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तमिलनाडु के निवेशकों ने किया वर्षों से बंद मढ़ौरा चीनी मिल का निरीक्षण ।। 2. एआई की मदद से तेज और पारदर्शी होंगे भूमि सर्वेक्षण व बंदोबस्त कार्य: उपमुख्यमंत्री।। 3.महिलाओं के लिए आयोजित जॉब फेयर में 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियां लेंगी भाग।। 4.10 साल, 138 जिंदगियां: किडनी ट्रांसप्लांट में बड़ी सफलता, स्वास्थ्य मंत्री का नवाचार पर जोर।। 5.एग्रो बिहार मेला का हुआ समापन, किसानों ने जमकर खरीदे कृषि यंत्र।।

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राजकुमार यादव 

पटना/वर्षों से बंद मढ़ौरा चीनी मिल को पुनः चालू के लिए राज्य सरकार द्वारा की जा रही पहल अब धरातल पर दिखाई पड़ने लगा है। तमिलनाडु के निवेशकों ने रविवार को सारण जिले में स्थित बंद मढ़ौरा चीनी मिल का निरीक्षण किया। मिल परिसर की वर्तमान स्थिति और वहां उपलब्ध आधारभूत संरचनाओं का जायजा लिया। इसके बाद गन्ना किसानों से वहां की समस्याओं पर चर्चा की।
विदित हो कि राज्य सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू कराने के साथ ही राज्य में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। इसको लेकर गन्ना उद्योग विभाग भी सक्रिय हो गया है। बताया जाता है कि राज्य सरकार की पहल पर तमिलनाडु के एसएनजे ग्रुप ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एस एन जयमुरुगन, अध्यक्ष सेल्वा कुमार, उपाध्यक्ष श्री कृष्ण और ग्रुप ऑडिटर बिमलेंद्र मिश्रा ने गन्ना विभाग के अधिकारियों के साथ बंद पड़ी मढ़ौरा चीनी मिल का निरीक्षण किया।वर्तमान स्थिति का आकलन किया। दौरे के क्रम में प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्र के किसानों से मुलाकात कर गन्ना उत्पादन से जुड़े विषयों पर संक्षिप्त चर्चा की तथा खेतों में गन्ना फसल की स्थिति का अवलोकन किया।
गौरतलब हो कि सारण जिले में स्थित मढ़ौरा चीनी मिल देश और बिहार का पहला चीनी है, जिसकी स्थापना 1904 में ब्रिटिश सरकार ने की थी। बताया जाता है कि 90 के दशक में यह चीनी मिल बंद हो गई। धीरे धीरे इस मिल के सभी उपकरण बर्बाद हो गए। राज्य सरकार के पहल से एक बार फिर इस मिल के खुलने की उम्मीद जग गयी है। निवेशकों के निरीक्षण के दौरान सहायक ईखायुक्त श्री वेदव्रत कुमार एवं ईख पदाधिकारी श्री कोमर कानन भी मौजूद रहे।
बताते चलें कि राज्य सरकार के सात निश्चय–3 के अंतर्गत ‘समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में गन्ना उद्योग विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मढ़ौरा चीनी मिल का यह निरीक्षण राज्य में चीनी उद्योग के पुनर्जीवन तथा निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

2.एआई की मदद से तेज और पारदर्शी होंगे भूमि सर्वेक्षण व बंदोबस्त कार्य: उपमुख्यमंत्री

