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2953 नियोजित शिक्षकों पर दर्ज हुई एफआईआर, 11 साल से जारी है जांच…

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न्यूज डेस्क 

पटना/बिहार में फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे शिक्षक बनने का मामला लगातार सामने आ रहा है। वर्ष 2006 से 2015 के बीच बहाल हुए 2953 नियोजित शिक्षकों के प्रमाणपत्रों को जांच में फर्जी पाए जाने के बाद उनके खिलाफ राज्य के विभिन्न जिलों के थानों में एफआईआर दर्ज की गई है। अब तक इस मामले में कुल 1748 केस दर्ज किए जा चुके हैं और जांच की प्रक्रिया लगातार जारी है।

जांच एजेंसी निगरानी विभाग की पड़ताल में इन शिक्षकों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए थे। एक-एक एफआईआर में कई शिक्षकों को आरोपी बनाया गया है। यही कारण है कि 1748 मामलों में ही 2953 शिक्षकों के नाम सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक अब तक 6 लाख 67 हजार 144 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच की जा चुकी है, जिसके बाद यह मामला सामने आया।

बताया जाता है कि पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर निगरानी विभाग पिछले करीब 11 वर्षों से इस मामले की जांच कर रहा है। निगरानी के डीजी जेएस गंगवार के अनुसार वर्ष 2026 के शुरुआती दो महीनों में भी इस कार्रवाई की रफ्तार बनी रही। जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान 31 नई एफआईआर दर्ज की गई हैं।

जांच के दौरान विश्वविद्यालयों और विभिन्न शिक्षा बोर्डों से प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। इसी प्रक्रिया में कई ऐसे गिरोहों के संकेत भी मिले, जो फर्जी डिग्री और प्रमाणपत्र तैयार कर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का काम करते थे। ऐसे बोर्ड और विश्वविद्यालय भी निगरानी के रडार पर हैं, जिनके दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां हुई थीं।

निगरानी विभाग का कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुई है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षकों की सेवा समाप्त की जा सकती है और दोष साबित होने पर उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो अलग-अलग वर्षों में दर्ज मामलों की संख्या भी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। वर्ष 2015 में 67 केस दर्ज हुए, जिसमें 186 आरोपी बनाए गए। 2016 में 109 केस और 288 आरोपी सामने आए, जबकि 2017 में 75 केस में 257 लोगों को आरोपी बनाया गया। 2018 में 69 केस में 395 आरोपी, 2019 में 121 केस में 370 आरोपी और 2020 में 66 केस में 126 आरोपी सामने आए।

इसके बाद 2021 में 181 केस में 263 आरोपी बनाए गए, जबकि 2022 में 445 केस में 453 आरोपी सामने आए। वर्ष 2023 में 337 केस दर्ज हुए और इतने ही लोगों को आरोपी बनाया गया। 2024 में 111 केस और 111 आरोपी सामने आए। वहीं 2025 में 136 केस दर्ज हुए, जिनमें 136 आरोपी बनाए गए। 2026 में अब तक 31 केस दर्ज किए जा चुके हैं और इनमें भी 31 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी प्रमाणपत्रों के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और किस स्तर तक इसकी जड़ें फैली हुई हैं।