क्या नीतीश कुमार की छवि को बचाने के लिए उनकी जॉइनिंग को कानूनी नुक्ता लगा कर होल्ड पर रख दिया गया
पटना/बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और ग्रामीण कार्य मंत्री डॉक्टर अशोक चौधरी सात महीने पहले इस कारण चर्चा में रहे थे कि उनका चयन असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए हो गया।अब उससे अधिक चर्चा में इसलिए हैं कि उनके हाथ आई नौकरी अचानक लटक गई।सभी सफल अभ्यर्थियों में से केवल उन्हें ही नियुक्ति पत्र नहीं मिला।क्या उनकी नियुक्ति रोक दी गई है? क्या नीतीश कुमार की छवि को बचाने के लिए उनकी जॉइनिंग को कानूनी नुक्ता लगा कर होल्ड पर रख दिया गया।
उनकी नियुक्ति अभी लंबित है, रद्द नहीं हुई ह।इसकी जल्द जांच क्यों नहीं हो रही? माना जा रहा है कि अगर जांच के बाद नियुक्ति की मंजूरी मिली तब भी सरकार की किरकिरी होगी और अगर रद्द हुई तब तो पूरी चयन प्रकिया ही सवालों के घेरे में आ जाएगी।खुद मंत्री अशोक चौधरी भी कानूनी मुश्किल में फंस जाएंगे ये जांच कब तक चलेगी।

