टूट-फूट कर जर्जर हो चुका है और जमीन बंजर पड़ी है।
गरीब का घर तुरंत टूटता है, यहां जेसीबी क्यों नहीं स्थानीय लोगों में आक्रोश लोगों का आरोप है कि प्रशासन दोहरा मापदंड अपना रहा है। स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया अगर कोई गरीब सरकारी जमीन पर झोपड़ी भी बना ले तो अंचलाधिकारी तुरंत जेसीबी लेकर पहुंच जाते हैं। लेकिन प्रखंड मुख्यालय के बगल में 10 एकड़ जमीन पर सालों से पक्के मकान बने हैं, उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
मुख्यमंत्री को आवेदन, फिर भी कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने इस अतिक्रमण की शिकायत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी की थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।
सवालों के घेरे में प्रशासन
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रखंड मुख्यालय से चंद कदम की दूरी पर इतने बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन का दुरुपयोग हो रहा है, फिर भी अंचलाधिकारी और स्थानीय प्रशासन चुप क्यों है? NH-227 जैसी मुख्य सड़क किनारे स्थित इस जमीन की बाजार कीमत करोड़ों में है।
लोगों की मांग अविलंब खाली कराए जमीन
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सरकारी जमीन को अविलंब अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही खादी भंडार की जमीन पर नए सिरे से भवन बनाकर रोजगार से जोड़ा जाए।
फिलहाल यह मामला लदनियां प्रखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पूछ रहे हैं कि जब कानून सबके लिए बराबर है तो यहां कार्रवाई में देरी क्यों?
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