बिहार में नर्सिंग शिक्षा का डिजिटल विस्तार, ऑनलाइन मान्यता प्रक्रिया शुरू ।। 2.बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, हर सोमवार-शुक्रवार लगेगा सहायता शिविर।। 3.रबी विपणन मौसम 2026-27: गेहूं खरीद शुरू, पैक्स बने सहारा
न्यूज़ डेस्क
पटना/नर्सिंग संस्थानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से ऑनलाइन मान्यता प्रदान करने की सुविधा का शुभारंभ बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने किया। शास्त्रीनगर स्थित ऊर्जा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नर्सिंग संस्थानों के एनओसी और दूसरी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किए जाने से गुणवत्ता में सुधार एवं पारदर्शिता आएगी।
656 नर्सिंग कॉलेजों के लिए ऑनलाइन मान्यता व्यवस्था लागू
श्री पांडेय ने कहा कि एक दशक पहले तक राज्य में नर्सिंग संस्थान नहीं थे। इसकी टीस मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गहराई से थी। फलस्वरूप, उन्होंने राज्य में नर्सिंग शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल किए। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत तेजी से सरकारी और गैर सरकारी नर्सिंग कॉलेज खोले गए। आज बिहार में 656 नर्सिंग कॉलेजों में नर्सिंग की अलग-अलग पाठ्यक्रमों की पढ़ाई हो रही है। इन संस्थानों में पढ़ाई के लिए 41 हजार 65 सीट स्वीकृत हैं।
ऑनलाइन एनओसी से आसान होगी मान्यता प्रक्रिया
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार नर्सिंग संस्थानों की संख्या बढ़ाने के लिए कारगर पहल करेगी। लेकिन संस्थानों को मानकों का पूरा ख्याल रखना होगा। उन्होंने कहा कि नर्सिंग की पढ़ाई में गुणवत्ता से किसी प्रकार समझौता नहीं होगा। राज्य के नर्सिंग संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने वाले छात्र-छात्रा भविष्य में न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान स्थापित करेंगे।
श्री पांडेय ने कहा कि नर्सिंग इंस्टीट्यूट के लिए आवेदन और एनओसी की सुविधा ऑनलाइन शुरू किए जाने से संस्थान प्रबंधन को दौड़-भाग से राहत मिलेगी। इस ऊर्जा को संस्थान प्रबंधन गुणवत्ता सुधार पर खर्च कर सकेंगे। उन्होंने नर्सिंग संस्थानों के प्राचार्य और निदेशकों से कहा कि उपलब्ध सुविधाओं को पोर्टल पर अपलोड करना होगा ताकि इसकी जानकारी आम लोगों को भी मिल सके। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री ने पांच नर्सिंग संस्थानों के एनओसी का ऑनलाइन अनुमोदन किया और संस्थान प्रबंधन को प्रमाण पत्र दिए।
विभागीय सचिव लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि नर्सिंग संस्थानों को मान्यता देने की दिशा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से गुणवत्ता में सुधार होगा। इससे पारदर्शिता लागू होगी। उन्होंने सभी संस्थान प्रबंधन को गुणवत्ता सुधार, मानकों का पालन करने के निर्देश दिए। उन्होनें कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के पारदर्शिता लागू करने के साथ शोषणकारी व्यवस्था को खत्म करने की दिशा में मान्यता के लिए आवेदन और एनओसी देने की प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है। इस अवसर पर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार पांडेय, विशेष सचिव शैलेष कुमार एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
2. बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, हर सोमवार-शुक्रवार लगेगा सहायता शिविर
पटना/प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति के ऊर्जा विभाग ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। जिससे उपभोक्ताओं को अब किसी प्रकार की बिजली समस्या होने पर प्रमंडल कार्यालय या बिजली उपकेंद्र में आने की जरूरत नहीं होगी। विभाग ने अब उपभोक्ताओं की हर समस्या के निवारण के लिए एक नयी योजना बना रही है। जिसमें हर सोमवार व शुक्रवार को विद्युत उपभोक्ता केंद्र में सहायता शिविर का आयोजन किया जायेगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि गर्मियों में राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों व कस्बों में क्वालिटी बिजली आपूर्ति के लिए बिजली उपकेंद्र में सहायता शिविर का आयोजन किया जायेगा। ताकि उपभोक्ताओं को बिजली संबंधित समस्या होने पर बिजली ऑफिस का चक्कर नहीं काटना पड़े। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उपभोक्ता द्वारा दर्ज शिकायतों को 72 घंटों के भीतर निवारण करने का निर्देश भी जारी किया जायेगा। ताकि प्रदेश के हर घर में बिना रुकावट बिजली आपूर्ति दी जा सकें।
