वुमनिया महिला उद्यमियों के लिए खास डिजिटल बाजार ।।2.राज्यभर में 46 हजार से अधिक लोगों के हुए नेत्र जांच 5 मई तक चलेगा अभियान।।3.3.पिंक बस चलाने के लिए महिला चालकों की दूसरे चरण की ट्रेनिंग शुरू।।4.अब सभी जिलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगा उपभोक्ता विवादों का निपटारा।। 5.बिहार म्यूजियम बनेगा स्किल हब
न्यूज डेस्क
पटना/बिहार की महिलाएं सदियों से मधुबनी पेंटिंग, सुजनी कढ़ाई, टिकुली आर्ट, सिक्की, जूट, बांस और घरेलू उत्पादों जैसी पारंपरिक कलाओं से जुड़ी हुई हैं। ये शिल्प मुख्य रूप से महिलाओं के स्तर से ही बनाए जाते हैं। अब इन्हें डिजिटल माध्यम से ग्लोबल बाजार मुहैया कराया जा रहा है। इससे इन्हें उचित मूल्य और स्थिर आय नहीं मिल पाता था। सरकार की वुमनिया के माध्यम से पहल कर एक गेम चेंजर साबित हो सकती हैं। महिला उद्यमी हाथों से बनाए उत्पादों को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेट (जेम) पोर्टल पर रजिस्टर कर देशभर के केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, पंचायतों और सहकारी समितियों तक बेच रही है। इस प्रणाली से बिचौलिए पूरी तरह हट जाते हैं। लेन-देन पारदर्शी और डिजिटल होता है और इसके जरिए भुगतान भी समय पर मिलता है।
बिहार के 31 लोकल उत्पाद जेम पर
बिहार के 20 जिलों (जैसे- मधुबनी से मधुबनी पेंटिंग, सीतामढ़ी से सिक्की के उत्पाद, दरभंगा से मखाना, कटिहार से जूट उत्पाद, भागलपुर से सिल्क साड़ी, बांका से सिल्क सूट) से 31 अलग-अलग तरह के स्थानीय उत्पाद जेम पोर्टल पर उपलब्ध हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्द्योग मंत्रालय ने 2019 में जेम पोर्टल पर वुमनिया की पहल शुरू की। इसके माध्यम से महिलाओं को एक डिजिटल इंटरफेस दिया गया, जहां इनके माध्यम से निर्मित उत्पादों का सहज तरीके से पंजीकरण और सूचीकरण कराया गया।
वुमनिया पर 2 लाख से अधिक महिला उद्यमी पंजीकृत
वुमनिया पहल ने अपनी शुरुआत के बाद से उल्लेखनीय विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में जेम पर 2 लाख 10 हजार से अधिक महिला लघु व मध्यम उद्यम पंजीकृत हुए, जिनका कुल ऑर्डर वॉल्यूम 13.7 लाख रहा।
• इन उद्यमों को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के अनुबंध दिए गए, जो वर्ष 2024-25 की तुलना में 27.60 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
• जेम के कुल ऑर्डर का 5.6 प्रतिशत हिस्सा महिला लघु व मध्यम उद्यमों को दिया गया, जो अनिवार्य 3 प्रतिशत खरीद लक्ष्य से काफी अधिक है।
*वुमनिया के अंतर्गत उत्पाद:
• हस्तशिल्प
• किराना और रसोई का सामान
• कार्यालय सहायक उपकरण
• हथकरघा वस्त्र
• व्यक्तिगत स्वच्छता और देखभाल।
2.राज्यभर में 46 हजार से अधिक लोगों के हुए नेत्र जांच, 5 मई तक चलेगा अभियान
पटना/राज्य के सभी 101 अनुमंडलों में स्थित बुनियाद केंद्रों के माध्यम से मुफ्त नेत्र जांच किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग की सचिव बन्दना प्रेयषी के मार्गदर्शन में इस विशेष अभियान को व्यापक स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है। अब तक इस अभियान के अंतर्गत कुल 46 हजार 102 लाभार्थियों का मुफ्त नेत्र परीक्षण किया जा चुका है। यह पहल समाज के कमजोर, वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध नेत्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
