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बिहार में शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग का संगम: एईडीपी के जरिए छात्रों को मिलेगा पेशेवर अनुभव ।। 2.पटना ट्रैफिक पुलिस के पास होगी अब अपनी दो एंबुलेंस, आपात स्थिति में मिलेगी मदद। । 3.600 से अधिक पंचायत सरकार भवनों का राज्य में निर्माण हुआ पूर्ण

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राजकुमार यादव 

पटना/ बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद (BSHEC) द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण बोर्ड (पूर्वी क्षेत्र) (BOPT-ER) के सहयोग से बुद्ध मार्ग, पटना स्थित परिषद सभागार में ‘अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP)’ के कार्यान्वयन हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर समारोह का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, संबद्ध महाविद्यालयों एवं BOPT-ER के बीच औपचारिक रूप से समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया गया।
यह पहल उच्च शिक्षण संस्थानों में अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ औद्योगिक प्रशिक्षण को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके माध्यम से छात्रों को डिग्री प्राप्ति के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराया जाएगा।
समारोह में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री राजीव रौशन, निदेशक (उच्च शिक्षा) प्रो. (डॉ.) एन.के. अग्रवाल, BSHEC के उप सचिव (प्रशासन) श्री राम सागर सिंह, BOPT (पूर्वी क्षेत्र) के निदेशक डॉ. एस. एम. एजाज अहमद सहित पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय एवं तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों तथा प्रथम चरण में चयनित 11 महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
इस अवसर पर निदेशक (उच्च शिक्षा) प्रो. (डॉ.) एन.के. अग्रवाल ने कहा कि “अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम के माध्यम से शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी कम होगी तथा छात्र अपनी पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी अर्जित कर सकेंगे, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।
विभागीय सचिव श्री राजीव रौशन ने अपने संबोधन में कहा कि “एईडीपी के अंतर्गत अकादमिक शिक्षा के साथ संरचित ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण को जोड़कर छात्रों को उद्योग के अनुरूप दक्ष बनाया जाएगा। यह पहल राज्य में कुशल एवं रोजगारोन्मुखी कार्यबल के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी।”
BOPT (पूर्वी क्षेत्र) के निदेशक डॉ. एस. एम. एजाज अहमद ने कहा कि “एईडीपी उच्च शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है, जो छात्रों को कक्षा से बाहर वास्तविक औद्योगिक परिवेश में सीखने का अवसर प्रदान करता है तथा ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में सहायक है।”
कार्यक्रम के अंत में BSHEC के उप सचिव (प्रशासन) श्री राम सागर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी सहभागी संस्थानों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस पहल के माध्यम से छात्रों को उद्योग आधारित प्रशिक्षण, कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुखी अवसर उपलब्ध होंगे, जिससे अकादमिक ज्ञान और औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटने में मदद मिलेगी। यह राज्य सरकार की गुणवत्तापूर्ण एवं कौशल आधारित उच्च शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

 

2.पटना ट्रैफिक पुलिस के पास होगी अब अपनी दो एंबुलेंस, आपात स्थिति में मिलेगी मदद

पटना/राजधानी की ट्रैफिक पुलिस को दो एंबुलेंस की सुविधा प्रदान की गई है। इनकी मदद से किसी सड़क दुर्घटना के दौरान आपात स्थिति में मरीजों को नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाने में काफी सहूलियत होगी। ये दोनों एंबुलेंस मुख्य रूप से अटल पथ, पाटलि पथ और जेपी गंगा पथ पर तैनात रहेंगे। अन्य मुख्य सड़कों पर भी इनका भ्रमण होता रहेगा। इन दोनों एंबुलेंस को हरि झंडी दिखाकर डीजीपी विनय कुमार ने मंगलवार को रवाना किया। पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन में आयोजित कार्यक्रम में डीजीपी के साथ एडीजी (ट्रैफिक) सुधांशु कुमार ने भी गाड़ियों को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया।
इन दोनों गाड़ियों को सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिब्लिटी) फंड के तहत चोला मंडलम जनरल इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से पुलिस महकमा के प्रदान किया गया है। इसे लेकर डीजीपी और कंपनी के एमडी वी सूर्यनारायणन ने एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर भी किया गया है।
कार्यक्रम के बाद एडीजी (ट्रैफिक) सुधांशु कुमार ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि चौबीस घंटे यह एंबुलेंस प्रमुख सड़कों पर तैनात रहेगी, खासकर अटल पथ, पाटलि पथ, जेपी गंगा पथ के प्रमुख हिस्सों पर मौजूद रहेंगे। जहां जैसी जरूरत पड़ेगी, वहां इन एंबुलेंस को भेजकर जल्द से जल्द पीड़ितों को सहायता मुहैया कराई जाएगी। इसमें ट्रैफिक पुलिस के अलावा स्वास्थ्य विभाग के स्तर से प्रशिक्षित कर्मी भी मौजूद रहेंगे। ताकि तुरंत घायलों को प्राथमिक उपचार प्रदान कराया जा सके। उन्होंने कहा कि पटना सड़क दुर्घटना में देश के टॉप-100 शहरों में आता है। इस वजह से दुर्घटना के बाद पीड़ितों को शुरुआती के कुछ घंटों यानी गोल्डन ऑवर के दौरान चिकित्सीय सहायता मुहैया कराने के लिए यह व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि इस एंबुलेंस सेवा को जल्द ही डॉयल-112 से भी जोड़ दिया जाएगा। ताकि आपात स्थिति में इस पर फोन करने पर पुलिसीय के साथ ही फौरन चिकित्सीय सहायता भी मुहैया हो सके। देश के तीन राज्यों महाराष्ट्र, राजस्थान और बिहार में चोला मंडलम कंपनी ने इस तरह के एंबुलेंस को प्रदान किया है।

