बीपीएससी के कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग
न्यूज डेस्क
पटना / राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने बिहार लोक सेवा आयोग ( बीपीएससी) के कार्यप्रणाली और व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि राज्य में प्रशासनिक सहित विभिन्न सेवाओं में बहाली के लिए परीक्षा आयोजित करने वाली सबसे प्रतिष्ठित संस्थान के साख और विश्वसनीयता पर हीं सवाल खड़े हो गया है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि एक ओर बीपीएससी द्वारा 9 पालियों में पिछले 14 से 21 अप्रैल के बीच आयोजित की गई सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी की परीक्षा को रद्द कर दिया गया है वहीं दूसरी ओर यह भी दावा किया जा रहा है कि प्रश्नपत्र लीक नहीं हुए हैं। केवल परीक्षा की सुचिता को बनाए रखने के लिए हीं परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया है। यह अपने आप में विरोधाभासी और बहुत हीं हल्के स्तर का तर्क है। वहीं आर्थिक अपराध इकाई ( इओयू ) ने इस मामले में अभी तक दो दर्जन से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले चुकी है और 32 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है। इओयू की जांच के दायरे में वह एजेंसी भी आ गई है जिसके साथ बीपीएससी ने बायोमेट्रिक सेवा उपलब्ध कराने का अनुबंध किया था। सवाल यह है कि राजस्थान की जिस ‘ मेसर्स साईं एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड ‘ को एनटीए द्वारा ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था उसके साथ बीपीएससी द्वारा अनुबंध कैसे किया गया। जबकि उक्त एजेंसी के पास पर्याप्त और उचित संसाधन भी उपलब्ध नहीं थे। किन परिस्थितियों में उक्त ब्लैकलिस्टेड और संसाधन विहिन कम्पनी के साथ अनुबंध किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। बीपीएससी द्वारा इसका भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया कि एइडीओ परीक्षा के साथ हीं सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी पद के लिए हुए परीक्षा को भी किन कारणों से रद्द कर दिया गया है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि बीपीएससी पर उठ रहे इन सवालों से बिहार के लाखों नौजवान अपने भविष्य को लेकर चिंतित और तनावग्रस्त हैं। सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी के कुल 935 पद के लिए 9 पाली में 11 लाख नौजवानों ने परीक्षा दी है। आगे शिक्षकों की बहाली के साथ हीं अन्य कई पदों पर बहाली के लिए बीपीएससी के माध्यम से परीक्षा होने वाली है, और यदि उसी की विश्वसनीयता और कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ जाएगा तो नौकरी के लिए वर्षों से मेहनत करने वाले युवाओं की स्थिति क्या होगी। क्यों कि पहले भी बीपीएससी पर सवाल उठते रहे हैं। शिक्षक बहाली के लिए आयोजित टीआरई 3 का परीक्षा रद्द कर दुबारा परीक्षा ली गई। इसके पूर्व 67 वीं बीपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा 2022 को भी रद्द करना पड़ा था। इसलिए बीपीएससी की सुचिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उसके कार्यप्रणाली और व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच और दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई जरुरी है।

