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नौकरी एवं रोजगार के नाम पर हजारों करोड़ का घोटाला – निष्पक्ष जांच की मांग

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न्यूज डेक्स 

पटना / राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने नौकरी और रोजगार देने के उद्देश्य से 2015 में शुरू की गई प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में बहुत बड़े पैमाने पर घोटाले का आरोप लगाते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।इस महत्वाकांक्षी योजना में 1.32 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने के नाम पर 14,400 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए । लेकिन 18 दिसंबर 2025 को संसद में प्रस्तुत कैग के ऑडिट रिपोर्ट ने इस योजना में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं।
कैग रिपोर्ट के अनुसार इस योजना में नामांकित 95 लाख युवाओं में 90 लाख का कोई विवरण हीं नहीं है। 5 लाख नाम फर्जी पाए गए। इसमें 70 प्रतिशत उम्मीदवार इस ट्रेनिंग के योग्य हीं नही थे। 94 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों के बैंक खाते फर्जी या अमान्य पाए गए। कई मामलों में एक ही बैंक खाता हजारों उम्मीदवारों से जोड़ा गया और एक ही फोटो के आधार पर सैकड़ों लाभार्थियों को अलग-अलग राज्यों में प्रशिक्षित दिखा दिया गया। यह न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ खुला धोखा भी है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्लेसमेंट के आंकड़े जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए। जिन कंपनियों में नौकरी दिया गया सब फर्जी है , ये कंपनियां केवल कागज पर है।कई स्थानों पर बंद या नाममात्र के प्रशिक्षण केंद्रों को सक्रिय बताकर हजारों युवाओं की फर्जी ट्रेनिंग दर्ज कर दी गई। यहां तक कि एक ही व्यक्ति द्वारा एक ही दिन में कई राज्यों में निरीक्षण किए जाने की प्रविष्टियाँ दर्ज की गईं, जो व्यवस्था की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं। कैग के रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के तहत ट्रेनिंग, एनरॉलमेंट, सर्टिफिकेशन और प्लेसमेंट सभी में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया है।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि इस योजना के तहत बिहार में भी 6.33 लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी गई जिसमें दावा किया गया है कि अधिकांश का प्लेसमेंट भी हो गया है। ऐसे हीं फर्जी ट्रेनिंग और प्लेसमेंट के आधार पर बिहार की एनडीए सरकार 50 लाख युवाओं को नौकरी और रोजगार दिए जाने का दावा कर रही है।
राजद प्रवक्ता ने युवाओं के नौकरी के नाम पर हुए इस बड़े घोटाले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हाईकोर्ट के निगरानी में कराने की मांग की है।