पटना/उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के उपयोग से राज्य में भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यों को अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक को अपनाकर राजस्व प्रशासन को मजबूत किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को जमीन से जुड़े मामलों में सरल, त्वरित और बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एआई आधारित कार्यप्रणाली से विभाग की दक्षता बढ़ेगी और सर्वे के कार्य को तय समय सीमा में पूरा किया जा सकेगा।
राज्य में राजस्व प्रशासन को आधुनिक, अधिक प्रभावी और समय सीमा में पूरा करने की दिशा में अब विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया जाएगा। इस संबंध में भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय ने राज्य के सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
निदेशक श्री सुहर्ष भगत की तरफ से जारी पत्र के अनुसार, जिलों के बंदोबस्त कार्यालयों में एआई सेल का गठन किया जाएगा, जो विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम में एआई के संभावित उपयोग पर कार्य करेगा। इस सेल की अध्यक्षता बंदोबस्त पदाधिकारी करेंगे, जबकि इसमें आईटी प्रबंधक, विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी (आईटी/इंजीनियरिंग), विशेष सर्वेक्षण कानूनगो और विशेष सर्वेक्षण अमीन सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
निर्देश के मुताबिक, एआई सेल की बैठक प्रत्येक शनिवार को दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक बंदोबस्त कार्यालय में आयोजित की जाएगी। यह समिति जिला स्तर पर एआई के उपयोग से जुड़े निर्णय लेने, कर्मियों को प्रशिक्षण के लिए नामित करने तथा एआई पाठ्यक्रम लागू करने का कार्य करेगी। प्रशिक्षण पूरा करने वाले कर्मियों को परीक्षा के बाद प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा।
पत्र में कहा गया है कि 1 अप्रैल 2026 से बंदोबस्त कार्यों में एआई आधारित टूल्स के प्रारंभिक उपयोग का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए संबंधित कर्मियों में जागरूकता बढ़ाने और आवश्यक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया है। निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत सरकार द्वारा स्थापित इंडिया एआई मिशन और राज्य में चल रहे बिहार एआई मिशन के अनुरूप राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, दक्ष और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में यह पहल की जा रही है। एआई के उपयोग से कार्यों की गति, बेहतर निर्णय-प्रक्रिया और संभावित त्रुटियों या अनियमितताओं की पहचान करना आसान होगा। इससे तय सीमा में निर्धारित कार्यों की मॉनिटरिंग भी आसान हो जाएगी, जिससे तय समय पर सभी स्तर के काम संभव हो सकेंगे
अधिकारियों से कहा गया है कि एआई टूल्स के उपयोग को बढ़ावा देकर माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के सात निश्चय-3 के अंतर्गत इज़ ऑफ लिविंग के लक्ष्य को साकार करने में राजस्व प्रशासन अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।

3.महिलाओं के लिए आयोजित जॉब फेयर में 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियां लेंगी भाग

पटना/कौशल विकाश प्रशिक्षण योजना के तहत पटना के ज्ञान भवन परिसर में 16 और 17 मार्च को महिला मेगा जॉब फेयर लगेगा। इसमें कई प्रतिष्ठित कंपनियां भाग लेकर महिलाओं की नियुक्ति करेंगी। इनमें प्रमुख रूप से ब्लिंकिट, फ्लिपकार्ट, बजाज ऑटो लिमिटेड, मुथूट फाइनेंस, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, क्रोमा – टाटा एंटरप्राइज, एथर एनर्जी, जूडियो, मेडमिक्स, जेएसडब्ल्यू स्टील, टीवीएस मोटर कंपनी, आईटीसी लिमिटेड, वेस्टसाइड, एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स तथा योकोहामा सहित अन्य कंपनियां शामिल हैं। इसका आयोजन महिला एवं बाल विकास निगम की तरफ से किया जा रहा है।
इस जॉब फेयर में रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, आईटी/बीपीओ, टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग, सिक्योरिटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। कार्यक्रम में 50 से अधिक राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय कंपनियां भाग लेंगी, जहां 2000 से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे तथा प्रतिभागियों के ऑन-द-स्पॉट इंटरव्यू लेकर चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
इस जॉब फेयर में 10वीं, 12वीं, स्नातक, तकनीकी डिग्री एवं आईटीआई योग्यता प्राप्त महिलाएं भाग ले सकती हैं। प्रतिभागियों की आयु सीमा 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है। प्रतिभागियों को अपने साथ आधार कार्ड, बायोडाटा, शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की छायाप्रति तथा पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य होगा।
कार्यक्रम का आयोजन पूर्वाह्न 09 बजे से संध्या 06 बजे तक किया जाएगा। इच्छुक महिलाएं wcdc.bihar.gov.in पर आवेदन कर इस अवसर का लाभ उठा सकती हैं।

4.10 साल, 138 जिंदगियां: किडनी ट्रांसप्लांट में बड़ी सफलता, स्वास्थ्य मंत्री का नवाचार पर जोर

