त्रिभाषी शब्दकोश का विमोचन, साहित्यकारों ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
पटना /भाषा और साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली से प्रकाशित प्रामाणिक हिंदी–अंग्रेज़ी-उर्दू शब्दकोश के विमोचन एवं लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधान परिषद के उपसभापति प्रो रामवचन राय ने किया जबकि संचालन युवा साहित्यकार डा. एबी हमीदी ने किया। इसके बाद एक गरिमामय कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें अनेक ख्यातिप्राप्त कवियों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया।
कवि-सम्मेलन में अराधना प्रसाद, साबिर गियानी, अविनाश अमन, अहमद बल्हारवी, डॉ. एम. अजुम, सलाहुद्दीन साबिर, सैयद मरग़ूब असर फातमी, अबरार अहमद, अंजार सिद्दीक़ी सहित कई रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
इस अवसर पर वक्ताओं ने त्रिभाषी शब्दकोश के संपादक ज़ुबैर अहमद भागलपुरी के कार्य की मुक्त कंठ से सराहना की। प्रो. जावेद अख़्तर और डॉ. महबूब आलम ने शब्दकोश निर्माण की जटिल प्रक्रिया और उससे जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डालते हुए इसे भाषा-सेवा का दुर्लभ उदाहरण बताया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में उर्दू सलाहकार बोर्ड के पूर्व चेयरमैन जनाब शफ़ी मशहदी ने कहा कि शब्दकोश लेखन अत्यंत कठिन और धैर्यसाध्य कार्य है, जिसमें वर्षों का समय और निरंतर परिश्रम लगता है। उन्होंने त्रिभाषी शब्दकोश को एक असाधारण और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
श्री एस.एम. परवेज़ आलम ने कहा कि भाषा और साहित्य की इस महान सेवा के लिए ज़ुबैर अहमद भागलपुरी बधाई के पात्र हैं। वहीं, बिहार विधान परिषद के सदस्य जनाब आफ़ाक़ अहमद ख़ान ने कहा कि यह कार्य किसी संस्था के स्तर का था, जिसे एक अकेले व्यक्ति ने सफलतापूर्वक पूरा किया। श्री अरशद फ़िरोज़ ने इसे अनुवाद कार्य के लिए अत्यंत उपयोगी बताया, जबकि ज़ाकिर हुसैन ने कहा कि ज़ुबैर अहमद ने कलीमुद्दीन अहमद की शब्दकोशीय परंपरा को आगे बढ़ाया है।
यह कार्यक्रम बिहार गवर्नमेंट उर्दू लाइब्रेरी, अशोक राजपथ, पटना में आयोजित हुआ, जहाँ बिहार विधान परिषद के उपसभापति और प्रख्यात हिंदी विद्वान जनाब प्रो (डा ) रामवचन राय ने पुस्तक का विमोचन किया।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रसिद्ध पत्रकार और उर्दू एक्शन कमेटी, बिहार के अध्यक्ष एस.एम. अशरफ़ फ़रीद ने कहा कि यह त्रिभाषी शब्दकोश हिंदी-अंग्रेज़ी-उर्दू तीनों भाषाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसमें सामान्य बोलचाल के शब्दों के साथ-साथ दफ़्तरी, तकनीकी, धार्मिक और प्रशासनिक शब्दावली भी शामिल है, जो इसे वर्तमान समय की एक आवश्यक कृति बनाती है।
शब्दकोश के संपादक ज़ुबैर भागलपुरी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि यह त्रिभाषी शब्दकोश 20 वर्षों की चिर साधना का परिणाम है। यह हिंदी से उर्दू में अनुवाद करने का सबसे उपयोगी माध्यम है। इसमें सामान्य शब्दावली के साथ-साथ शब्दों के गुण अर्थ को भी समकालीनता के परिप्रेक्ष्य में रेखांकित किया गया है। इसमें कार्यालय एवं प्रशासनिक स्तर पर उपयोग में आने वाले पारिभाषि शब्दों को भी शामिल किया गया है।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने इस आशा के साथ ज़ुबैर अहमद को बधाई दी कि भविष्य में भी वे भाषा और साहित्य के क्षेत्र में इसी तरह के महत्वपूर्ण कार्य करते रहेंगे।

