बिहार

कॉलेज ने स्थापित किए नए कीर्तिमान, अब बनेगी राष्ट्रीय पहचानः प्रो. उपेंद्र प्रसाद ।। 2.राज्य में चल रहे विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यों की प्रगति की 13 मार्च को होगी समीक्षा।। 3. तकनीक, शोध और नीति से बिहार में गन्ना विकास को मिलेगी नई दिशा।।

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राजकुमार यादव 

पटना/पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उपेंद्र प्रसाद सिंह ने मंगलवार को कहा कि बीडी कॉलेज ने कई नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। जल्द ही कॉलेज की पहचान राष्ट्रीय स्तर की होगी। प्रो. उपेंद्र बापू टावर और बीडी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कॉलेज की 56वें स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कॉलेज में हो रहे विकास कार्यों की सराहना की। कुलपति ने इस उपलब्धि का पूरा श्रेय कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रत्ना के नेतृत्व को दिया।
इस अवसर पर प्राचार्या प्रो. रत्ना अमृत ने कहा कि बापू टावर सभागार में स्थापना दिवस मनाना अपने आप में प्रेरणादायी है। महात्मा गांधी के विचारों को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि आप वह परिवर्तन बनिए जो आप संसार में देखना चाहते हैं। महाविद्यालय का भी यही संकल्प और सामूहिक ध्येय है। प्रो. रत्ना ने बताया कि पदभार ग्रहण करते समय इस कॉलेज को पटना के प्रतिष्ठित महाविद्यालयों की श्रेणी में स्थापित करने का संकल्प लिया था और इस लक्ष्य की दिशा में लगातार कार्य हो रहा है। उन्होंने घोषणा की कि नए सत्र से कॉलेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ईडब्ल्यूएम का पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान और कौशल प्राप्त होगा।
समारोह में कॉलेज की शोध पत्रिका ज्योति शिखा और समाचार पत्रिका आकाशदीप का लोकार्पण किया गया। विशिष्ट अतिथि प्रो. राणा सिंह (सीआईएमपी) ने कहा कि प्राचार्या प्रो. रत्ना अमृत यथा नाम व गुण की कहावत को चरितार्थ करती हैं। उनके नेतृत्व में कॉलेज निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अबू बकर रिजवी ने स्थापना दिवस को संस्थान की आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि बताते हुए दोनों पत्रिकाओं के प्रकाशन को महत्वपूर्ण पहल बताया।
शोध पत्रिका ज्योति शिखा के संपादक डॉ. अमित कुमार ने प्रकाशन की सफलता का श्रेय प्राचार्या को देते हुए कहा कि फ्रंट से नेतृत्व करने वाला मार्गदर्शन कार्यों को सहज बनाता है। वहीं समाचार पत्रिका आकाशदीप के संपादक डॉ. यादव गुंजन रामराज ने संपादक मंडल के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए इसे कॉलेज के लिए नई शुरुआत बताया। समारोह में एनएसएस और एनसीसी के छात्र-छात्राओं द्वारा किए जा रहे सामाजिक उत्तरदायित्व, हरित पहल और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की भी सराहना की गई।

 

2.राज्य में चल रहे विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यों की प्रगति की 13 मार्च को होगी समीक्षा

पटना/राज्य में चल रहे विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए 13 मार्च को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर, पटना के सभा कक्ष में दोपहर 2:00 बजे आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता माननीय उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग श्री विजय कुमार सिन्हा करेंगे।
इस संबंध में उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दिसंबर 2027 तक बिहार में भूमि सर्वेक्षण का कार्य हर हाल में पूरा किया जाएगा। भूमि सर्वेक्षण पूरा होने से राज्य में भूमि अभिलेख पूरी तरह अद्यतन और पारदर्शी हो जाएंगे, जिससे आम लोगों को जमीन से जुड़े विवादों से काफी राहत मिलेगी। सर्वेक्षण के कार्य को गति प्रदान करने के उद्देश्य से ही समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इस दौरान हरेक मुद्दे की समीक्षा कर तय समय सीमा में कार्य पूरा कराना उद्देश्य है।
वहीं भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक श्री सुहर्ष भगत द्वारा जारी पत्र के अनुसार, इस बैठक में राज्य के सभी जिलों के बंदोबस्त पदाधिकारी अपने-अपने जिलों में चल रहे विशेष सर्वेक्षण कार्यों की अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन के साथ उपस्थित रहेंगे। बैठक में निदेशालय द्वारा 7 जनवरी 2026 को स्वीकृत कार्य-योजना के अनुरूप कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही पिछली बैठक के बाद हुई प्रगति का आकलन किया जाएगा तथा जिन जिलों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं है, उनकी विशेष समीक्षा की जाएगी।
समीक्षा बैठक में प्रथम चरण के 20 जिलों में खानापुरी से लेकर प्रपत्र-20 तक के कार्यों की अद्यतन स्थिति, अंतिम अधिकार अभिलेख के प्रकाशन के विरुद्ध प्रपत्र-21 में प्राप्त दावों और आक्षेपों के निपटारे की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा द्वितीय चरण के 18 जिलों में त्रिसीमाना निर्धारण, ग्राम सीमा सत्यापन तथा किस्तवार कार्यों की प्रगति का भी आकलन किया जाएगा। बैठक में ईटीएस मशीनों और आवश्यक मानव बल की उपलब्धता की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि सर्वेक्षण कार्यों को गति मिल सके। निदेशक ने सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे निर्धारित तिथि को ससमय बैठक में उपस्थित होकर अपने-अपने जिलों की अद्यतन प्रगति की जानकारी प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। इस समीक्षा बैठक में सर्वेक्षण कार्यों की गति तेज करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

