नीतीश की पार्टी का विभीषण कौन
राम दुलार यादव ,संपादक
बिहार की राजनीति का सबसे ज्वलंत प्रश्न इन दिनों ये बना हुआ है। खासकर जेडीयू के कार्यकर्ता यही सवाल कर रहे हैं। अब तो आरसीपी सिंह जैसे लीडर भी पार्टी में नहीं रहे, लेकिन उसके बाद भी जेडीयू के अंदर उस विभीषण की तलाश हो रही है। जैसे ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आधिकारिक तौर पर राज्यसभा के लिए नामांकन की घोषणा की जेडीयू के दर्जनों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, जिन्हें ललन सिंह के नाम से जाना जाता है, के खिलाफ नीतीश को धोखा देने और उन्हें जबरदस्ती सत्ता छोड़ने के लिए राजी करने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
नीतीश कुमार ने कहा कि देश की चारों विधानसभाओं में सेवा करना उनकी लंबे समय से इच्छा रही है। इससे भाजपा से ही संभावित नए मुख्यमंत्री के कार्यभार संभालने का रास्ता साफ हो गया है। नाराज जेडीयू कार्यकर्ताओं ने बिहार के मंत्री सुरेंद्र मेहता और जेडीयू नेता संजय गांधी को मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों में मुस्लिम और ओबीसी समुदायों के नेता भी शामिल थे, जिन्हें नीतीश का प्रमुख समर्थक आधार माना जाता है।

