लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में सुपौल जिला राज्य स्तर पर फिर अव्वल, पदाधिकारी विकाश कुमार के द्वारा लगातार हो रहा प्रभावी कार्रवाई…
रिपोर्ट:सुभाष सिंह यादव
सुपौल/बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में सुपौल जिला ने माह सितम्बर-2026 की राज्यस्तरीय रैंकिंग में फिर से प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इससे पहले भी सुपौल जिला जून महीने में राज्यस्तर पर टॉप पर आया था। निर्धारित मापदंडों एवं कार्य निष्पादन के आंकड़ों के आधार पर जारी रैंकिंग में सुपौल जिला ने कुल 89.50 अंक प्राप्त कर राज्य में प्रथम स्थान हासिल किया।
सुपौल के अपर समाहर्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विकाश कुमार ने बताया कि जिले में लोक शिकायतों के समयबद्ध निष्पादन एवं अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी अनुपालन के आधार पर यह उपलब्धि हासिल हुई है। जिले में नियत समय-सीमा के अंदर 99.07 प्रतिशत परिवादों के निष्पादन के लिए 9.91 अंक प्राप्त हुए। वहीं, समीक्षाधीन माह में निर्धारित समय-सीमा के भीतर 100 प्रतिशत मामलों का निवारण करने के लिए 30 अंक तथा लोक प्राधिकारों की उपस्थिति के मामले में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए।
इसके अतिरिक्त, जिले में नियत समय-सीमा के भीतर प्रथम अपील के निष्पादन में 98.69 प्रतिशत तथा द्वितीय अपील के निष्पादन में 97.21 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई। शास्ति अधिरोपण एवं अनुशासनिक कार्रवाई के लिए 10 अंक तथा जिला स्तरीय बैठक की कार्यवाही पोर्टल पर अपलोड करने के लिए 5 अंक प्राप्त हुए। इन उपलब्धियों के आधार पर सुपौल जिला ने राज्यस्तरीय रैंकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
जानिये सुपौल के अपर कलेक्टर-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विकाश कुमार के बारे में
सुपौल के जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के रूप में बिहार राज्यस्तरीय कार्यों और समस्याओं के निराकरण की समीक्षा में कई महीने से लगातार टॉप कर रहे विकाश कुमार बिहार प्रशासनिक सेवा के 60वीं से 62वीं बैच के अधिकारी हैं। 50 वर्षीय विकाश कुमार मूल रूप से मुंगेर जिले के संदलपुर निवासी योगेन्द्र प्रसाद यादव के सुपुत्र हैं। 2019 के फरवरी में आए प्रतियोगिता परीक्षा परिणाम में उनका रैंक 206वां रहा था। 2019 में आया परिणाम उनकी कोई पहली सफलता नहीं थी। वे बीपीएससी की 2010 से लेकर 2019 तक जारी किए सभी परीक्षा परिणामों में सफल रहे हैं। बिहार लोक सेवा आयोग की 48वीं से 62वीं तक के सभी परीक्षा में वे सफल रहे हैं और बिहार निर्वाचन सेवा में अवर निर्वाचन पदाधिकारी से लेकर उप-निर्वाचन पदाधिकारी तक विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे हैं, लेकिन 60वीं से 62वीं में उन्हें बिहार प्रशासनिक सेवा मिला तो उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान किया।
बिहार प्रशासनिक सेवा के लिए लगातार करते रहें प्रयास, फिर मिली मनोनुकूल सफलता
उल्लेखनीय है कि बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2010 में आयोजित 48 वीं से 52 वीं सम्मिलित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में इन्होंने सफलता प्राप्त कर बिहार निर्वाचन सेवा के लिए चयनित हुए थे। इन्होंने अवर निर्वाचन पदाधिकारी के रुप में अपने कैरियर प्रारंभ किया था। ये भोजपुर के आरा सदर अनुमंडल भोजपुर में अवर निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर भी पदस्थापित रहे हैं। यहाँ से प्रोन्नति मिलने एवं स्थानांतरित होकर मधुबनी जिले में 06 सितंबर 2018 को उप निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर योगदान दिया था। मधुबनी में उप-निर्वाचन पदाधिकारी के अतिरिक्त वे प्रभारी जिला सूचना जन-सम्पर्क पदाधिकारी भी रहे और जन-सम्पर्क कार्यालय को पुनर्जीवित किया। बिहार निर्वाचन सेवा के अधिकारी रहते हुए भी कुछ बेहतर करने के लिए इन्होंने अध्ययन व प्रयास जारी रखा।
सेवाकाल में ही इन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 53वीं से 55वीं सम्मिलित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में भी सफलता प्राप्त करते हुए सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक पद के लिए चुने गए। लेकिन इन्हें यह पद रास नहीं आया, जिस कारण इस पद पर ये योगदान नहीं किए। पुन: इन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 56 वीं से 59 वीं सम्मिलित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में भी सफलता प्राप्त करते हुए बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक पद के लिए चुने गए। लेकिन इन्हें यह पद भी रास नहीं आया, जिस कारण इस पद पर ये योगदान नहीं किए। लेकिन, अध्ययन और प्रयास जारी रखा। इसके बाद फिर इन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 60वीं से 62वीं सम्मिलित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल हुए। इस परीक्षा में इन्हें आशातीत सफलता मिल जाने के बाद अब ये बिहार प्रशासनिक सेवा अधिकारी के रूप में शानदार कार्य कर रहे हैं।
बिहार प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद विकाश कुमार
मधुबनी जिला में प्रखंड से लेकर जिला स्तर पर कई पदों पर कार्यरत रहे हैं। वे मधुबनी जिला में उप-निर्वाचन पदाधिकारी और प्रभारी जिला सूचना एवं जन-संपर्क पदाधिकारी के पद पर कार्यरत थे। बिहार प्रशासनिक सेवा में आने के बाद वे मधुबनी जिला के कलुआही और झंझारपुर प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी भी रहे हैं और मधुबनी के वरीय उप समाहर्ता के रूप में कार्यरत रहे हैं। 2020 में प्रखण्ड विकास पदाधिकारी(बीडीओ) के रूप में अल्प अवधि का कार्यकाल प्रशिक्षण अवधि का हिस्सा रहा, लेकिन केवल 02 महीने में ही उन्होंने अपने कार्यों से अमिट छाप छोड़ी। 2022 से 2024 तक वे बिहार के सहकारिता मंत्री के आप्त सचिव भी रहे हैं।
इससे पहले वे खगड़िया में वरीय उप-समाहर्ता एवं प्रभारी जिला यातायात पदाधिकारी(डीटीओ) के पद पर तैनात थे। वे वहाँ दो वर्षों तक कार्यरत रहे। इसी दौरान वे गोगरी में प्रखंड-सह-अंचल के वरीय पदाधिकारी के भी प्रभार में रहे। फरवरी 2026 से वे सुपौल में वर्तमान ओहदे पर कार्यरत हैं।
श्री विकाश कुमार 2013 से अगस्त 2018 तक आरा में निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थे। सितम्बर 2018 में मधुबनी में उप निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में योगदान के बाद विभिन्न पदों पर 2022 तक रहे और मधुबनी जिला के लोग आज भी उनके कार्यों को याद करते हैं।

