बिहार

एसडीजी की प्राप्ति के लिए सटीक, विश्वसनीय एवं समयबद्ध आंकड़े आवश्यक: मंत्री ।। 2. बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता: मंगल पांडेय

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राजकुमार यादव 

पटना/सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सटीक, विश्वसनीय एवं समयबद्ध आंकड़े अत्यंत आवश्यक हैं। ये बातें योजना एवं विकास विभाग के माननीय मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बुधवार को ‘सतत विकास लक्ष्यों की मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क, पर्यावरणीय लेखांकन एवं जेंडर सांख्यिकी’ पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की क्षमता निर्माण कार्यशाला में कहीं। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला शासन में डाटा के महत्व को अधिक मजबूत करने तथा नीति निर्माण को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस कार्यशाला का आयोजन पटना के फुलवारीशरीफ स्थित के निजी होटल में केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय तथा राज्य सरकार के योजना एवं विकास विभाग के सहयोग से किया गया। इसमें संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम का तकनीकी सहयोग प्राप्त है। उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि ‘गुणवत्तापूर्ण डेटा प्रभावी नीतियों की आधारशिला है। एसडीजी के ‘लीव नोवन बिहाइंड’ सिद्धांत को साकार करने के लिए आवश्यक है। साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार अब सिर्फ बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि यह पूर्वी भारत के प्रमुख टेक हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। बेहतर कानून व्यवस्था, सड़कें, 24 घंटे बिजली के बाद सरकार अब औद्यौगिकीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होंने बताया कि 20 नवंबर 2026 को जब सरकार अपना एक वर्ष पूरा करेगी, तबतक निवेश और विकास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल करने की योजना है। महिलाओं की उपलब्धियों पर उन्होंने कहा कि इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों की भागीदारी ऐतिहासिक रही। इसमें 71 प्रतिशत महिलाओं ने वोट किया। यह आजादी के बाद का सबसे अधिक प्रतिशत है। बिहार में देश की सबसे अधिक महिला कांस्टेबल हैं। पंचायती राज में 50 प्रतिशत आरक्षण देने वाला यह पहला राज्य है वहीं सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत सीट आरक्षित है।
इस तरह की कार्यशाला बिहार में पहली बार आयोजित की जा रही है। इसमें देश के लगभग 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य एसडीजी मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क को सुदृढ़ करना, इंडिकेटर आधारित प्रगति की प्रभावी ट्रैकिंग सुनिश्चित करना तथा राज्यों की सांख्यिकीय क्षमता को सशक्त बनाना है। इसके अंतर्गत विशेष रूप से डेटा गैप की पहचान, डेटा गुणवत्ता में सुधार तथा प्रशासनिक एवं सर्वेक्षण आधारित आंकड़ों के एकीकरण पर बल दिया जा रहा है ताकि नीति निर्माण के लिए विश्वसनीय एवं अद्यतन डेटा उपलब्ध हो सके।
कार्यक्रम में पर्यावरणीय लेखांकन को भी प्रमुखता दी गई। इसके माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, संरक्षण एवं पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन कर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जेंडर सांख्यिकी को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया ताकि महिलाओं एवं पुरुषों के बीच असमानताओं को डेटा के माध्यम से बेहतर समझकर लैंगिक-संवेदनशील एवं समावेशी नीतियों का निर्माण किया जा सके।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ सौरभ गर्ग ने कहा कि ‘एसडीजी इंडिकेटर्स की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली, डेटा गुणवत्ता में सुधार तथा राज्यों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है। यह कार्यशाला इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।‘
योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ एन विजयलक्ष्मी ने कहा कि ‘बिहार में एसडीजी लोकलाइजेशन को प्राथमिकता देते हुए जिला स्तर तक निगरानी तंत्र विकसित किया जा रहा है। गैप्स की पहचान, जेंडर-संवेदनशील आंकड़ों का विकास तथा पर्यावरणीय लेखांकन को नीति निर्माण में शामिल करना हमारी प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।‘
(केंद्रीय सांख्यिकी), एमओएसपीआई (मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन ऑफ इंडिया) के महानिदेशक एन के संतोषी ने कहा कि ’सांख्यिकी नीति निर्माण की रीढ़ है। एसडीजी संकेतकों की सटीक ट्रैकिंग के लिए राज्यों की संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है।
यूएनडीपी भारत के रेजिडेंट प्रतिनिधि डॉ एंजेला लुसिगी ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ‘डेटा, साझेदारी और नवाचार’ का समन्वय आवश्यक है। पर्यावरणीय लेखांकन और जेंडर सांख्यिकी जैसे क्षेत्रों में सुदृढ़ डाटा तंत्र से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि विकास समावेशी और न्यायसंगत हो। यूएनडीपी इस दिशा में निरंतर सहयोग प्रदान करता रहेगा।‘
इसके अलावा सामाजिक सांख्यिकी, एमओएसपीआई के अपर महानिदेशक एस सी मलिक ने एसडीजी इंडिकेटर फ्रेमवर्क, डेटा वैलिडेशन एवं रिपोर्टिंग तंत्र को मजबूत करने की जरुरत पर बल दिया। इस अवसर पर मिनिस्ट्री ऑफ एसपीआई और योजना विकास विभाग की विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया।

 

2. बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता: मंगल पांडेय

पटना/स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि स्वस्थ बिहार की परिकल्पना बच्चों के सम्पूर्ण मानसिक एवं शारीरिक विकास से ही पूरी हो सकती है। इसको लेकर सरकार बच्चों को निरंतर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा रही है। इसी दिशा में राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राज्य के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की आंखों की जांच की जा रही है। इसके लिए विशेष नेत्र जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों के सिविल सर्जन को निर्देशित किया गया है।

श्री पांडेय ने कहा कि स्कूल आई स्क्रीनिंग अभियान को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा रहा है। इसके लिए जिले के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य संस्थानों के नेत्र सहायक द्वारा अपने प्रखंड के सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाइल हेल्थ टीम से समन्वय कर विद्यालयों में जाकर बच्चों की आंखों की जांच की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में दृष्टि दोष की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। स्कूल आई स्क्रीनिंग राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

श्री पांडेय ने कहा कि जांच के दौरान जिन बच्चों में दृष्टि दोष पाए जाते हैं, उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान में विस्तृत जांच के लिए भेजा जा रहा है। इसके बाद दृष्टि दोष से प्रभावित बच्चों को उनके पावर के अनुसार निःशुल्क चश्मा उपलब्ध कराया जा रहा है। विगत वर्ष 2025 में राज्य में लगभग 3,57,544 सरकारी स्कूल के बच्चों की नेत्र स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जिसमें नेत्र दोष वाले बच्चों को 14,467 निःशुल्क चश्मों का वितरण भी किया गया है। इस पहल से बच्चों की पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में मदद मिल रही है।