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जनता से जुड़े किसी भी मामले में उदासीनता बर्दाश्त नहीं: सीके अनिल ।। 2. बिहार में महिला मुखियाओं की बदौलत बढ़ रही महिला साक्षरता ।। 3. डिजिटल क्रॉप सर्वे से रियल टाइम फसल आकलन, नीति निर्माण और बाजार प्रबंधन होगा और सशक्त : राम कृपाल यादव।। 4. बिहार में पीएम आवास योजना: 2 साल में 12 लाख प्लस घर मंजूर, 11.5 लाख को पहली किस्त जारी।। 5.राजकीय तिब्बी कालेज अस्पताल का सघन चिकित्सा अभियान 

बिहार हलचल न्यूज ,जन जन की आवाज
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राजकुमार यादव की रिपोर्ट

पटना पुराना सचिवालय स्थित राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के कार्यालय कक्ष में शनिवार को पटना जिले के अपर समाहर्ता, सभी भूमि सुधार उप समाहर्ता एवं अंचलाधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभाग के प्रधान सचिव श्री सी. के. अनिल ने की। इस दौरान राजस्व से संबंधित विभिन्न सेवाओं की प्रगति और लंबित मामलों की स्थिति की सख्ती से समीक्षा की गई।
बैठक में परिमार्जन प्लस के लंबित आवेदनों, दाखिल-खारिज और अपील वादों, बिहार भूमि विवाद निवारण अधिनियम, 2009 के तहत लंबित मामलों, लगान की अद्यतन स्थिति, सैरात बंदोबस्ती तथा राजस्व पदाधिकारियों के क्षेत्र में लंबित प्रकरणों के निष्पादन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रधान सचिव श्री अनिल ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आम जनता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने और राजस्व प्रशासन को अधिक प्रभावी एवं संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग कर प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम लोगों को समय पर न्याय और सुविधा मिल सके।
समीक्षा के दौरान प्रधान सचिव ने अधिकारियों को इस माह राजस्व लक्ष्य की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि लगान वसूली सहित अन्य राजस्व से जुड़े लक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। बैठक के उपरांत मुख्यालय स्तर से 26 अधिकारियों की टीम गठित कर अंचल एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता कार्यालयों का औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया। सभी निरीक्षण करने वाले अधिकारियों को सोमवार तक अपनी निरीक्षण रिपोर्ट मुख्यालय में जमा करने का निर्देश दिया गया है।
बैठक में सचिव श्री गोपाल मीणा, सचिव श्री जय सिंह, भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक श्री सुहर्ष भगत, अपर सचिव श्री आजीव वत्सराज, उप निदेशक श्रीमती मोना झा सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

2. बिहार में महिला मुखियाओं की बदौलत बढ़ रही महिला साक्षरता

पटना/बिहार में महिला साक्षरता का सफर पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय रहा है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2001 में जहां महिलाओं की साक्षरता दर मात्र 33.12 प्रतिशत थी, वह 2025 में बढ़कर लगभग 74 प्रतिशत पहुंच चुकी है। यह प्रगति न सिर्फ शिक्षा और जागरूकता अभियानों का नतीजा है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर महिला मुखियाओं के मजबूत नेतृत्व का भी इसमें उल्लेखनीय परिणाम रहा है। पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी ने स्थानीय स्तर पर साक्षरता और आत्मनिर्भरता को गति दी है।

केस स्टडी 1:
अफसाना बेगम- पूर्णिया जिले की प्रेरणादायक मुखिया

पूर्णिया जिले के धमदाहा ब्लॉक के अंतर्गत कुकरौन पश्चिम पंचायत की मुखिया अफसाना बेगम बचपन से ही महिलाओं की बेरोजगारी, असाक्षरता और आत्मविश्वास की कमी को करीब से देखती थीं। सरकारी स्कूल से 8वीं तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने मदरसे से इंटर किया। गांव में बदलाव लाने की इच्छा थी तो पंचायत चुनाव में खड़ी हुईं और जीत हासिल की।

मुखिया बनने के बाद अफसाना ने पंचायत को महिला-केंद्रित बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने बाल विवाह पर रोक लगाने और लड़कियों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया। नतीजा यह रहा कि बीते चार वर्षों में आधा दर्जन लड़कियां सरकारी शिक्षक बन गईं, जबकि कई अन्य इंटर के बाद ग्रेजुएशन कर रही हैं। महिलाओं को अंगूठे के निशान की बजाय हस्ताक्षर करना सिखाने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी, परिणामस्वरूप पंचायत की करीब 80 प्रतिशत महिलाएं स्वयं कागजातों पर हस्ताक्षर करती हैं।

