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ई एस आई सी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल देश के रॉल मॉडल बनेगा : संजय टाईगर ।। 2. खेमनीचक से मलाही पकड़ी तक मेट्रो ब्लॉक का उप-मुख्य सेवा सचिव ने किया निरीक्षण।। 3.सहकारिता उपलब्ध कराएगा शहद उत्पादक किसानों को बेहतर बाजार बढ़ेगी आय।। 4.गोबर-धन योजना से रसोई में बायोगैस, पशुपालकों की हो रही अतिरिक्त कमाई :श्रवण कुमार, मंत्री 

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राजकुमार यादव 

बिहटा /कर्मचारी राज्य बीमा निगम चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल बिहटा का प्लैटिनम जुबली पखवाड़ा समापन समारोह आयोजित की गयी। जिसका भव्य उद्घाटन श्रम संसाधन एवं प्रवासी कल्याण मंत्री संजय टाईगर, मुख्य अतिथि रामकृपाल यादव, विशिष्ट अतिथि विधायक भाई वीरेन्द्र एवं नप बिहटा मुख्य पार्षद प्रियंका कुमारी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। प्लैटिनम जुबली पखवाड़ा समापन समारोह को उद्घाटन करते हुए संजय टाईगर ने कहा कि देश एक तरफ अमृत महोत्सव मना रहा हैं उसी कड़ी में कर्मचारी राज्य बीमा निगम अपनी 75 वा प्लैटिनम जुबली पखवाड़ा समापन समारोह मना रहा हैं।संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए वरदान है यह न केवल चिकित्सा एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है ,बल्कि कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है ।इसका मुख्य उद्देश्य संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों को चिकित्सा ,वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। यह चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल केवल स्थानीय कर्मचारियों के लिए वरदान नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र के लोगों को मुक्त चिकित्सा सुविधा प्रदान कर रही है। राज्य सरकार ने लोगों को सुगम एवं चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोल रही यह एक ऐतिहासिक कदम है। मजदूरों के बगैर औद्योगिक विकास की परिकल्पना नहीं किया जा सकता हैं। इसके लिए केन्द्र सरकार ने श्रम संहिता कानून लाकर ऐतिहासिक बदलाव लाया हैं। अब संगठित क्षेत्र के साथ असंगठित मज़दूरों को जोड़ने के साथ चुनौतियां से निपटने के लिए राज्य सरकार हर संभव प्रयास करेगी और संसाधनों की कमी नहीं होने देगी।मुख्य अतिथि कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि ईएसआईसी एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें नियोक्ता और कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार के सुविधा , आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं बेरोजगारी भत्ता प्रदान करने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।कर्मचारियों और उनके परिवारों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर नई ऐतिहासिक कदम उठाया हैं।देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने गरीबों एवं मजदूरों की चिंता को दूर करने हेतु आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत मुफ्त में चिकित्सा उपलब्ध कराने की फैसला मील का पत्थर साबित हुई हैं ,जो आज गरीबों को भी सुलभ एवं सस्ता स्वास्थ्य चिकित्सा उपलब्ध करा रही है। विशिष्ट अतिथि विधायक भाई वीरेन्द्र ने कहा कि ई एस आई सी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने लंबे समय से जुड़े नियोक्ताओं, बीमित श्रमिकों, आश्रितों और पेंशनरों को श्रमिक कल्याण सुरक्षा एवं राष्ट्र निर्माण हेतु समर्पित है। इसको और बेहतर से बेहतर सुविधा उपलब्ध हो। ताकि यह संस्थान विश्व का नम्बर वन बन सके। नगर परिषद् के मुख्य पार्षद प्रियंका कुमारी ने कहा कि राज्य में शराब बंदी होने से सूखे नशा का प्रचलन बढ़ गया हैं। शराब बंदी के साथ सूखे नशा मुक्त बिहार बनाने की जरुरत हैं। डीन डॉ विनय कु विश्वास ने स्वागत भाषण में कहा कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम चिकित्सा कॉलेज एवं अस्पताल संगठित मजदूरों के साथ आम जनता को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए कृत संकल्पित हैं। उपस्थित लोगो मेंचिकित्सा आयुक्त रचिता विश्वास, बीमा आयुक्त प्रणय सिंहा, क्षेत्रीय निदेशक निरंजन कुमार, विमल सिंह राज्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विजय कु केसरी, संयुक्त निदेशक मुकेश कुमार, उप निदेशक वित्त रणजीत कुमार,शिशिर भारती, एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ भास्कर ने की।