हर सेक्शन में लगेगा शिविर समस्या का होगा तुरंत निदान- जीएम
वहीं इस विषय पर अधिक जानकारी देते हुए पेसू जीएम दिलीप सिंह ने कहा कि विभाग की तरफ से राजधानी समेत सभी क्षेत्रों के सेक्शन कार्यालय में उपभोक्ता शिविर लगाया जायेगा। जिससे बिजली संबंधित अन्य समस्या का तुरंत निदान किया जायेगा। इसके लिए बिजली कंपनी की तरफ से एक खास टीम तैयार की जायेगी। साथ ही उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली फ्री व नये टैरिफ के विषय में कोई संशय हो तो इसका सम्पूर्ण जानकारी भी साझा किया जायेगा। बता दें कि गर्मियों में बढ़ते लोड आपूर्ति के लिए आरडीएसएस का काम लगभग पूरा कर लिया गया है।
3.रबी विपणन मौसम 2026-27: गेहूं खरीद शुरू, पैक्स बने सहारा
पटना/राज्य में सरकारी स्तर पर गेहूं की खरीदारी हुई शुरू हो गई है। बुधवार को जहानाबाद जिले के किनारी पैक्स में “रबी विपणन मौसम 2026-27” के अंतर्गत राज्य में गेहूं अधिप्राप्ति का शुभारंभ सहकारिता मंत्री विभाग डॉ. प्रमोद कुमार ने किया।
इस अवसर पर उन्होंने ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पैक्सों एवं व्यापार मंडलों के माध्यम से राज्य में गेहूं अधिप्राप्ति का कार्य प्रारंभ किया गया है ताकि राज्य के किसानों को उनके गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य की राशि गेहूं बिक्री के 48 घंटे के भीतर उनके ना८मित के खाते में किया जा सके तथा किसानों को गेहूं की बिक्री के लिए बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े।
रबी विपणन मौसम 2026-27 के अंतर्गत राज्य में गेहूं अधिप्राप्ति का कार्य 1 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होकर 15 जून 2026 तक पैक्स, व्यापार मंडलों एवं केन्द्रीय एजेन्सी भारतीय खाद्य निगम के द्वारा संचालित किया जायेगा। भारत सरकार द्वारा निर्धारित गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रूपया प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीददारी की जायेगी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 160 रूपये प्रति क्विंटल अधिक है।
इस वर्ष राज्य में गेहूं अधिप्राप्ति का कुल निर्धारित लक्ष्य 0.18 लाख मीट्रिक टन है। इसके लिए पंचायत स्तर पर पैक्स एवं प्रखण्ड स्तर पर व्यापार मंडल को अधिप्राप्ति अधिकरण के रूप में अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त भारतीय खाद्य निगम को भी राज्य में चिन्हित प्रखण्डों में गेहूं अधिप्राप्ति के लिए अधिकृत किया गया है। पैक्स/व्यापार मंडलों में गेहूं बिक्री के बाद किसानों को 48 घंटों के भीतर पीएफएमएस प्रणाली के माध्यम से उनके नामित बैंक खाते में 48 घंटे के अंदर राशि का भुगतान किया जायेगा। किसान अपनी सुविधा के अनुसार अपने पंचायत के पैक्स अथवा व्यापार मंडल में गेहूं की बिक्री कर सकता है।
धान खरीदारी में मिली शानदार सफलता
“खरीफ विपणन मौसम 2025-26” के अंतर्गत राज्य में धान अधिप्राप्ति का कार्य उल्लेखनीय सफलता के साथ संपन्न हुआ है। भारत सरकार द्वारा “खरीफ विपणन मौसम 2025-26” के अंतर्गत धान अधिप्राप्ति के कुल निर्धारित लक्ष्य 36.85 लाख मीट्रिक टन के विरुद्ध 36.79 लाख मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की गई, जो लक्ष्य का 99.84 प्रतिशत है। राज्य में रोहतास जिले में सबसे ज्यादा 3,28,977 मीट्रिक टन, कैमुर जिले से 2,34,383 मीट्रिक टन, औरंगाबाद में 1,80,902 मीट्रिक टन, गयाजी में 1,73,277 मीट्रिक टन तथा पूर्वी चम्पारण में 1,46,599 मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की गई। इस वर्ष विशेष रूप से छोटे एवं मंझौले किसानों की भागीदारी अधिक रही है। औसतन प्रत्येक किसान से 67.61 क्विंटल धान की अधिप्राप्ति की गई। इस अवधि में कुल 5,40,474 किसानों ने अपने धान की बिक्री पैक्स एवं व्यापार मंडलों के माध्यम से की। इनमें से 5,07,476 किसानों (94%) को उनके धान का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष किसानों को उनके नामित खाते में भुगतान की प्रक्रिया तीव्र गति से जारी है।