यहां एक अन्य बड़ी समस्या बाजार की दूरी थी। महिलाओं को ताजे फल-सब्जियां खरीदने के लिए रोजाना 12 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। अफसाना ने पंचायत में ही हाट बसाया, जहां महिलाएं भी अपनी दुकानें चला रही हैं। इसके अलावा अन्य जरुरी सामानों के लिए 10 दर्जन से अधिक दुकानें खुलीं। इससे न केवल स्थानीय रोजगार में वृद्धि हुई, बल्कि अन्य पंचायतों से आने-जाने का समय और खर्च भी बचा। आज कुकरौन पश्चिम पंचायत की लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में रोजगार से जुड़ी हुई हैं।

केस स्टडी 2:
आरती कुमारी- मिश्रौलिया पंचायत की पहली महिला मुखिया

सीतामढ़ी जिले के डुमरा ब्लॉक अंतर्गत मिश्रौलिया पंचायत की मुखिया आरती कुमारी गांव की पहली महिला मुखिया बनीं। इससे पहले गांव वालों की सोच थी कि महिलाएं घर तक सीमित रहती हैं, लेकिन आरती ने इसे पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने साबित किया कि एक साक्षर और जागरूक महिला किसी पुरुष से कम नहीं होती।

आरती घर संभालने के साथ-साथ पंचायत के विकास के लिए सक्रिय रूप से काम करती हैं। उन्होंने स्कूलों में लड़कियों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाए। महिला सभाओं में लड़कियों की शिक्षा की महत्वपूर्णता बताई और उन्हें आत्मविश्वास के साथ करियर चुनने के लिए प्रेरित किया।
आरती बताती हैं कि पहले मैं कम बोलती थी, घर में रहती थी। मुखिया बनने का ख्याल भी नहीं आया था। लेकिन लॉकडाउन के दौरान ससुराल लौटने पर गांववालों ने साक्षर उम्मीदवार के रूप में मेरा समर्थन किया। कुछ लोगों ने विरोध भी किया कि अच्छे घर की बहू घर में ही शोभा देती है, लेकिन मैंने सजावटी पद नहीं, बल्कि वास्तविक काम चुना। आज वे दो बच्चों की मां होने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं।

 

3 डिजिटल क्रॉप सर्वे से रियल टाइम फसल आकलन, नीति निर्माण और बाजार प्रबंधन होगा और सशक्त : राम कृपाल यादव

राज्य में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के अंतर्गत डिजिटल क्रॉप सर्वे को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। यह एग्री-स्टैक परियोजना का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसका उद्देश्य कृषि फसल सर्वेक्षण की पारंपरिक प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर उसे अधिक पारदर्शी, त्वरित और सुव्यवस्थित बनाना है।

ये बातें शनिवार को राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कही है। उन्होंने बताया है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से किसानों द्वारा अपने खेतों में बोयी गई प्रत्येक फसल से संबंधित भू-खण्ड आधारित जानकारी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से एकत्र की जाती है। इससे प्रत्येक कृषि भू-खण्ड के लिए रियल टाइम में फसल क्षेत्र का सटीक आकलन संभव हो पाता है। इस डिजिटल डाटाबेस के माध्यम से फसलों के वास्तविक आच्छादन क्षेत्र की सटीक जानकारी उपलब्ध होती है। यह जानकारी फसल विपणन, भंडारण प्रबंधन, फसल बीमा योजनाओं और कृषि से जुड़े नीतिगत निर्णयों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में पिछले तीन फसली मौसमों से डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य निरंतर किया जा रहा है।
रबी 2023-24 में 5 पायलट जिलों से 10 जनवरी 2024 को इस पहल की शुरुआत की गई। उसी मौसम के अंत तक 15 अन्य जिलों को भी इसमें शामिल किया गया। इस प्रकार कुल 20 जिलों के 1,700 ग्रामों के 11.56 लाख प्रस्तावित प्लॉट्स में से 9.87 लाख प्लॉट्स पर डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य किया गया।

खरीफ 2024 में यह पहल और विस्तारित हुई, जिसमें 2,200 ग्रामों के 17.35 लाख प्लॉट्स में से 16.59 लाख प्लॉट्स का सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। वहीं
रबी 2024-25 में 28 जिलों के 7,187 राजस्व ग्रामों के 49.37 लाख प्लॉट्स में से 48.54 लाख प्लॉट्स पर डिजिटल सर्वे कार्य संपन्न हुआ।

