बिहार

डॉग स्कॉयड में स्वानों की संख्या बढ़कर हुई 96, 50 नए की होगी खरीद ।। 2 .गन्ना यंत्रीकरण योजना के तहत यंत्र खरीदने की तिथि 19 तक विस्तारित ।। 3. बिहार के हर जिले में होगी एएलएस एम्बुलेंस की सुविधा, क्रिटिकल मरीजों को मिलेगी संजीवनी ।। 4. ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण में गुणवत्ता पर जोर ।। 5. 1 अप्रैल से सभी जिलों में सड़क सुरक्षा को लेकर ड्राइवरों को दी जाएगी ट्रेनिंग।। 6, .4 वर्षों में 18 लाख से अधिक महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना का लाभ

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राम कुमार सिंह 

बिहार/पुलिस महकमा के डॉग स्कॉयड (स्वान दस्ता) को सुदृढ़ करने पर खासतौर से ध्यान दिया जा रहा है। हाल में खासतौर से प्रशिक्षित 30 स्वानों को शामिल किया गया है। इससे मौजूदा समय में स्वान की संख्या बढ़कर 96 हो गई है। इस स्वान दस्ते स्वानों के स्वीकृत पद की संख्या 200 है, जिसमें 96 प्रशिक्षित स्वान मौजूद हैं। आगामी वर्ष तक 50 नए स्वानों को इस दस्ते में जोड़ने की योजना है। इसके बाद स्वान दस्ता में इनकी संख्या बढ़कर 146 हो जाएगी।
स्वान दस्ता सीआईडी के अधीन आता है। वर्तमान में विशेष रूप से प्रशिक्षित स्वानों को दरभंगा एवं पूर्णिया स्थित हवाईअड्डा के अलावा पटना मेट्रो स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था में 2-2 की संख्या में तैनात किया गया है। इसके अलावा जिन सीमावर्ती जिलों में कैनेल (कुत्तों के रहने वाले विशेष स्थान) की व्यवस्था है, वहां भी 1-1 की संख्या में इन स्वानों की तैनाती कर दी गई है। साथ ही पटना में वीआईपी चेकिंग जैसे अतिमहत्वपूर्ण कार्यों के लिए 8 स्वान को अलग से रखा गया है। इन सभी स्वानों की तैनात अलग-अलग कार्यों में खासतौर से की गई है।
अगले वर्ष तक 150 करने की योजना
डॉग स्कॉयड में प्रशिक्षित स्वानों की संख्या को बढ़ाकर वर्ष 2027 तक 150 करने की योजना है। इसे लेकर सीआईडी के स्तर पर कवायद तेजी से चल रही है। इस वर्ष जून-जुलाई में 50 नए स्वान के खरीद की प्रक्रिया पूरी करके इन्हें हर तरह से प्रशिक्षित करने के लिए तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के पास मौजूद मोइनाबाद स्थित आईआईटीए (इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंस ट्रेनिंग एकेडमी) में प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। करीब एक वर्ष का विशेष प्रशिक्षण इन्हें देने के बाद सभी स्वान को बिहार पुलिस के स्वान दस्ते में शामिल किया जाएगा। यानी अगले वर्ष जुलाई-अगस्त तक इनके शामिल होने की संभावना है। वर्तमान में 96 स्वान राज्य के स्वान दस्ते में मौजूद हैं। इस तरह अगले वर्ष तक बिहार के स्वान दस्ते में इनकी संख्या करीब 150 तक होने की संभावना है। इससे संबंधित प्रक्रिया जारी है। स्वान की जिन प्रजातियों को शामिल किया जाता है, उसमें एलसीसी, जर्मन शेफर्ड और लैबराडॉग मुख्य रूप से हैं।
स्वान दस्ता में संख्या बढ़ने से ये होंगे फायदे
पुलिस महकमा के डॉग स्कॉयड में स्वानों की संख्या बढ़ने से अनुसंधान बेहतरीन तरीके से होने के साथ ही वीआईपी चेकिंग समेत अन्य तरह की चेकिंग में खासतौर से मदद मिलेगी। सभी प्रमुख स्थानों पर चेकिंग की व्यवस्था को चाक-चौबंद करने में प्रशिक्षित स्वान की भूमिका काफी अहम होती है। कई कांडों के अनुसंधान में भी इनकी भूमिका अहम होती है।
कोट में..……
हाल में विशेष तौर से प्रशिक्षित 30 नए स्वान को डॉग स्कॉयड में शामिल किया गया है। अगले वर्ष तक स्वान दस्ते में इनकी संख्या 150 तक करने की योजना है। इस पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। सभी स्वान को खासतौर से मोइनाबाद स्थित ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षित करने के बाद ही दस्ते में शामिल किया जाता है। अच्छे नस्ले के स्वान की खरीद करने को लेकर प्रक्रिया चल रही है।

