बिहार में शिक्षा अब सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है एक तरफ छात्र रोजगार के लिए भटक रहे हैं, दूसरी तरफ नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में लगे हैं जरूरत है बयानबाजी से ज्यादा जमीन पर काम करने की
News डेस्क
पटना/ प्रदेश में छात्रों के 18 दिनों से चल रहे आमरण अनशन और राजभवन मार्च के बीच अब सियासत तेज हो गई है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर छात्रों की आड़ में राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर अभ्यर्थियों को भड़का रहा है और सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।तेजस्वी यादव को छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करना बंद करना चाहिए। यह वही विपक्ष है जो छात्रों को उकसाकर सड़क पर उतार रहा है। मैं तेजस्वी जी से पूछना चाहता हूं, जब आप 15 महीने तक बिहार के उपमुख्यमंत्री थे, तब आपने छात्रों और शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए क्या किया? आपने कितनी नियुक्तियां निकालीं। कितने छात्रों की मांग पूरी की पहले इसका हिसाब दीजिए, उसके बाद सरकार पर सवाल उठाइए। आगे कहा कि वर्तमान सरकार शिक्षा और रोजगार को लेकर पूरी तरह से संवेदनशील है और TRE-4 सहित सभी लंबित भर्तियों को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा।
वहीं शिक्षा मंत्री के इस बयान के तुरंत बाद राजद खेमे से तीखी प्रतिक्रिया आई। एक स्थानीय यादव नेता (तेजस्वी समर्थक) ने मिथिलेश तिवारी पर पलटवार करते हुए कहा मिथिलेश तिवारी सिर्फ बयानबाजी में आगे हैं। बयान देकर टीवी पर चेहरा चमकाना आसान है। आप लोग खुद जानते हैं कि शिक्षा व्यवस्था के नाम पर क्या हो रहा है। कल ही अखिलेश तिवारी ने छात्रों के साथ क्या किया, यह पूरे बिहार ने देखा है। छात्रों को घसीटना, धक्का देना, क्या यही आपकी शिक्षा नीति है। आप लोग खुद फैसला करें कि कौन छात्रों के हित में है। एक तरफ बयानबाज मंत्री हैं और दूसरी तरफ जमीन पर छात्रों के साथ खड़े होने वाले लोग।

