बिहार

मधुबनी में विकास को मिलेगी नई रफ्तार :DM।। 3.जिलाधिकारी की अध्यक्षता में उद्योग संवाद का हुआ आयोजन।। 3. भामती वाचस्पति महोत्सव–2026 का परिचर्चा सत्र के साथ भव्य शुभारंभ

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज
Listen to this article

न्यूज डेस्क 

मधुबनी /जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने कल शनिवार देर शाम को समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में पथ निर्माण एवं भवन निर्माण विभाग से संबंधित जिले की शीर्ष 10 महत्वपूर्ण विकास योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा किया।उन्होंने बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति, भौतिक एवं वित्तीय प्रगति तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की विस्तार से समीक्षा कर कई निर्देश भी दिए।
*जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए, ताकि आम नागरिकों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध हो सके और जिले के विकास को नई गति मिल सके।

प्रमुख योजनाएं एवं उनकी वर्तमान स्थिति

1. निधि चौक – रेलवे स्टेशन (महावीर मंदिर) सड़क चौड़ीकरण लगभग ₹3117.58 लाख की लागत वाली इस परियोजना का करीब 65 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष कार्य को शीघ्र पूरा करने की दिशा में कार्रवाई जारी है।

2. औंसी जीरोमाइल – कमतौल कोठी (बिस्फी विद्यापति जन्मस्थली मार्ग) 15.50 किमी लंबी इस सड़क परियोजना पर लगभग ₹6667.64 लाख की लागत से कार्य प्रारंभ किया गया है और आधारभूत निर्माण कार्य प्रगति पर है।

3. बाबूबरही बाजार में पीक्यूसी सड़क एवं नाली निर्माण
लगभग ₹621.54 लाख की लागत से चल रही इस योजना का करीब 13.5 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

4. सिघानिया चौक – सूडी हाई स्कूल सड़क निर्माण
स्टेडियम चौक, महाराजगंज चौक और गांधी चौक होते हुए बनने वाली 2.45 किमी सड़क पर ₹1752.65 लाख की लागत से कार्य जारी है और लगभग 9 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है।
5. आर.के. कॉलेज मुख्य द्वार –भुवना उद्यान सड़क एवं नाली निर्माण ₹1270.72 लाख की लागत वाली इस योजना का कार्यादेश जारी कर दिया गया है तथा शीघ्र निर्माण कार्य प्रारंभ होगा।
6. राजनगर – मोतीपुर – खैरा सड़क चौड़ीकरण 12.50 किमी लंबी इस परियोजना पर ₹7337.73 लाख की लागत स्वीकृत है।कार्य प्रारंभ की प्रक्रिया जारी है।

7. खजौली (संतु चौक) – सुक्की सड़क चौड़ीकरण लगभग ₹976.56 लाख की लागत वाली इस परियोजना के लिए पुनः निविदा प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है और शीघ्र कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

8. दीर्घकालीन सड़क अनुरक्षण योजना (OPRMC) – पैकेज 07A₹8229.28 लाख की लागत वाली इस योजना का लगभग 88 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

 

9. OPRMC – पैकेज 07Bइस योजना के अंतर्गत सड़क अनुरक्षण का कार्य ₹7173.73 लाख की लागत से किया जा रहा है, जिसमें लगभग 82 प्रतिशत प्रगति हो चुकी है।

10. खुटौना बाजार – तेनुआही सड़क चौड़ीकरण15.55 किमी लंबी इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना पर ₹8356.24 लाख की लागत स्वीकृत है। अधिकांश निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं और परियोजना अंतिम चरण में है।

मधुबनी के विकास को मिलेगा मजबूत आधार
बैठक में जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने कहा कि इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने से मधुबनी जिले में आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी। इससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क और बेहतर होगा,यातायात व्यवस्था सुगम एवं सुरक्षित बनेगी,व्यापारिक एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, तथा आम नागरिकों को बेहतर आवागमन सुविधा प्राप्त होगी।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्माण कार्यों में तेजी एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करे , ताकि योजनाओं का लाभ जिले के लोगों को समय पर मिल सके।

3.जिलाधिकारी की अध्यक्षता में उद्योग संवाद का हुआ आयोजन

 