 

 

2 .गन्ना यंत्रीकरण योजना के तहत यंत्र खरीदने की तिथि 19 तक विस्तारित

गन्ना यंत्रीकरण योजना के तहत जारी परमिट की तिथि को विस्तारित करते हुए 19 मार्च कर दिया गया है। तीसरे और चौथे रैंडमाइजेशन के तहत चयनित गन्ना किसान अब बढ़ाई गई तिथि तक यंत्रों की खरीद कर सकते हैं। पहले यह तिथि 3 मार्च तक ही निर्धारित की गई थी। यंत्र खरीदने के बाद गन्ना किसानों को डीबीटी के माध्यम से अनुदान की राशि भुगतान की जाएगी।
विदित हो कि बिहार में गन्ना की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के आदेश पर गन्ना उद्योग विभाग ने कई योजनाएं शुरू की है, जिसमें गन्ना यंत्रीकरण योजना भी शामिल है। इस योजना के माध्यम से विभाग गन्ना किसानों को यंत्र खरीदने के लिए 50 से 60 फीसदी तक अनुदान देता है। ताकि गन्ना किसान खेत की तैयारी से लेकर फसल की कटाई में उपयोग होने वाले यंत्रों की खरीद कर सकें। बताया जाता है कि गन्ना उद्योग विभाग ने इस योजना में तीसरे और चौथे रैंडमाइजेशन के तहत चयनित 324 गन्ना किसानों को यंत्र खरीदने के लिए परमिट जारी किया है। उस परमिट पर 3 मार्च तक यंत्र खरीदने के लिए तिथि निर्धारित की गई थी। इसके बाद विभाग ने योजना के वित्तीय लक्ष्य प्राप्त करने के साथ ही यंत्रों की खरीद में तेजी लाने के उद्देश्य से तिथि में विस्तार किया गया है, ताकि गन्ना किसान विभाग से मिले परमिट पर यंत्रों की खरीद कर सकें। गन्ना किसानों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि स्वीकृति पत्र प्राप्त चयनित किसान सुमेक पोर्टल(https://sugarcanemech.bihar.gov.in) पर सूचीबद्ध विक्रेताओं को पूर्ण देय राशि का भुगतान कर यंत्र खरीद सकते हैं। यंत्र का सत्यापन पूर्ण होने के बाद अनुदान राशि का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से संबंधित किसान के बैंक खाते में किया जाएगा।
बतातें चलें कि गन्ना उद्योग विभाग के माध्यम से यंत्रीकरण योजना के तहत खेत की तैयारी से लेकर गन्ने की कटाई में प्रयोग होने वाले डिस्क हैरो, पावर वीडर, पावर टीलर, लैंड लेवलर, लेजर लेवलर, रैटून मैनेजमेंट डिवाइस, रोटावेटर, मिनी ट्रैक्टर (4डब्लूडी), ट्रैक्टर माउंटेड हाइड्रॉलिक स्प्रेयर, शुगरकेन कटर प्लांटर एवं हाइड्रॉलिक डिस्क हैरो आदि यंत्रों की खरीद पर 50 से 60 फीसदी का अनुदान दिया जाता है, ताकि किसान अनुदानित दर पर इन आधुनिक यंत्रों की खरीद कर गन्ने की खेती बेहतर तरीके से कर सकें।

 

3. बिहार के हर जिले में होगी एएलएस एम्बुलेंस की सुविधा, क्रिटिकल मरीजों को मिलेगी संजीवनी

