बिहार

हड़ताल खत्म कर लौटें काम पर नहीं तो बीडीओ संभालेंगे सीओ का प्रभार : मंत्री

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज
Listen to this article

रामकुमार यादव 

बिहार में राजस्व कर्मियों की हड़ताल को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। उपमुख्यमंत्री और भूमि सुधार मंत्री Vijay Kumar Sinha ने साफ कहा है कि किसी भी स्थिति में अंचल कार्यालयों में लंबित मामलों का ढेर नहीं लगने दिया जाएगा। उन्होंने हड़ताल पर गए कर्मचारियों और अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे जल्द से जल्द काम पर लौटें, अन्यथा वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाएगी।

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर राजस्व कर्मचारी और अधिकारी काम पर वापस नहीं लौटते हैं तो अंचल अधिकारियों की जिम्मेदारी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दी जा सकती है। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य जनता को समय पर सेवा उपलब्ध कराना है और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।

हड़ताल के बीच सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर भी पहल करने की कोशिश की है। उपमुख्यमंत्री ने राजस्व सेवा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को पत्र भेजकर उनकी मांगों पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि डीसीएलआर के पद पर बिहार राजस्व सेवा के पदाधिकारियों की तैनाती से जुड़े मुद्दे को कैबिनेट की 29 जनवरी की बैठक के एजेंडा से हटाकर 23 और 30 मार्च की बैठकों में शामिल किया जाएगा, ताकि इस विषय पर नीति तय की जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि बिहार राजस्व सेवा के लिए सुरक्षित किए गए डीसीएलआर पदों से जुड़े प्रशासनिक और नीति संबंधी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि राजस्व सेवा के अधिकारियों के हितों का ध्यान रखते हुए एक स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।

इस बीच राजस्व व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने अंचल कार्यालयों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का भी फैसला किया है। राज्य के सभी 537 अंचल कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए करीब 6.71 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। प्रत्येक अंचल कार्यालय में औसतन 1.25 लाख रुपये खर्च कर कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि कार्यालयों में होने वाले कार्यों पर निगरानी रखी जा सके।

सरकार के अनुसार, राजस्व प्रशासन में सुधार के लिए चलाए जा रहे 100 दिन के अभियान के तहत कई अहम कदम उठाए गए हैं। इनमें जमीन से जुड़े अधिकांश कार्यों के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी शामिल है। अब लोग घर बैठे आवेदन कर सकते हैं और प्रक्रिया की स्थिति की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक अंचल कार्यालय में आरटीपीएस केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिससे नागरिकों को सेवाएं आसानी से मिल सकें।

जमीन से जुड़े दस्तावेजों में होने वाली त्रुटियों को दूर करने के लिए भी समय-सीमा तय की गई है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि लोगों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए 12 दिसंबर से भूमि सुधार जन-सुनवाई कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। वहीं राजस्व अभिलेखों में सुधार के लिए पहली बार स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। नाम या पिता के नाम में गलती जैसी सामान्य त्रुटियों को 15 कार्य दिवस के भीतर ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि जमीन रसीद या राजस्व से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों को तीन दिन के भीतर ठीक करने की व्यवस्था की गई है।