मुलायम सिंह यादव संस्थापक समाजवादी पार्टी जब पहली बार जनता दल से मुख्यमंत्री बने तो मंडल आयोग लागू कराने में अहम
राम दुलार यादव (संपादक)
देश/मुलायम सिंह यादव संस्थापक समाजवादी पार्टी जब पहली बार जनता दल से मुख्यमंत्री बने तो मंडल आयोग लागू कराने में अहम सहयोग किया तथा यूपी में मंडल आयोग को तत्काल लागू किया 27% आरक्षण पिछड़े 21% अनुसूचित 2% अनुसूचित जनजाति को आरक्षण उत्तर प्रदेश में लागू किया। जब मंडल बनाम कमंडल के नारे बुलंद थे तो कमंडल के विरोध में राम भक्तों को ठोकने में भी देरी नही किया, जब देश को सबसे उत्तम रक्षामंत्री मिला तब 21 माह में वह सब सम्मान सैनिकों को दिया जिसके वे हकदार थे जिसके लिए उन्हें आजादी के बाद से इंतजार था।
मुलायम सिंह यादव का रक्षा मंत्री के रूप में कार्यकाल (1 जून, 1996 से 19 मार्च, 1998 तक) लगभग 21 महीने का था। इतने कम समय में भी उन्होंने कुछ ऐसे बड़े और बुनियादी बदलाव किए जो दशकों तक नहीं हो पाए थे।
1. शहीदों के पार्थिव शरीर को घर भेजने का नियम
यह उनका सबसे क्रांतिकारी और भावनात्मक फैसला माना जाता है।
पुराना नियम: आजादी के बाद से 1996 तक नियम था कि शहीद का अंतिम संस्कार युद्ध क्षेत्र या यूनिट में ही कर दिया जाता था। परिजनों को केवल उनकी टोपी या वर्दी का टुकड़ा भेजा जाता था।
मुलायम सिंह का बदलाव: उन्होंने “ओवरनाइट” (तुरंत) नियम बदला कि शहीद का पार्थिव शरीर सरकारी खर्च पर, पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गाँव भेजा जाएगा।
प्रशासनिक जिम्मेदारी: उन्होंने यह भी अनिवार्य किया कि जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) खुद शहीद के घर जाकर श्रद्धांजलि देंगे।
2. रक्षा आधुनिकीकरण: सुखोई (Sukhoi) डील
उनके कार्यकाल में ही रूस के साथ भारत का सबसे महत्वपूर्ण रक्षा समझौता सुखोई-30 (Su-30 MKI) लड़ाकू विमानों की खरीद फाइनल हुई थी।
यह सौदा भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, जो आज भी वायुसेना की रीढ़ है।
3. चीन के प्रति सतर्कता और दूरदर्शिता पूर्व रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के अनुसार, मुलायम सिंह संसद में हर रक्षा चर्चा के दौरान भारत को चीन से सावधान रहने की सलाह देते थे।
वे मानते थे कि भारत के लिए पाकिस्तान से बड़ा खतरा चीन है, और उनकी यह दूरदर्शिता आज की परिस्थितियों में सच साबित होती दिखती है।
4. सैनिकों का मनोबल और सुविधाओं में सुधार वेतन और पेंशन: उन्होंने छठे वेतन आयोग (Pay Commission) की सिफारिशों पर सशस्त्र बलों की शिकायतों को गंभीरता से लिया और उनके पक्ष में आवाज उठाई।
दुर्गम इलाकों का दौरा: उन्होंने कश्मीर सियाचीन और उत्तर-पूर्व के अग्रिम मोर्चों का दौरा कर जवानों की बुनियादी सुविधाओं (बेहतर भोजन और कपड़े) में सुधार सुनिश्चित किया।
मिसाइल प्रोग्राम: उन्होंने पृथ्वी और अग्नि मिसाइल कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए कड़ा रुख अपनाया।
निष्कर्ष
मुलायम सिंह यादव ने दिखा दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो डेढ़-दो साल का समय भी व्यवस्था बदलने के लिए काफी है। उन्होंने न केवल सेना को आधुनिक हथियार (सुखोई) दिए, बल्कि “वर्दी” को वह सम्मान भी दिलाया जिसकी वह हकदार थी।