मधुबनी जिले के औद्योगिक विकास को सुदृढ़ करने तथा उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से जिलाधिकारी आनंद शर्मा की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में उद्योग संवाद का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े उद्यमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखीं।
उद्योग संवाद में महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र, मधुबनी,क्षेत्रीय प्रबंधक, बीआईएडीए, पंडौल, परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, मधुबनी सहित बीआईएडीए क्षेत्र के सभी उद्यमी उपस्थित रहे।
संवाद के दौरान उद्यमियों द्वारा मुख्य रूप से बिजली कटौती, विद्युत दरों में व्यावहारिक कठिनाइयों तथा अनियमित आपूर्ति की समस्याएं उठाई गईं। जिलाधिकारी ने इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित उद्यमियों से फिक्स चार्ज एवं अन्य समस्याओं के संबंध में सुधार के संबंध विस्तृत प्रस्ताव की मांग की गयी जिस पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उद्योग हित में पूर्व में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय कि समीक्षा की गई जिस पर उद्यमियों द्वारा संतोष व्यक्त किया गया।
इसके अतिरिक्त औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की समुचित निकासी, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, सुरक्षा गार्ड की तैनाती, अग्निशमन केंद्र की उपलब्धता सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने को लेकर जिलाधिकारी द्वारा शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया एवं बताया गया इस पर कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। बियाडा के क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा अवगत कराया गया कि इस संबंध में एक प्राक्कलन तैयार कर पटना कार्यालय को आवश्यक कार्रवाई एवं निर्णय हेतु उपलब्ध करा दिया गया है।
जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश के आलोक मे प्रत्येक माह के द्वितीय सोमवार को उद्यमियों की समस्याओं के समाधान हेतु वर्कशॉप/सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। जिसके संपुष्टि उद्यमियों द्वारा की गई।

 

3. भामती वाचस्पति महोत्सव–2026 का परिचर्चा सत्र के साथ भव्य शुभारंभ

मधुबनी में कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन, मधुबनी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “भामती वाचस्पति महोत्सव–2026” का शुभारंभ आज एक गरिमामय एवं बौद्धिक वातावरण में परिचर्चा सत्र के साथ हुआ। यह महोत्सव मिथिला की समृद्ध दार्शनिक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना तथा ज्ञान-साधना की गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आयोजन स्थल पर विद्वानों, शिक्षाविदों, संस्कृति प्रेमियों, शोधार्थियों एवं आम नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने इस महोत्सव को विशेष गरिमा प्रदान की।
शुभारंभ अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० रमाकांत पाण्डेय, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री नीतीश कुमार, भामती वाचस्पति समिति के अध्यक्ष श्री रत्नेश्वर झा, प्रो० देवनारायण झा, प्रो० सुरेश्वर झा, प्रो० दीपनाथ झा तथा डॉ० संजीत कुमार सहित अनेक विद्वतजन एवं गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने भामती और वाचस्पति मिश्र की दार्शनिक परंपरा, मिथिला की बौद्धिक धरोहर और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
परिचर्चा सत्र में वक्ताओं ने कहा कि मधुबनी केवल कला और लोकसंस्कृति की भूमि ही नहीं, बल्कि दर्शन, तर्कशास्त्र, शास्त्रार्थ और वैचारिक परंपरा की भी एक महान भूमि रही है। वाचस्पति मिश्र और भामती जैसी विभूतियां इस क्षेत्र की उस प्रखर बौद्धिक चेतना का प्रतीक हैं, जिसने भारतीय ज्ञान-संपदा को नई दिशा दी। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि ऐसे महोत्सव नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, सांस्कृतिक अस्मिता को मजबूत करने तथा स्थानीय गौरव को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री “सर्वतन्त्र स्वतंत्र” का विधिवत विमोचन किया गया। यह डॉक्यूमेंट्री भामती-वाचस्पति परंपरा, मिथिला की ज्ञानधारा तथा इस सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न आयामों को प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत करती है। इसके साथ ही स्मारिका “वाचस्पति दर्पण–2026” का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया। स्मारिका में महोत्सव, भामती-वाचस्पति परंपरा तथा क्षेत्रीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण और शोधपरक आलेख संकलित हैं, जो इस आयोजन को एक स्थायी वैचारिक दस्तावेज का स्वरूप प्रदान करते हैं।
महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर यह स्पष्ट रूप से प्रतिध्वनित हुआ कि भामती वाचस्पति महोत्सव–2026 केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि मिथिला की आत्मा, उसकी स्मृति, उसकी विद्वत्ता और उसके सांस्कृतिक गौरव का उत्सव है। यह आयोजन स्थानीय परंपराओं के सम्मान, सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण तथा ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आयोजन से जुड़े अधिकारियों एवं विद्वानों ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, मिथिला की शास्त्रीय परंपरा को पुनर्प्रतिष्ठित करना तथा समाज में साहित्य, संस्कृति और दर्शन के प्रति व्यापक रुचि का विकास करना है। इस प्रकार के आयोजन मधुबनी को एक सशक्त सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होंगे।
महोत्सव के अंतर्गत आज संध्या 6:00 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा। सांस्कृतिक संध्या में क्षेत्रीय लोक-संस्कृति, पारंपरिक कला, संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मिथिला की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा का मनोहारी प्रदर्शन किया जाएगा। आयोजकों ने जिले के नागरिकों, कला प्रेमियों, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों एवं संस्कृति अनुरागियों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने की अपील की है।
“भामती वाचस्पति महोत्सव–2026” का यह शुभारंभ मधुबनी के सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। यह आयोजन न केवल अतीत के गौरव को स्मरण करने का अवसर है, बल्कि वर्तमान को सांस्कृतिक चेतना से संपन्न करने और भविष्य को वैचारिक आधार प्रदान करने की दिशा में भी एक प्रेरक पहल है। जिला प्रशासन, मधुबनी तथा कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार की यह संयुक्त पहल निश्चित रूप से जिले की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।