 

3. तकनीक, शोध और नीति से बिहार में गन्ना विकास को मिलेगी नई दिशा

 

पटना/ज्ञान भवन, पटना में गन्ना उद्योग विभाग, बिहार सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय “गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार–2026” के दूसरे दिन गन्ना उत्पादन, उत्पादकता, रोग प्रबंधन, नई प्रौद्योगिकी, जलवायु-अनुकूल खेती और उद्योग के विस्तार से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने गंभीर मंथन किया। सेमिनार में इस बात पर जोर दिया गया कि बिहार में गन्ना क्षेत्र के विस्तार और चीनी उद्योग को नई गति देने के लिए उन्नत बीज, यंत्रीकरण, शोध-आधारित उपाय, क्षेत्र विशेष के अनुरूप तकनीक और संस्थागत समन्वय को प्राथमिकता देनी होगी।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने कहा कि बिहार में गन्ना विकास की बड़ी संभावनाएं हैं और इन्हें वैज्ञानिक शोध, तकनीकी विस्तार और संस्थागत सहयोग के माध्यम से मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, उद्योग जगत और किसानों के बीच समन्वित प्रयास से ही गन्ना क्षेत्र में स्थायी प्रगति संभव है।

भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के पूर्व निदेशक डॉ. आर. विश्वनाथन ने “बिहार में गन्ना रोग परिदृश्य” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि फसल को रोगों से सुरक्षित रखने के लिए सतत निगरानी, समय पर पहचान और वैज्ञानिक प्रबंधन रणनीति जरूरी है। उन्होंने कहा कि रोग नियंत्रण केवल उत्पादन से नहीं, बल्कि गुणवत्ता और उद्योग की स्थिरता से भी जुड़ा हुआ प्रश्न है।

शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट, कोयंबटूर के निदेशक डॉ. पी. गोविंदराज ने “गन्ना खेती में नई तकनीकें” विषय पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि बदलती कृषि परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत खेती पद्धतियों, बेहतर रोपण सामग्री और आधुनिक तकनीक को अपनाना समय की जरूरत है। उन्होंने ब्रीडर सीड उत्पादन पर विशेष बल देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज ही बेहतर उपज की आधारशिला है। उन्होंने बिहार में इस प्रकार के सेमिनार के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इससे शोध, तकनीक, उद्योग और किसानों के बीच उपयोगी संवाद का रास्ता खुलता है।

सेमिनार में आईआईटी पटना द्वारा AI, ब्लॉकचेन और QR कोड आधारित सत्यापन प्रणाली के उपयोग की संभावनाओं पर भी प्रस्तुति दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से गन्ना प्रजातियों की शुद्धता और प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सकती है। साथ ही जलजमाव से प्रभावित क्षेत्रों के लिए नई प्रजातियों के विकास तथा अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार तकनीक विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

तकनीकी सत्रों में बेतिया क्षेत्र की मिट्टी में 8.5 से अधिक क्षारीयता की समस्या पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार की मिट्टी में उर्वरता बढ़ाने, भूमि की गुणवत्ता सुधारने और उपयुक्त कृषि प्रबंधन अपनाने की दिशा में ठोस पहल जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान 25 शोध-पत्रों से युक्त एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर ईखयुक्त श्री अनिल कुमार झा ने कहा कि गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार का उद्देश्य तकनीक, शोध और नीति को खेत तक पहुँचाकर बिहार के गन्ना क्षेत्र को नई दिशा देना है ।