पटना/विश्व किडनी दिवस और किडनी ट्रांसप्लांट मीट-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने इंदिरा गांधी चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) के पदाधिकारी और डॉक्टरों को बधाई दी। यह बधाई उन्होंने संस्थान में एक दशक पहले शुरू किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया और उसकी सफलता को लेकर रविवार को दी।
आईजीआईएमएस के मुख्य ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि संस्थान में आज से करीब 10 वर्ष पहले किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस एक दशक में 138 मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि की बात है। उन्होंने कहा कि संस्थान के पदाधिकारों को यह विचार करना चाहिए कि मरीजों के इलाज में सुविधा को और कैसे व्यवस्थित किया जाय। किडनी ट्रांसप्लांट में किसी उच्च स्तरीय ट्रेनिंग की जरूरत है तो यहां के चिकित्सकों को देश-विदेश के बड़े संस्थानों में जाना चाहिए। इससे इलाज में जहां विश्वसनीयता बढ़ेगी वहीं परिणाम भी काफी अच्छे होंगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक उपकरण और दूसरी सुविधाओं के विकास में संस्थान को राज्य सरकार से पूरा सहयोग दिया जाएगा। इसी क्रम में उन्होंने संस्थान में एनेस्थीसिया सिमुलेशन लेबोरेट्री और रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम की सुविधाओं का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विधायक संजीव चौरसिया, संस्थान के डायरेक्टर डायरेक्टर डॉ. बिंदे कुमार, डॉ. ओम कुमार, डॉ. एनआर विश्वास, अमिताभ सिंह के साथ नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के फैकल्टी डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।

 

5.एग्रो बिहार मेला का हुआ समापन, किसानों ने जमकर खरीदे कृषि यंत्र

पटना के गांधी मैदान में 12 मार्च से चल रहे कृषि यांत्रिकीकरण मेला यानि एग्रो बिहार 2026 का रविवार को समापन हो गया। यह मेला कृषि विभाग ने सीआईआई के सहयोग से आयोजित किया था। इस मौके पर कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि यह मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं रहा, बल्कि खेती को आधुनिक, आसान, कम खर्चीली और ज्यादा लाभकारी बनाने का सशक्त मंच बनकर उभरा है।
उन्होंने बिहार सहित कई राज्यों से आए कृषि यंत्र निर्माताओं और प्रदर्शकों का धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके सहयोग से किसानों को यह समझने का अवसर मिला कि अब खेती परंपरा के साथ-साथ तकनीक के सहारे भी आगे बढ़ सकती है।
इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कृषि रोड मैप, सिंचाई, बीज, बागवानी, यांत्रिकरण और किसान हित की कई योजनाओं के जरिए खेती को लगातार मजबूत किया जा रहा है। कृषि यांत्रिकरण आज समय की मांग है, क्योंकि मशीन से काम तेज होता है, मजदूरी का दबाव घटता है और खेती अधिक वैज्ञानिक एवं लाभकारी बनती है।
पूर्वी भारत का है सबसे बड़ा यांत्रिकीकरण मेला
कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि यह एग्रो बिहार मेला पूर्वी भारत का सबसे बड़ा यांत्रिकरण मेला है। इसे वर्ष 2011 से कृषि विभाग लगातार सफलता पूर्वक आयोजित कर रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों एवं तकनीकों की जानकारी प्रदान करना तथा कृषि कार्यों को अधिक सरल, त्वरित एवं लागत प्रभावी बनाना है। मेले में खाद्य एवं प्रसंस्करण, पशुपालन, मत्स्य पालन, गव्य विकास, गन्ना उद्योग, उद्योग विभाग, सहकारिता, कम्फेड द्वारा उनके संबंधित योजनाओं एवं क्रियाकलापों को किसानों के लिए प्रदर्शित किया गया है।
कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने कहा कि मेले में कृषि यंत्रों के साथ-साथ उद्यान, बीज, पौधा संरक्षण, भूमि संरक्षण, उर्वरक तथा प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों से संबंधित स्टॉल लगाए गए, जहां इन उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की गई।

बिरला टायर्स को मिला प्रथम पुरस्कार
समापन समारोह में सभी कृषि यंत्र निर्माता कम्पनियों एवं विभागीय पदाधिकारियों को प्रमाण-पत्र एवं मोमेन्टो प्रदान किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शनी के लिए बिरला टायर्स को प्रथम पुरस्कार, हेवेल्स इण्डिया को द्वितीय पुरस्कार एवं शक्तिमान को तृतीय पुरस्कार दिया गया।

इस वर्ष इस मेला में राज्य के किसानों ने बड़ी संख्या में कृषि यंत्रों की खरीदारी कर सरकार की महत्वकांक्षी योजना का लाभ उठाया। इस मेला में 4 दिनों में कुल 395 कृषि यंत्रों की खरीद पर 1.85 करोड़ रूपये से अधिक का अनुदान दिया गया। इन यंत्रों का बाजार मूल्य लगभग 4.78 करोड़ रूपये है। रविवार को 1840 किसानों ने भाग लिया। इस तरह अब तक इस प्रदर्शनी-सह-मेला में राज्य के 35 हजार से अधिक किसान/आगन्तुक आ चुके हैं।