बिहार कोटे से मंत्री हैं अपने समधी के घर में चली 15 राउंड गोलियां पर शायद दर्द का कोटा फिलहाल बंगाल के लिए रिजर्व है
राम दुलार यादव, संपादक
मालदा में आंच आती है तो कलेजा पटना में बैठ जाता है।
बंगाल में अपराधियों के राज पर दहाड़ ऐसी कि जैसे वहीं से कानून का राज वापस आएगा। लेकिन जब अपनी ही नाक के नीचे अपने ही सूबे में और खुद के समधी के घर पर गोलियां तड़तड़ाती हैं, तो अचानक मौन व्रत धारण कर लिया जाता है।
चुनावी पर्यटन वाली चिंता बंगाल में चुनाव हैं, तो वहां का खून पानी दिखता है, लेकिन बिहार में खुद की सरकार है, तो अपनों के घर पर चली 15 राउंड गोलियां भी शायद पटाखों की आवाज लगती हैं।
दूरी का कमाल
मालदा की दूरी सैकड़ों किलोमीटर है, इसलिए वहां की कानून-व्यवस्था साफ दिख रही है।पटना के मनेर की दूरी बहुत कम है, शायद इसीलिए धुंध ज्यादा है।
विवशता या राजनीति।मंत्री जी बंगाल की जनता तो उखाड़ कर फेंकेगी या नहीं ये वक्त बताएगा, लेकिन आपके अपने लोग जो लहूलुहान होकर AIIMS में पड़े हैं, आपके एक सांत्वना भरे शब्द की राह देख रहे हैं।
सत्ता का मोह भी क्या खूब है।दूसरों के आंगन में लगी आग पर रोटियां सेंकने की फुर्सत तो है, लेकिन अपने घर की दीवारें जब गोलियों से छलनी हो रही हों, तो शब्द कम पड़ जाते हैं। इसे सियासी मजबूरी कहें या दोहरा मापदंड।