राज्य के प्रत्येक जिले में एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यह सुविधा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी चिकित्सा सहायता प्रदान कर गोल्डन ऑवर में मरीजों की जान बचाने की मंशा से लागू की जा रही है। सुविधा के लागू होने से दिल का दौरा, सांस लेने में तकलीफ के साथ दूसरी बीमारियों से जूझ रहे गंभीर मरीजों को काफी फायदा मिलेगा।
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि एनडीए सरकार के नेतृत्व में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त और आधुनिक बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में राज्य के सभी जिलों में एएलएस एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह एम्बुलेंस गंभीर रूप से बीमार या घायल मरीजों के लिए एक चलते-फिरते आईसीयू (आईसीयू) की तरह है।
उन्होंने बताया कि अभी तक मेडिकल कॉलेज तक ही एमआरआई मशीन की सुविधा उपलब्ध है। इस वजह से ग्रामीण क्षेत्र और छोटे जिलों के मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। समस्या को देखते हुए ही जिला और प्रखंड स्तर पर एएलएस एंबुलेंस संचालित करने का निर्णय लिया गया है। जीवन रक्षक सुविधाओं से लैस इस एंबुलेंस से गंभीर मरीजों को उच्चतर अस्पतालों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकेगा।

एंबुलेंस में वेंटिलेटर, कॉर्डियक मॉनीटर से डिफिब्रिलेटर तक की सुविधा
एएलएस एंबुलेंस में वेंटिलेटर, कार्डियक मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर और जीवन रक्षक दवाएं जैसे उन्नत उपकरण लगे हुए हैं। यह सभी उपकरण उच्च प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और डॉक्टरों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। एंबुलेंस में दुर्घटना के शिकार और गंभीर बीमारी से जूझ रहे दूसरे मरीजों को अस्पताल पहुंचने तक इलाज की वह सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी जो उनकी जीवनरक्षा के लिए कारगर हैं।

राज्य में पहले से 1941 एंबुलेंस, 124 और बढ़ाने की तैयारी

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आपातकालीन एवं सरकारी अस्पतालों में मरीजों के आवागमन के लिए निःशुल्क रेफरल ट्रांसपोर्ट (एंबुलेंस) की सुविधा है। बीमारी, दुघर्टना या फिर अन्य किसी आपतकालीन स्थिति में मरीज के इलाज के लिए टोल फ्री नंबर 102 के माध्यम से निशुल्क एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मौजूदा समय में राज्य में 1941 एंबुलेंस संचालित हैं। जल्द ही 124 अतिरिक्त एंबुलेंस की सेवा बढ़ाई जाएगी। इसके बाद राज्य में एंबुलेंस की संख्या 2065 हो जाएगी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14 लाख 30 हजार 373 और वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी तक 15 लाख 94 हजार 220 मरीजों ने सरकारी एंबुलेंस सेवा का मुफ्त लाभ उठाया है।

 

4. ग्रामीण सड़कों और पुलों के निर्माण में गुणवत्ता पर जोर

बिहार के ग्रामीण इलाकों में पक्की सड़कों और पुलों के दीर्घकालीन गुणवत्तापूर्ण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीण कार्य विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए जो योजना तैयार की है, उसमें सिर्फ ढांचागत विस्तार को ही नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मजबूती को प्राथमिकता दी जा रही है। निर्माण कार्यों में बेहतर तकनीकी मानकों को सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपने अभियंताओं को आईआईटी, पटना में प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के सभी ग्रामीण पथ और पुल उच्च गुणवत्ता के साथ निर्मित किये जाएं।
विभाग की इस प्रशिक्षण योजना के तहत ग्रामीण कार्य विभाग में कार्यरत नवनियुक्त 480 सहायक अभियंताओं (असैनिक) को आईआईटी, पटना में चरणबद्ध तरीके से विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। इन अभियंताओं को उनके क्षेत्राधीन क्रियान्वित किए जा रहे सड़कों और पुलों के निर्माण में तकनीकी मानकों के अनुरूप कार्य करने और नई तकनीक का उपयोग कर अपनी कार्य क्षमता को सुदृढ़ करने के गुर सिखाए जा रहे हैं। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत ग्रामीण कार्य विभाग के 120 सहायक अभियंताओं अबतक प्रशिक्षित किया जा चुका है। वहीं, शेष 360 सहायक अभियंताओं को भी जुलाई 2026 तक आईआईटी, पटना से प्रशिक्षण दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का सीधा लाभ राज्य की उन सभी योजनाओं को मिलेगा, जिन्हें आगामी वित्तीय वर्ष में धरातल पर उतारा जाना है। ग्रामीण क्षेत्रों को उद्योगोन्मुखी करने और बारहमासी सड़क सम्पर्कता सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार ग्रामीण पथों का विस्तार कर रहा है। वहीं, आईआईटी, पटना जैसी संस्थानों के प्रशिक्षण ग्रामीण कार्य विभाग राज्य के ग्रामीण सम्पर्कता को दीर्घकालिक बनाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

