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कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं भारतीय नृत्य कला मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम शुक्रगुलजार का आयोजन

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पंकज कुमार की रिपोर्ट 

 

पटना /कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं भारतीय नृत्य कला मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम “शुक्रगुलजार” का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन सुश्री कहकशां, प्रशासी पदाधिकारी, भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना, श्री सरोज दास एवं श्री रामचंद्र गोल्डर द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

आज की संध्या में श्री सरोज दास जी जिनके आवाज में रियाज की गहराई और गायन में परम्परा की शुद्धता दिखाई पड़ती है। इनके द्वारा शास्त्रीय गायन ख्याल एवं ठुमरी की प्रस्तुति से “शुक्रगुलजार” कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के आरंभ में राग परमेश्वरी पर आधारित ख्याल जो एक ताल और द्रुत तीन ताल में निवद्ध है, से की। उसके बाद ठुमरी में “का करूं सजनी आये ना बालम…..”, दादरा में राग भैरवी में “रोकत डगर श्याम मोहे” और कार्यक्रम का समापन राग चारुकेशी में भजन की प्रस्तुति से की गई।

इस प्रस्तुति में संगत कलाकारों की भूमिका सराहनीय रही:
• तबला: श्री शांतनु राय
• तानपुरा: अपराजिता चटर्जी
• सारंगी: अनीश मिश्रा (बनारस)

आज की संध्या की दूसरी प्रस्तुति शास्त्रीय नृत्य में अनुशासन और भावाभिनय में निपुण भरतनाट्यम नर्तक रामचंद्र गोल्डर, अपने सधे हुए अंग संचालन भावपूर्ण अभिनय से अपनी प्रस्तुतियों में थोड़िया मंगलम- मंगलाचरणात्मक प्रस्तुति से शुरू की। जिसमें विघ्नेश मंगल शिव भगवान विष्णु की स्तुति से नृत्य आरंभ हुआ। तत्पश्चात नरेशा कौथवम एक अत्यंत पारंपरिक और भक्तिपूर्ण प्रस्तुति, ये नृत्य भगवान शिव (नटराज) के नृत्य स्वरूप को समर्पित होता है।

तीसरी प्रस्तुति में रामचंद्र गोल्डर द्वारा कीर्तनम – मुकुंदा मुरारी जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का वर्णन किया गया। कीर्तनम पराशक्ति जननी भरतनाट्यम की एक भाव प्रधान और लयात्मक प्रस्तुति है। इस प्रस्तुति में मां देवी के विविध रूपों को नृत्य के माध्यम से दिखाया गया और प्रस्तुति का समापन – जावेली जो एक श्रृंगार रस प्रधान कृति है। इसमें नायिका-नायक के प्रेम, मिलन, विरह, मान, मनुहार और कोमल भावनाओं का सजीव अभिनय होता है।

कार्यक्रम में पटना के प्रबुद्ध कलाप्रेमी, संगीत प्रेमी और भारतीय नृत्य कला मंदिर, पटना के प्रशासी पदाधिकारी, शिक्षकगण, कार्यालय कर्मी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। मंच संचालन श्रीमती सोमा चक्रवर्ती द्वारा किया गया।