 

2. खेमनीचक से मलाही पकड़ी तक मेट्रो ब्लॉक का उप-मुख्य सेवा सचिव ने किया निरीक्षण

पटना/मेट्रो रेल का सफर अब पटना वासियों के लिए जल्द ही आधुनिक शहरी परिवहन के विकल्प के तौर पर विकसित होने जा रहा है। मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के उप-मुख्य सेवा सचिव सुधीर कुमार ने मंगलवार को पटना मेट्रो के प्राथमिकता कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले मलाही पकड़ी से खेमनीचक खंड का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने पटना मेट्रो के प्राथमिकता कॉरीडोर खेमनीचक से मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन तक पटना मेट्रो का परिचालन शुरू किये जाने की तैयारियों का जायजा लिया और सभी तरह के सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण किया।
श्री प्रदीप कुमार ने अपने निरीक्षण के क्रम में सुरक्षा और विश्वसनीयता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रणालियों और यात्री सुविधाओं को परखा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यूपीएस कक्ष, लिफ्ट और एस्केलेटर, एएसएस कक्ष, एससीआर कक्ष, प्लेटफॉर्म स्तर का गहन निरीक्षण किया और कॉरिडोर के साथ-साथ ओएचई ऊंचाई माप की भी समीक्षा की। उन्होंने ईएंडएम प्रणालियों और अन्य तकनीकी प्रतिष्ठानों की भी सावधानीपूर्वक जांच की। बता दें कि पटना मेट्रो के प्राथमिकता कॉरीडोर के प्रत्येक निरीक्षण और सभी तरह की जांच ने मेट्रो रेल को परिचालन के अपने लक्ष्य के एक कदम और करीब ले आयी है।

 

3.सहकारिता उपलब्ध कराएगा शहद उत्पादक किसानों को बेहतर बाजार बढ़ेगी आय

पटना/शहद उत्पादक किसानों को आर्थिक मजबूती देने के लिए बिहार सरकार ने बड़ी पहल की है। किसानों को उनके द्वारा उत्पादित शहद का अधिकतम मूल्य प्राप्त हो सके इसके लिए सहकारिता विभाग ने 144 प्रखंड स्तरीय शहद उत्पादक एवं प्रसंस्करण समितियों का गठन किया है। ये समितियां किसानों को संगठित रूप से उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में सहायता प्रदान करेगी।
विभाग के प्रयास से राज्य स्तर पर बिहार राज्य शहद उत्पादक एवं प्रसंस्करण फेडरेशन का भी गठन हो चुका है। यह फेडरेशन प्रखंड स्तरीय समितियों को एक मंच प्रदान करेगा, जिससे शहद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, ब्रांडिंग, बड़े बाजारों तक पहुंच और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
साथ ही कृषि विभाग, उद्योग विभाग और कॉम्फेड (सुधा) के बीच शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए समेकित प्रयास करने पर सहमति बनी है। इससे किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, बेहतर उपकरण और बाजार लिंकेज मिलेगा।

विशेष है बिहार का शहद
मुजफ्फरपुर, वैशाली और समस्तीपुर लीची के अपने बड़े-बड़े बागों के लिए जाने जाते हैं। लीची का शहद बिहार के सबसे लोकप्रिय शहद में से एक है और अपने अनोखे स्वाद के लिए इसकी बहुत मांग है। सरसों का शहद व्यापक रूप से सरसों की खेती वाले क्षेत्रों जैसे नालंदा और पटना में उत्पादित किया जाता है, इसी तरह औरंगाबाद और रोहतास में तिल का शहद भी उत्पादित किया जाता है।
बिहार में लीची, सरसों, तिल और सूरजमुखी जैसी फसलों की वजह से शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार के प्रयास से बिहार शहद उत्पादन में निरंतर आगे बढ़ रहा है, देश में यह शहद उत्पादन में चौथे स्थान पर है। राज्य सरकार सहकारिता मॉडल के जरिए किसानों की मध्यस्थों पर निर्भरता कम करना चाहती है। सरकार की कोशिश है कि किसानों की पहुंच उपभोक्ताओं या बड़े खरीदारों तक हो ताकि उनकी आय में वृद्धि हो।

 

4.गोबर-धन योजना से रसोई में बायोगैस, पशुपालकों की हो रही अतिरिक्त कमाई :श्रवण कुमार, मंत्री 