 

3.600 से अधिक पंचायत सरकार भवनों का राज्य में निर्माण हुआ पूर्ण

पटना/भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि की अध्यक्षता में मंगलवार को अधिवेशन भवन में राजस्तरीय समीक्षा बैठक की गई। *बैठक में भवन निर्माण विभाग एवं बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा कार्यान्वित गृह (कारा) विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग सहित 19 विभागों की योजनाओं की समीक्षा कर परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली गई।* इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य सुनिश्चित कराने एवं सतत अनुश्रवण तथा विभागीय शिकायत निवारण समिति से संबंधित बिंदुओं पर भी समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान प्रशासी विभागों की योजनाओं के कार्यों में तेजी लाने, कार्य योजना के अनुसार पीछे चल रही योजनाओं को तीव्र गति से पूर्ण करने की बात हुई। बैठक में सचिव ने सरकारी भवनों के अनुश्रवण एवं मेंटेनेंस सुनिश्चित करने के लिए अभियंताओं को निदेश दिया।
छपरा, दरभंगा, गया, जहानाबाद, कटिहार, खगड़िया और मधेपुरा सहित विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन आवासीय भवनों और कोर्ट रूम का निर्माण की भी समीक्षा की गई। विभिन्न जिलों के मंडल कारा में हो रहे निर्माण को तेजी से पूर्ण करने को लेकर कार्यपालक अभियंताओं को आवश्यक निदेश दिया गया।
भवन निर्माण विभाग की ओर से राज्य में कुल 2615 पंचायत सरकार भवनों के निर्माण किया जा रहा है। 600 से अधिक पंचायत सरकार भवन का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक माह लक्ष्य निर्धारित कर पंचायत सरकार भवनों का निर्माण पूर्ण करें।* अब तक 284 निर्मित पंचायत सरकार भवन पंचायती राज विभाग को हैंडओवर किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि शेष भवनों का निर्माण शीघ्र पूर्ण करें तथा हैंडओवर की प्रक्रिया में तेजी लाएं।

इस क्रम में प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवन के निर्माण कार्य की भी समीक्षा की गई। राज्य के 240 प्रखंडों में प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय एवं 59 प्रखंडों में प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय एवं आवासीय परिसर भवनों का निर्माण किया जा रहा है। सचिव ने बताया कि 250 से अधिक प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है। शेष भवनों के निर्माण के लिए निविदा/पुनर्निविदा की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
सचिव ने निविदा/पुनर्निविदा में विलंब को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट निदेश दिया कि निर्धारित समयसीमा के अंदर टेंडर की प्रक्रिया पूरी करें। प्रतिस्पर्धी एवं पारदर्शी तरीके से टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही शेष प्रखंडों में भी कार्य शुरू करने का निदेश दिया गया। उन्होंने मुख्य अभियंताओं को मॉनीटरिंग करने एवं लापरवाही पर अभियंताओं पर कार्रवाई करने के लिए भी निर्देश दिया।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए राज्य में बड़ी संख्या में आवासीय विद्यालय एवं राजकीय छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है। सचिव ने परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए प्रमुखता से पूर्ण करें।
भागलपुर, सुपौल, वैशाली, सहरसा, किशनगंज, पटना सिटी सहित अन्य जिलों में स्थित अभियंत्रण महाविद्यालय में अतिरिक्त भवनों यथा – शैक्षणिक भवन, छात्रावास, ऑडिटोरियम का निर्माण प्रगति पर है, जिन्हें जल्द पूर्ण करने के लिए निदेशित किया गया। बैठक में स्पष्ट निदेशित किया गया कि लंबित कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करें।
बक्सर, सिवान, नवादा, कैमूर, शिवहर अररिया, शेखपुरा, जमुई, औरंगाबाद, अरवल, नालंदा जिले में अटल कला भवन के कार्यों की समीक्षा की गई। प्रत्येक कला भवन की क्षमता 620 होगा। लखीसराय जिले में 630 क्षमता का ऑडिटोरियम का कार्य फिनिशिंग स्टेज में है।
सचिव ने मुख्य सचिवालय एवं विकास भवन में चल रहे अग्निशमन कार्यों को जल्द पूर्ण करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि अग्निशमन कार्य को प्रमुखता से पूर्ण करें। इस दौरान अभियंत्रण महाविद्यालय में अतिरिक्त भवनों के निर्माण की भी समीक्षा की गई।

भवन निर्माण विभाग सहित 19 विभागों की

सचिव ने गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्ता में कमी पाएं जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। अभियंताओं को निदेशित किया गया कि गुणवत्तापूर्ण निर्माण हेतु नियमित रूप से स्थल निरीक्षण करें एवं संवेदकों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठक करें। कार्यपालक अभियंता एवं संवेदक की जिम्मेदारी तय करें ताकि भवनों की गुणवत्ता सुनिश्चत हो। निर्माण सामग्री मानक के अनुरूप हो ताकि निर्माण में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। कार्यपालक अभियंताओं को ऑनलाइन पोर्टल पीएमआइएस को अपडेट करने के लिए कहा गया। पीएमआइएस पोर्टल पर डाले गए डेटा का उच्च स्तर पर निगरानी की जा रही है।
इस समीक्षा बैठक में भवन निर्माण विभाग के अपर सचिव, संयुक्त सचिव, मुख्य अभियंता, निदेशक अनुश्रवण, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता तथा प्रशासी विभागों के नोडल पदाधिकारियों सहित अन्य कई पदाधिकारी मौजूद रहे।