बीसी-इबीसी छात्राओं के लिए दूसरा मौका, 10 अप्रैल तक फिर खुला पोर्टल ।। 2. 2. सुलभ संपर्कता योजना से सीधे हाईवे से जुड़ रहे बिहार के गांव।।3.जीवन और भविष्य की खातिर जल संरक्षण है जरूरी : राम कृपाल यादव
राजकुमार यादव की रिपोर्ट
पटना/पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित 39 अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नामांकन के लिए दूसरा मौका दिया गया है। जिन छात्राओं ने प्रवेश परीक्षा पास की है लेकिन प्रथम मेधा सूची में जगह नहीं बना पाईं, उनके लिए विभाग ने पोर्टल दोबारा खोल दिया है।
अब वे 10 वैकल्पिक विद्यालय चुन सकेंगी। इसके लिए 3 अप्रैल से 10 अप्रैल तक आवेदन लिए जाएंगे। कक्षा 6 से कक्षा 9 के लिए कुल 760 सीटों के आलोक में आवेदन लिए जाएंगे। इनमें सबसे अधिक कक्षा 6 के लिए 464 सीटें उपलब्ध है। इसके अलवा कक्षा 7 के लिए 164, कक्षा 8 के लिए 52 और कक्षा 9 के लिए 80 सीटों पर आवेदन लिए जाएंगे। ये सीटें राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित 39 कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालयों में उपलब्ध हैं। इन स्कूलों में छात्राओं को निःशुल्क आवास, भोजन, शिक्षा, खेलकूद और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि विद्यालय चयन करते समय अभ्यर्थी के लॉगिन पर विद्यालय का नाम एवं उसके कक्षा व कोटि में उपलब्ध सीटों की संख्या प्रदर्शित है। अभ्यर्थी उक्त रिक्तियों को ध्यान में रखते हुए ही अपने विद्यालय का चयन करें। द्वितीय मेधासूची 12 अप्रैल को जारी की जाएगी, वहीं नामांकन की प्रक्रिया 13 अप्रैल से 20 अप्रैल तक चलेगी।
2. सुलभ संपर्कता योजना से सीधे हाईवे से जुड़ रहे बिहार के गांव
पटना/दशकों से संपर्क विहीन रही राज्य की 1.21 लाख ग्रामीण बसावटों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ने के बाद अब उन ग्रामीण बसावटों का सीधा जुड़ाव बड़े राजमार्गों से किया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा राज्य में सुलभ संपर्कता योजना की शुरुआत की गई है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों को सीधे उच्च श्रेणी के मार्गों से जोड़ते हुए विकास की गति को नई रफ्तार देने वाला है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना एवं ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत कुल 1,29,990 संपर्क विहीन ग्रामीण बसावटों की पहचान की गई थी। इनमें अबतक कुल 1,21,151 बसावटों को 1,20,178 किलोमीटर से अधिक लंबी पक्की बारहमासी सड़कों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है। वहीं शेष बसावटों को भी शीघ्र पक्की ग्रामीण सड़क से जोड़ने के लिए कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है। इस व्यापक ग्रामीण सड़क संपर्कता अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया है। इस दिशा में कार्य तेज गति से प्रगति पर है। इस योजना के तहत अब तक कुल 74 नई योजनाओं का चयन किया गया है, जिनमें से 65 योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। साथ ही 16 महत्वपूर्ण योजनाओं पर निर्माण कार्य भी प्रारंभ कर दिए गए हैं।
बसावटों के पक्की सड़कों से जुड़ने के बाद अब सुलभ संपर्कता योजना के माध्यम से इस बुनियादी संपर्कता को और अधिक सुलभ बनाया जा रहा है। राज्य के कई ऐसे गांव और टोले हैं, जहां मुख्य सड़कों तक पहुंचने के लिए लोगों को संकरे, घुमावदार और कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता था। विशेषकर बारिश के दिनों में यह सफर एक बड़ी चुनौती बन जाता था। इस नई योजना के माध्यम से राज्य के उन दुर्गम और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को अब सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच), राज्य राजमार्ग (एसएच) तथा वृहद जिला पथों से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए सुलभ मार्गों और वैकल्पिक रास्तों (थ्रू रूट या बाईपास) का नवनिर्माण तथा जर्जर हो चुकी सड़कों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, ताकि संकरे रास्तों के जाम से ग्रामीणों को मुक्ति मिल सके।
सूबे की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई धार
इसका सबसे सकारात्मक प्रभाव राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ेगा। अब ग्रामीणों को अपनी पंचायत, प्रखंड, अनुमंडल या सीधे जिला मुख्यालय जाने में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही संकरे रास्तों का मजबूत विकल्प तैयार होने से व्यावसायिक वाहनों का आवागमन सुगम हो जाएगा और आपातकालीन स्थितियों में एंबुलेंस बिना जाम में फंसे सीधे हाईवे का रास्ता ले सकेगी।
3.जीवन और भविष्य की खातिर जल संरक्षण है जरूरी : राम कृपाल यादव
पटना/जल संरक्षण को लेकर अगर आज काम नहीं किया गया तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलेंगे। तालाब, पोखर, कुएं धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। किसानों की निर्भरता वर्षा जल पर होती है, जलवायु परिवर्तन से प्राकृतिक आपदाएं आ रही हैं। भूमिगत जल का दोहन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में हम सभी को मिलकर पर्यावरण और जल का संरक्षण करने की जरूरत है। ये बातें कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने मंगलवार को जल-जीवन-हरियाली दिवस के मौके पर कहीं। महीने के पहले मंगलवार को मनाए जाने वाले इस दिवस पर कृषि भवन में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने किया।
इस मौके पर उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन एवं उनके बढ़ते दुष्परिणामों को बिहार सरकार ने गंभीरता से लिया है। कृषि विभाग जैविक खेती, नए जल स्रोतों का सृजन, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल अवशेष प्रबंधन, स्प्रिंकल सिंचाई जैसी योजनाएं चला रहा है। पानी बचाने के लिए प्रोत्साहन स्वरूप स्प्रिंकल सिंचाई के लिए 90 फीसदी तक अनुदान दिया जा रहा है।
वहीं जल-जीवन-हरियाली मिशन के निदेशक सुमित कुमार ने बताया कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जल-जीवन-हरियाली दिवस मनाया जाता है। वन आच्छादन बढ़ाने के लिए कृषि विभाग के अंतर्गत चेक डैम, नए जल स्रोतों का सृजन, कम पानी में अधिक उत्पादन, सूक्ष्म सिंचाई जैसे काम किए जा रहे हैं। इससे पानी के उपयोग की दक्षता बढ़ रही है और जल का संरक्षण किया जा रहा है।
68 हजार एकड़ में सूक्ष्म सिंचाई
कार्यक्रम में मौजूद कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान राज्य में सफलतापूर्वक चल रहा है। जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों से निबटने की दिशा में लगातार काम किए जा रहे हैं। राज्य में जलवायु अनुकूल कृषि योजना चलाई जा रही है। इसके तहत कृषि विभाग जलवायु के अनुकूल खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत करीब 68 हजार एकड़ भूमि में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति का इस्तेमाल हो रहा है। राज्य में बिहार राज्य जैविक मिशन का गठन किया जा चुका है।
इस अवसर पर कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ. बीरेंद्र प्रसाद यादव, स्पर्श गुप्ता, एमडी बीआरबीएन, अपर सचिव कल्पना कुमारी, अपर निदेशक धनंजय पति त्रिपाठी सहित कई लोग उपस्थित थे।