गया / बोधगया ब्लॉक अंतर्गत बतसपुर गांव में गृहणियों को रसोई के लिए उपला बनाने और उसके धुएं की बदहाली से हमेशा-हमेशा के लिए छुटकारा मिल चुका है। इन महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)/लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत स्थापित गोबर-धन योजना से आया है। गांव में बायो गैस प्लांट के लगने से गृहणियों को काफी कम कीमत पर रसोई के लिए जहां बायो गैस मिल जा रहा है वहीं पशु अपशिष्ट के निराकरण के लिए भी एक ऐतिहासिक पहल शुरू हो गई है।
गया जिले के बोधगया ब्लॉक अंतर्गत बतसपुर गांव में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण वर्ष 2023 में गोबर-धन योजना के तहत बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया। करीब 50 लाख रुपये की लागत से स्थापित प्लांट में गोबर खपत की क्षमता प्रतिदिन 2 टन है। इसके लिए गोबर गांव में ही 50 पैसे/किलो की दर से पशुपालकों से खरीदा जा रहा है। इससे जहां पशुपालकों की अतिरिक्त कमाई हो रही है वहीं प्लांट में लगे पाइपलाइन से बायोगैस ग्रामीणों की रसोई तक पहुंचाया जा रहा है।
मौजूदा समय में प्लांट से गांव के करीब 35 घरों में बायोगैस की आपूर्ति की जा रही है। गांव के लोगों का कहना है कि बायोगैस प्लांट की स्थापना से एक तरफ गांव में उत्पादित होने वाले गोबर का सही उपयोग हो रहा है तो दूसरी ओर ग्रामीणों को ईंधन के लिए बायोगैस भी मिलने लगा है। प्लांट से निकलने वाला बायो कंपोस्ट काफी कम कीमत पर किसानों को बेचा जा रहा है।

वर्ष 2025-26 में बतसपुर बायो गैस प्लांट में उत्पादित गैस और बायो कंपोस्ट
गोबर की खपत बायोगैस का उत्पादन कंपोस्ट का उत्पादन
(किलोग्राम में) (घन मीटर में) (किलोग्राम में)
102518 2658 16504

केस- 1
एलपीजी की तुलना में आधी कीमत पर मिल रहा गैस*
बायो गैस प्लांट की स्थापना के बाद रसोई में गृहणियों की सहूलियत बढ़ गई है। उन्हें घंटों उपला बनाने, सूखाने और घर में स्टोर करने की समस्या के साथ ही धुआं से सराबोर रसोई से पूरी तरह छुटकारा मिल चुका है। इससे घर में स्वच्छता बढ़ी है और प्रदूषण की समस्या हमेशा-हमेशा के लिए दूर हुई है। महिलाओं को एलपीजी गैस की तुलना में आधी कीमत पर गांव में ही बायो गैस की सुविधा उपलब्ध है।
शोभा देवी, बतसपुर, बोधगया।

केस- 2
गांव में बायो गैस प्लांट की स्थापना से पहले काफी संघर्ष करना पड़ता था। हर दिन सबेरे उठकर गोबर से उपला बनाने की चिंता बनी रहती थी। रसोई में उपलों के जलने वाले चूल्हे से बहुत धुआं निकलता था। इससे कई परेशानियां होती थीं। धुएं के कारण आंखों में जलन और खांसी की शिकायत हमेशा बनी रहती थी। होती थी, अक्सरहां खांसी की समस्या भी बनी रहती थी। बरसात के दिन में महिलाओं की कठिनाई काफी बढ़ जाती थी। उपला के न सूखने की वजह से चूल्हा जलाना मुश्किल हो जाता था। लेकिन यह समस्या अब स्थाई रूप से दूर हो चुकी है। महिलाओं की जीवन-स्तर के साथ पूरी रसोई की सूरत बदल चुकी है।निर्मला देवी, बतसपुर, बोधगया।

कोट में
बायोगैस से लकड़ी, कोयला और केरोसिन जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होती है। इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे जलवायु परिवर्तन में संभावित योगदान कम होता है। इसके साथ बायोगैस ऊर्जा का एक स्वच्छ स्रोत है और इससे घर के अंदर वायु प्रदूषण और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं कम होती हैं। गया और पूर्वी चंपारण में बायो गैस प्लांट के पायलट प्रोजेक्ट सफल रहे हैं। लोहिया स्वच्छ मिशन के तहत सामुदायिक बायोगैस संयंत्रों को बढ़ावा देने के लिए विभाग के पास पर्याप्त धनराशि है। केंद्र सरकार भी विकेंद्रीकृत तरीके से बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने में सहयोग कर रही है। हमें अन्य जिलों से भी इसी तरह की पहल की उम्मीद है।