इस विशेष अभियान के अंतर्गत राज्य के विभिन्न बुनियाद केंद्रों पर नियमित रूप से नेत्र जांच शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जहां विशेषज्ञों के माध्यम से लाभार्थियों की जांच कर उन्हें चश्मा दिए जाने के लिए अनुशंसित किया जा रहा है। राज्य स्वास्थ्य समिति के अंतर्गत सूचीबद्ध एजेंसी से नेत्र जांच के उपरांत 15 दिनों के भीतर चश्मा उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है, जिसके पश्चात लाभार्थियों को चश्मा का वितरण किया जाएगा। इसके माध्यम से न केवल दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान हो रही है, बल्कि समय रहते उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह अभियान अब 5 मई तक जारी रहेगा, जिसके अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों को विशेष सक्रियता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया है।
नेत्र जांच एवं चश्मा वितरण अभियान में जिला-वार प्रगति जारी है। अब तक राज्य भर में कुल 46 हजार से अधिक लोगों की नेत्र जांच की जा चुकी है, जिनमें से लगभग 38 हजार 500 लोगों को चश्मा लगाने की अनुशंसा की गई है। सर्वाधिक प्रगति पटना जिले में दर्ज की गई है, जहां 4676 नेत्र जांच के बाद 4051 लोगों को चश्मा निर्धारित की गई। विभागीय सचिव वंदना प्रेयषी ने कहा कि बुनियाद केंद्रों के माध्यम से संचालित यह अभियान समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। 46 हजार से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच बनाना विभाग की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हमारा प्रयास है कि 5 मई तक इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाते हुए अधिक से अधिक जरूरतमंद व्यक्तियों तक इसका लाभ पहुंचाया जाए। उन्होंने सभी जिलों के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान के अंतिम चरण में विशेष सक्रियता के साथ कार्य करते हुए अधिक से अधिक लाभार्थियों को चिन्हित कर उन्हें इस सुविधा से लाभान्वित किया जाए।
3.पिंक बस चलाने के लिए महिला चालकों की दूसरे चरण की ट्रेनिंग शुर
पटना/पिंक बस संचालन के लिए महिला चालकों की ट्रेनिंग तेज गति से चल रही है। पहले चरण की ट्रेनिंग पूरी कर चुकी पांच महिला चालकों को अब दूसरे चरण के अंतर्गत पटना की सड़कों पर वास्तविक बस चलाने का अभ्यास कराया जा रहा है। विगत तीन दिनों से बेली रोड रूट पर हेवी मोटर व्हीकल (एचएमवी) लाइसेंस धारक महिला चालक आरती कुमारी, रागिनी कुमारी, सरस्वती कुमारी, गायत्री कुमारी और बेबी कुमारी कौशल चालकों के मार्गदर्शन में बस की स्टीयरिंग संभाल रही हैं। इन्हें अगले 15 दिनों तक सड़कों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद इनकी ड्राइविंग स्किल की जांच की जाएगी और सफल होने पर इन्हें पिंक बस चलाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) की तरफ से महिलाओं के लिए संचालित होने वाली 100 पिंक बसों में महिला चालकों की नियुक्ति की योजना है। इस क्रम में वर्तमान में 21 अन्य महिला चालकों को औरंगाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (आईडीआर) में पिंक बस चलाने की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इनमें से पांच महिला चालकों को पिछले महीने आईडीआर में 14 दिनों की आवासीय ट्रेनिंग दी गई थी। इस दौरान उन्हें बस संचालन की बारीकियां, सड़क सुरक्षा नियम, इंजन की जानकारी, वाहन रखरखाव तथा आपातकालीन स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही सिमुलेटर पर बस चलाने की प्रैक्टिस और रियल-टाइम ड्राइविंग का अभ्यास भी कराया गया।
4.अब सभी जिलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगा उपभोक्ता विवादों का निपटारा