 

5. 1 अप्रैल से सभी जिलों में सड़क सुरक्षा को लेकर ड्राइवरों को दी जाएगी ट्रेनिंग

 

राज्य सरकार सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर ड्राइवर ट्रेनिंग अभियान चला रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय योजना-3 के तहत “सबका सम्मान” और “जीवन आसान” में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को भी रखा गया है। इसके लिए पहले चरण में पटना और औरंगाबाद में चालकों को सड़क सुरक्षा पर ट्रेनिंग दी जा रही है। दूसरे चरण में 1 अप्रैल से सभी जिलों में सरकारी और निजी बसों/वाहनों के चालकों को अनिवार्य सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह ट्रेनिंग प्रति शनिवार को आयोजित की जाएगी, ताकि चालक अपनी ड्यूटी के साथ इसमें आसानी से शामिल हो सकें।

इन बिन्दुओं पर दिया जाएगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में मुख्य रूप से जेब्रा क्रॉसिंग पर रुकना, हॉर्न का कम से कम इस्तेमाल करना, सीट बेल्ट लगाना, ओवरटेकिंग के नियम, स्पीड लिमिट का पालन, ट्रैफिक सिग्नल पर रूकना और अन्य महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर फोकस रहेगा। परिवहन विभाग इस कार्यक्रम के लिए एक विस्तृत एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार कर रहा है, जिसमें ट्रेनिंग की अवधि, मॉड्यूल, प्रमाण-पत्र और निगरानी की व्यवस्था शामिल होगी।

नियमित ट्रेनिंग से चालक होंगे जागरूक: सचिव
विभाग के सचिव राज कुमार ने इस पहल पर कहा कि सड़क दुर्घटनाओं का मुख्य कारण अक्सर चालकों की लापरवाही और नियमों की अनदेखी होती है। हमारा लक्ष्य है कि इसमें सरकारी व निजी बस चालक, टैक्सी ऑपरेटर, ट्रक ड्राइवर और अन्य कमर्शियल वाहन चालक शामिल हों। इन्हें नियमित रूप से जागरूक बनाया जाए। पटना और औरंगाबाद में पहले चरण की ट्रेनिंग से सकारात्मक परिणाम मिले हैं, जहां चालकों की जागरूकता में सुधार देखा गया। अब पूरे राज्य में इसे लागू कर हम बिहार की सड़कों को और सुरक्षित बनाएंगे। यह ट्रेनिंग न केवल चालकों के लिए बल्कि यात्रियों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

 

6, .4 वर्षों में 18 लाख से अधिक महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना का लाभ

राज्य में गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही है। इस योजना के तहत 4 वर्षों में 18 लाख 15 हजार 680 महिलाओं को लाभ दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 6 लाख 36 हजार 688 महिलाओं को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से राशि प्रदान की गई। 2023-24 में 1 लाख 45 हजार 832 लाभार्थी, 2024-25 में 7 लाख 18 हजार 670 और 2025-26 में 3 लाख 14 हजार 510 लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया गया है।
समाज कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य में 22 लाख 69 हजार 594 लाख महिलाओं का नामांकन हुआ है। इनमें 18 लाख 15 हजार 680 लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से राशि प्रदान की गई है। बाकि बचे लाभार्थियों को जल्द लाभ पहुंचाने के लिए विभाग कार्रवाई कर रहा है।
मिशन शक्ति के अंतर्गत जनवरी 2017 से लागू इस योजना ने राज्य में महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत किया है। योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान मजदूरी हानि की आंशिक भरपाई करना, समय पर प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और शिशु टीकाकरण को प्रोत्साहित करना है। साथ ही बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना है।

योजना के लाभ और राशि विवरण
योजना के तहत पहली संतान होने पर (पहली बार जीवित बच्चे के जन्म पर) पात्र महिलाओं को कुल 5 हजार रुपये की सहायता राशि दो किस्तों में प्रदान की जाती है।
• पहली किस्त: 3 हजार गर्भावस्था पंजीकरण और कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच के बाद।
• दूसरी किस्त: 2 हजार नवजात शिशु के जन्म पंजीकरण और 14 सप्ताह तक के टीकाकरण पूरा होने के बाद।
दूसरी संतान के मामले में, यदि बच्चा कन्या है, तो 6 हजार रुपये की एकमुश्त राशि जन्म और आवश्यक टीकाकरण के बाद दी जाती है।