गृह मंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय सीमांचल दौरा खत्म होते ही बिहार में मुख्यमंत्री बदले और राज्यपाल भी हटे कुछ
राम दुलार यादव
गृह मंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय सीमांचल दौरा खत्म होते ही बिहार में मुख्यमंत्री बदले जा रहे हैं। नीतीश कुमार को राजनीतिक विदाई दी जा रही है। सियासी बारात निकल चुकी है। फिर तुरंत राज्यपाल बदले गए। सैयद अता हसनैन को नया गवर्नर बनाया गया। तभी पूर्णिया सांसद पप्पू यादव का एक सनसनीखेज बयान आ गया। दावा ये कि मुख्यमंत्री को बदलना, राज्यपाल को बदलना, बंगाल में गवर्नर सी. वी. आनंद बोस का इस्तीफा। आर. एन. रवि का नया राज्यपाल बनना। यह सब कुछ बीजेपी की एक बड़ी सियासी साजिश का हिस्सा है। पप्पू यादव का दावा है कि सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी चल रही है। उनके मुताबिक इसके लिए पहले पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है और फिर बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पास करवाने की कोशिश होगी। इसलिए बंगाल से लेकर बिहार तक बीजेपी ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है। क्या पप्पू यादव के इस दावे में कोई दम है? क्या पप्पू यादव ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह की उस चाल को पढ़ लिया है जिसे समझना नामुमकिन माना जाता है।
जब इस दावे को संवैधानिक प्रक्रिया और उपलब्ध राजनीतिक बयानों के साथ परखा जाता है तो कई सवाल खड़े हो जाते हैं। सबसे पहले राजनीतिक प्रतिक्रिया से समझिए। बीजेपी के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने साफ कहा है कि नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाने जैसी कोई योजना नहीं है। यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का सीमांचल दौरा सिर्फ क्षेत्र के विकास और राजनीतिक संवाद के लिए था। अब अगर कानून की बात करें तो भारत में किसी नए राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का गठन भारत के संविधान का अनुच्छेद 3 के तहत होता है। इसके अनुसार नया राज्य बनाने या किसी राज्य की सीमा बदलने का अधिकार संसद के पास होता है। राष्ट्रपति की सिफारिश पर संसद में विधेयक लाया जाता है। संबंधित राज्य की विधानसभा से केवल राय मांगी जाती है, उसकी सहमति अनिवार्य नहीं होती। यानी न तो राज्यपाल का इसमें कोई निर्णायक रोल होता है और न ही यह जरूरी है कि राज्य विधानसभा से प्रस्ताव पास ही कराया जाए।
इसी तरह किसी राज्य के हिस्से को अलग करने के लिए उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना भी कोई संवैधानिक शर्त नहीं है। उदाहरण के तौर पर जब तेलंगाना को आंध्र प्रदेश से अलग कर नया राज्य बनाया गया था, तब वहां राष्ट्रपति शासन लागू नहीं किया गया था।
इन तथ्यों के आधार पर देखें तो पप्पू यादव के दावे में जो बातें कही गई हैं वह सिर्फ एक प्रोपेगेंडा लगता है। सीधी बात यह है कि यदि कभी सीमांचल या किसी अन्य क्षेत्र को अलग कर नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाना होगा तो उसकी प्रक्रिया संसद से शुरू होगी ,न कि किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने या विधानसभा से प्रस्ताव पास कराने से।