5.जल्द ही राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिहार और सभी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा बहाल होने जा रही है। इसके लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा बहाल होने से उपभोक्ताओं को अब बार-बार आयोग कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा, वे कहीं से भी आयोग के वादों में होने वाली सुनवाई में शामिल हो सकेंगे।
उपभोक्ता संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी स्तर पर विज्ञापन, रेडियो जिंगल एवं सोशल मीडिया जैसे माध्यमों से भी उपभोक्ताओं को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही अर्ध-न्यायिक संस्था राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिहार सहित सभी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों में नए पदों का सृजन किया गया है। वहीं रिक्त पदों पर भी नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। माना जा रहा है कि नए पदों के सृजन से लंबित वादों का तेजी से निपटारा होगा, जिससे उपभोक्ता समय सीमा के भीतर अपना दावा प्राप्त कर लाभान्वित होंगे।
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिहार, पटना में निजी सहायक एवं कार्यालय परिचारी के दो-दो तथा प्रोग्रामर एवं बेंच क्लर्क के एक-एक अतिरिक्त पद का सृजन किया गया है। वहीं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों के आशुलिपिक के 76 रिक्त पदों, बेंच क्लर्क के 16 रिक्त पदों एवं निम्नवर्गीय लिपिक के 26 रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार, पटना को पत्र भेजा गया है।
एक लाख से अधिक विवादों का निपटारा
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिहार, पटना के माध्यम से 31 जनवरी 2026 तक अठारह हजार पांच सौ सात विवादों का निपटारा कर उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाया गया है। वहीं बिहार के सभी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोगों के माध्यम से इस बीच एक लाख तेरह हजार एक सौ इकहत्तर परिवाद पत्रों का निष्पादन किया गया है।
5.बिहार म्यूजियम बनेगा स्किल हब
पटना/राजधानी में मौजूद बिहार म्यूजियम अब सिर्फ ऐतिहासिक धरोहरों का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि यह युवाओं के लिए कौशल विकास का नया हब बनने जा रहा है। म्यूजियम में जल्द ही आर्कियोलॉजी, म्यूजियोलॉजी और डिजाइनिंग कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। इन कोर्सों की अवधि 3-3 महीने रहेगी। यह पहल पहली बार की जा रही है, जिससे इन विषयों में रुचि रखने वाले युवाओं को नया अवसर मिलेगा।
इन सभी कोर्स को शुरू करने के लिए बिहार कौशल विकास मिशन के साथ बातचीत चल रही है। योजना के अनुसार, सभी कोर्स तीन महीने की अवधि के होंगे।
इन कोर्सों को एक्सपर्ट की टीम पढ़ाएगी। डिजाइनिंग कोर्स के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) जैसे संस्थानों से बातचीत की जा रही है। वहीं, आर्कियोलॉजी और म्यूजियोलॉजी के लिए बिहार म्यूजियम में पहले से कार्यरत विशेषज्ञ ही प्रशिक्षण देंगे।
बिहार म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि यह पहल युवाओं की बेरोजगारी को खत्म करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। उनका कहना है कि इन कोर्सेज के माध्यम से युवाओं को व्यावहारिक ज्ञान और कौशल मिलेगा, जिससे वे रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
इसके अलावा म्यूजियम ने अनंत यूनिवर्सिटी के साथ भी एक समझौता (एमओयू) किया है। संभावना है कि डिजाइनिंग कोर्स के लिए वहां से भी विशेषज्ञ बुलाए जा सकते हैं। कोर्स पूरा करने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जो उन्हें विभिन्न संस्थानों और क्षेत्रों में नौकरी पाने में मदद करेगा। इच्छुक युवा इन कोर्सेज के लिए आवेदन कर सकेंगे।

