अदम्य साहस व वीरता के प्रतीक आत्म बलिदानी महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती।। 2.पत्रकार और राष्ट्रवादी आंदोलन के नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती।।3.रेडियो डिजिटल युग में भी प्रासंगिक है और इसका प्रसारण न केवल समाचार और मनोरंजन का स्रोत।। 4.अष्टादश बिहार विधान सभा के तृतीय सत्र के दौरान सदस्य ककुमार सर्वजीत की ध्यानाकर्षण सूचना पर
राजकुमार यादव की रिपोर्ट
पटना/देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले, अदम्य साहस व वीरता के प्रतीक आत्म बलिदानी महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने उन्हें कोटिश: नमन करते हुए भावभीनी भावांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि जिनके जीवन के हर क्षण और हर सांस में शौर्य, साहस और वीरता झलकती थी, ऐसे मां भारती के वीर सपूत के बलिदान से देश का कण कण आज भी गौरवान्वित है। उनका अमर बलिदान हमें याद दिलाता है कि देश की स्वतंत्रता और अखंडता सर्वोपरि है। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रमुख नेता थे। उन्होंने “आज़ाद ही जियेंगे, आज़ाद ही मरेंगे” का संकल्प पूरा करते हुए स्वयं को मां भारती के चरणों में अर्पित कर दिया। उनकी वीर गाथा सदैव भावी पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।
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2.पत्रकार और राष्ट्रवादी आंदोलन के नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती
पटना/महान स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और राष्ट्रवादी आंदोलन के नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने उन्हें कोटिशः नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूतों में से एक थे और उन्होंने “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा” का ओजस्वी नारा देकर भारतीयों में देशभक्ति की अलख जगाई। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में “लाल-बाल-पाल” (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक व बिपिन चंद्र पाल) की तिकड़ी को ब्रिटिश सरकार से पूर्ण स्वराज्य की मांग करने के लिए भी याद किया जाता है। बाल गंगाधर तिलक गरम दल के प्रमुख नेता थे और उनके विचारों ने भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारियों को प्रेरित किया। उन्होंने केसरी (मराठी) और मराठा (अंग्रेजी) अखबारों के माध्यम से शिक्षा,समाज सुधार,सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और जनजागृति की भावना जागृत किया।
3.रेडियो डिजिटल युग में भी प्रासंगिक है और इसका प्रसारण न केवल समाचार और मनोरंजन का स्रोत
पटना/बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने राष्ट्रीय प्रसारण दिवस के अवसर पर कहा कि रेडियो डिजिटल युग में भी प्रासंगिक है और इसका प्रसारण न केवल समाचार और मनोरंजन का स्रोत है, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन के सूत्रधार भी है। चाहे आपदा हो या उत्सव, प्रसारण हर पल जनता के साथ खड़ा रहता है। यह दिन भारतीय रेडियो के इतिहास में उसके गौरवशाली प्रसारण का प्रतीक है। ध्यातव्य है कि वर्ष 1927 में इसी दिन भारत में पहली बार रेडियो प्रसारण की शुरुआत हुई थी। इसकी शुरुआत बॉम्बे (अब मुंबई) से इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) द्वारा की गई थी, जो बाद में ऑल इंडिया रेडियो (AIR) में विलय हो गई। ऑल इंडिया रेडियो को आकाशवाणी भी कहा गया। यह दिन मीडिया की स्वतंत्रता, जनजागरूकता और सांस्कृतिक विविधता के प्रसार को भी रेखांकित करता है।
4.अष्टादश बिहार विधान सभा के तृतीय सत्र के दौरान सदस्य ककुमार सर्वजीत की ध्यानाकर्षण सूचना पर
पटना/बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार ने आज अष्टादश बिहार विधान सभा के तृतीय सत्र के दौरान माननीय सदस्य श्री कुमार सर्वजीत की ध्यानाकर्षण सूचना पर माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा के जैविक खेती को अपनाने हेतु संकल्प लेने संबंधी वक्तव्य के पश्चात माननीय सदस्यों से अपील की कि माननीय प्रधानमंत्री के द्वारा 1 जून, 2026 से आरम्भ किए गए ‘खेत बचाओ अभियान’ में शामिल हों। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा जैविक तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले में अपना योगदान दें।
श्री मंजीत कुमार सिंह, श्री माधव आनंद एवं अन्य 13 सभासदों से प्राप्त गोपालगंज के बंद पड़े सासामुसा चीनी मिल पर गन्ना किसानों एवं कर्मचारियों के बकाया राशि के भुगतान एवं मिल को पुनः चालू कराने से संबंधित ध्यानाकर्षण सूचना के संबंध में माननीय मंत्री, गन्ना उद्योग विभाग श्री संजय कुमार के वक्तव्य के पश्चात माननीय अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार ने माननीय मंत्री को निदेश दिया कि इस ध्यानाकर्षण सूचना पर चर्चा के दौरान आए सभी विषयों पर 1 सप्ताह के भीतर संबंधित माननीय सदस्यों एवं अधिकारियों की बैठक बुलाकर बिंदुवार सभी विषयों का समाधान करें।
*जनसंपर्क पदाधिकारी*
*बिहार विधान सभा, पटना।*
[22/07, 5:17 pm] Vidhan Sbhas, Suchna,Prabhat: *बिहार विधान सभा सचिवालय*
*प्रेस विज्ञप्ति*
*दिनांक– 22/07/2026*
बिहार विधान सभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बिहार विधान सभा के सत्र के दौरान विधान सभा परिसर के आसपास हुई घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से रखने का अधिकार है, किन्तु विरोध के नाम पर जनप्रतिनिधियों का घेराव करना, उनके साथ अभद्र व्यवहार करना, सरकारी एवं निजी वाहनों में तोड़फोड़ करना तथा विधायकों की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले कृत्य किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।
माननीय अध्यक्ष ने कहा कि बिहार विधान सभा लोकतंत्र का सर्वोच्च विधायी मंच है, जहाँ जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि प्रदेश के विकास, जनहित और नीतिगत विषयों पर विचार-विमर्श करने आते हैं। ऐसे समय में सदन की कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए, विधायकों को रोकना, अभद्रता,गाड़ी की तोड़फोड़ अथवा जनप्रतिनिधियों को भय एवं दबाव के वातावरण में कार्य करने के लिए विवश करने का कोई भी प्रयास लोकतांत्रिक परंपराओं के विरुद्ध है।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि छात्रों एवं युवाओं की समस्याएँ महत्वपूर्ण हैं और उनका समाधान संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने सभी छात्र संगठनों एवं प्रदर्शनकारियों से संयम, शांति एवं कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की अपील की।
उन्होंने संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों से कहा कि घटना की निष्पक्ष जाँच कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में बिहार विधान सभा की सुरक्षा, माननीय सदस्यों की गरिमा और परिसर की पवित्रता बनाए रखने के लिए आवश्यक एवं प्रभावी कदम उठाए जाएँ।
माननीय अध्यक्ष ने सभी राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय मर्यादाओं तथा संवाद की परंपरा को सुदृढ़ करने में सकारात्मक सहयोग दें। लोकतंत्र की सफलता असहमति के सम्मान, संवैधानिक मर्यादा और शांतिपूर्ण संवाद पर आधारित है।
डॉ. प्रेम कुमार ने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार की जनता, छात्र-युवा, जनप्रतिनिधि तथा सभी राजनीतिक दल लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएँगे।