उन्होंने बताया कि खरीफ 2025 में इस पहल का और व्यापक विस्तार करते हुए राज्य के सभी 38 जिलों के 32,707 राजस्व ग्रामों के कुल 1,54,02,156 प्लॉट्स में डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य किया गया।
इसी क्रम में रबी 2025-26 के लिए 30,416 राजस्व ग्रामों के 1,97,74,227 प्लॉट्स में डिजिटल क्रॉप सर्वे का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक 1 करोड़ 5 लाख से अधिक कृषि प्लॉट्स का डिजिटल सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि यह पहल बिहार में डिजिटल कृषि व्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने तथा कृषि क्षेत्र के समग्र विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

4. बिहार में पीएम आवास योजना: 2 साल में 12 लाख प्लस घर मंजूर, 11.5 लाख को पहली किस्त जारी

पटना/ग्रामीण विकास विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2024 से 2026 तक 12 लाख आठ हजार 663 गरीबों के लिए आवास की स्वीकृति दी गई है। इसमें से 11 लाख 36 हजार 500 लाभुकों को प्रथम, सात लाख 49 हजार 56 को द्वितीय तो तीन लाख 46 हजार 307 को तृतीय किस्त का भुगतान किया गया है। यह जानकारी शनिवार को विभागीय मंत्री श्रवण कुमार ने दी।
प्रेस वार्ता में पत्रकारों को संबोधित करते हुए मंत्री श्री कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत वित्तीय वर्ष 2024-26 के बीच तीन लाख छह हजार 246 लाभुकों ने आवास निर्माण का कार्य पूरा कर लिया है। वर्ष 2025-26 के प्रारंभ में 2500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसी में से लाभुकों को भुगतान किया गया है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से वर्ष 2026 में 91.92 करोड़ रुपये विमुक्त किए गए हैं। उक्त राशि से द्वितीय किस्त प्राप्त कर निर्धारित मानदंड के अनुसार निर्माण कार्य पूर्ण करने वाले 22 हजार 100 लाभुकों में प्राथमिकता के आधार पर तृतीय किस्त का भुगतान किया गया है।
विभागीय मंत्री ने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्र का कोई भी गरीब पात्र परिवार आवास विहीन नहीं रहेगा। इस दिशा में विभाग तेजी से काम कर रहा है। विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ससमय अपने कर्तव्यों का निवर्हन करें ताकि विकास पुरूष के नाम से नवाजे गए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता से किए गए वादों को पूरा किया सके।

 

5. राजकीय तिब्बी कालेज अस्पताल का सघन चिकित्सा अभियान 

 

टना ने राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के बयापक प्रचार प्रसार
तथा गरीबों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए सघन अभियान शुरू किया है जिसके तहत शनिवार को गायघाट पटना के निकट स्थित स्लम बस्ती चांद कॉलोनी में मुफ्त मेगा स्वास्थ्य जांच एवं उपचार शिविर का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों गरीबों ने पहुंच कर अपने स्वास्थ्य की जांच कराई और गवर्नमेंट तिब्बी कालेज अस्पताल के अनुभवी डाक्टरों से उचित चिकित्सीय परामर्श बिल्कुल मुफ्त प्राप्त किए। शिविर का उद्घाटन राजकीय तिब्बी कालेज अस्पताल के अधीक्षक प्रो डॉक्टर शाहनवाज अख्तर तथा नोडल अधिकारी डॉक्टर अबदुस सलाम फलाही ने संयुक्त रूप से किया।
डॉक्टर कायनात जोहरा, डॉक्टर मोहम्मद सदरूजजमा, डॉक्टर मोहम्मद महफूज आलम, डॉक्टर शबिसता फातिमा तययबी, डॉक्टर मोहम्मद एकराम,डॉक्टर रोजी आफरीन और मोहम्मद जहांगीर समेत अनेक डॉक्टर, नर्स और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद थे।शिविर में विशेष रूप से बच्चों तथा महिलाओं से संबंधित रोगों पर ध्यान केंद्रित किया गया और प्राथमिकता के आधार पर उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करके उन्हें उचित चिकित्सीय परामर्श बिल्कुल मुफ्त दिया गया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉक्टर शाहनवाज अख्तर और डॉक्टर अबदुस सलाम फलाही ने कहा कि जागरुकता एवं साधन के अभाव में राजधानी पटना के स्लम क्षेत्रों के लोग अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं और उनका स्वास्थ्य खराब होता जाता है जो समाज तथा राष्ट्र की बडी क्षति है।ऐसे ही अभाव ग्रस्त एवं जरूरत मन्द गरीबों को आवश्यक चिकित्सीय जांच एवं उचित परामर्श की सुविधा मुफ्त प्रदान करने के लिए राजकीय तिब्बी कालेज अस्पताल ही उनके दरवाजे पर दस्तक देने पहुंच गया है।