एनडीए सत्ता और स्वार्थ में परिवारवादी राजनीति को स्थापित करने का मौका तलाश रही है : एजाज अहमद
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पटना/बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी परिवारवादी राजनीति पर जो बड़ी-बड़ी बातें किया करते थे वह सिर्फ ढकसोला था । दरअसल उनको अपने पुत्र को स्थापित करने के लिए मौके की तलाश थी और यह मौका उन्होंने अपने पुत्र को स्थापित करने के लिए अपने आप को राज्यसभा सदस्य के उम्मीदवार के तौर पर स्थापित करके भारतीय जनता पार्टी से अपनी शर्तों पर समझौता करके विरासत की राजनीति को एक नया आयाम देने का काम किया है और जिस तरह से इवेंट बनाया गया है जिस तरह से निशांत कुमार को राजनीति में स्थापित करने के लिए तरह-तरह के पोस्टर बैनर के साथ-साथ हाथी, घोड़ा , ऊंट और बैंड बाजे के सहारे स्थापित किया गया है । इसे ही पता चलता है कि नीतीश कुमार कितने बेचैन थे। अंततः जनता दल यू के अंदर कहीं ना कहीं नेतृत्व को स्थापित करने के लिए परिवारवादी राजनीति का ही सहारा लेना पड़ा और इस तरह की राजनीति इस तरह की सोंच यह बताने के लिए काफी है कि जनता यू जो परिवारवाद की राजनीति की व्याख्या नीतीश कुमार के माध्यम से प्रस्तुत करती थी वह पूरी तरह से खोखला और नारों के अलावा कुछ नहीं था। दरअसल भारतीय जनता पार्टी को नीतीश कुमार को किनारे लगाना था।
नीतीश कुमार को अपने पुत्र को स्थापित करना था और दोनों ने एक दूसरे को मौका देखकर साधने का काम किया। आने वाले समय में बिहार की जनता एनडीए के परिवार वादी राजनीति को पूरी तरह से अस्वीकार कर देगी, क्योंकि यह लोग सत्ता में अपने हितों के लिए बने हुए हैं बिहार की जनता के हितों से कोई मतलब नहीं है।

