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शिक्षा के माध्यम से न्याय के साथ विकास बिहार सरकार की ऐतिहासिक पहलें और दूरदर्शी रोडमैप : शिक्षा मंत्री

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पटना /बिहार परिषद् में माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा शिक्षा विभाग के बजट मांग पर विस्तृत, तथ्यपरक एवं दूरदर्शी वक्तव्य प्रस्तुत किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल एक विभागीय दायित्व नहीं, बल्कि राज्य के सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार सरकार ‘न्याय के साथ विकास’ के संकल्प को शिक्षा के प्रत्येक स्तर—प्रारंभिक, माध्यमिक, उच्च एवं तकनीकी—पर ठोस परिणामों में परिवर्तित कर रही है। सरकार की प्राथमिकता है कि समाज के सभी वर्गों, विशेषकर बालिकाओं, आर्थिक रूप से कमजोर, दलित, महादलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं समान अवसर उपलब्ध हो।

मंत्री महोदय ने सदन को अवगत कराया कि वित्तीय वर्ष 2026–27 में शिक्षा विभाग पर कुल ₹60,204.60 करोड़ रुपये का बजटीय उपबंध एवं उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल ₹80,12,34,24,000/-(आठ हजार बारह करोड़ चौतीस लाख चौबीस हजार रुपये) का उपबंध प्रस्तावित है, जो वर्ष 2005–06 के ₹4,438.80 करोड़ की तुलना में अभूतपूर्व वृद्धि को दर्शाता है। राज्य के कुल बजट का लगभग 20 प्रतिशत शिक्षा के लिए समर्पित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि बिहार सरकार की प्राथमिकताओं में शिक्षा सर्वोपरि है।

अपने वक्तव्य में मंत्री महोदय ने कहा कि निश्चय-1 एवं निश्चय-2 के अंतर्गत शिक्षा से संबंधित लक्ष्यों पर केंद्रित एवं सुनियोजित कार्यों के परिणामस्वरूप राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है और अब ‘7 निश्चय–3 (2025–30)’ के अंतर्गत “उन्नत शिक्षा : उज्ज्वल भविष्य” शिक्षा का विज़न दस्तावेज़ है। इसके लक्ष्य को रेखांकित करते हुए मंत्री महोदय ने बताया कि प्रत्येक प्रखंड में मॉडल स्कूल की स्थापना हेतु वर्ष 2026–27 में ₹800 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही राज्य के 213 ऐसे प्रखंडों में, जहाँ पूर्व में डिग्री कॉलेज उपलब्ध नहीं हैं, नए डिग्री कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिष्ठित संस्थानों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके तहत प्रथम चरण (2026–27) में 31 कॉलेजों का उन्नयन प्रस्तावित है। राज्य में एक नई एजुकेशन सिटी की स्थापना हेतु विस्तृत कार्ययोजना भी प्रगति पर है। साथ ही उच्च शिक्षा हेतु नए विभाग का गठन किया गया है।

शिक्षक नियुक्ति के क्षेत्र में बिहार ने पारदर्शिता और सुशासन का राष्ट्रीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मंत्री महोदय ने बताया कि बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से 2,60,698 शिक्षकों (प्रधान शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक सहित) की नियुक्ति की जा चुकी है, जबकि TRE-4 के अंतर्गत 45,198 अतिरिक्त नियुक्तियों की प्रक्रिया जारी है। बिहार में महिला सशक्तिकरण की ठोस नींव माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने रखी है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और सतत नीतिगत प्रयासों का ही प्रत्यक्ष परिणाम है कि आज बिहार के शिक्षा तंत्र में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुँची है। वर्तमान में राज्य में कुल शिक्षकों का 44 प्रतिशत महिलाएँ हैं। माननीय मुख्यमंत्री जी ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब नीति, नीयत और निरंतरता एक साथ आगे बढ़ती हैं, तब महिला सशक्तिकरण केवल नारा नहीं, बल्कि संस्थागत वास्तविकता बन जाता है।

छात्र कल्याण के क्षेत्र में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए कक्षा 1 से 12 तक की सभी छात्रवृत्तियों को दोगुना कर दिया है तथा वित्तीय वर्ष 2025–26 में DBT के माध्यम से ₹846 करोड़ की राशि सीधे छात्रों के खातों में अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री बालिका प्रोत्साहन, पोशाक एवं साइकिल योजनाओं के माध्यम से करोड़ों छात्र-छात्राओं को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो रहा है। प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत प्रतिदिन औसतन 1.03 करोड़ बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, साथ ही गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए NABL एवं थर्ड-पार्टी मूल्यांकन की व्यवस्था की गई है और रसोइयों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है।

स्कूल अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने हेतु बिहार राज्य शैक्षिक अवसंरचना विकास निगम (BSEIDC) के माध्यम से कक्षाओं, बेंच-डेस्क, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय एवं प्रयोगशालाओं का व्यापक विकास किया जा रहा है। ICT एवं स्मार्ट क्लास की सुविधा हजारों विद्यालयों में उपलब्ध कराई गई है, जबकि PM-SHRI योजना के तहत 836 विद्यालयों को स्वीकृति दी गई है। गणित एवं विज्ञान के लिए इंटीग्रेटेड लैब्स तथा कक्षा 7 के लिए ICT पाठ्यपुस्तक की व्यवस्था से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पहुँच, पारदर्शिता एवं रोजगारपरकता को प्राथमिकता देते हुए SAMARTH ERP प्रणाली के माध्यम से नामांकन, परीक्षा, परिणाम एवं वित्तीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन किया गया है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत अब तक ₹13,765.96 करोड़ की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिससे IIT, IIM एवं मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत हजारों छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 2,450 सहायक प्राध्यापकों एवं 114 प्राचार्यों की नियुक्ति की गई है।

विज्ञान, तकनीक एवं कौशल विकास को बढ़ावा देते हुए राज्य में AI-आधारित शिक्षा को लागू किया जा रहा है तथा NASSCOM के सहयोग से भविष्य के कौशलों का समावेश किया गया है। वर्ष 2020 से 2025 के बीच इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों के 30,700 छात्रों का प्लेसमेंट सुनिश्चित किया गया है। साइंस सिटी, तारामंडल एवं AI आधारित डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (AI-IntelliExams/OSM) के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

मंत्री महोदय ने बताया कि राज्य में आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की संख्या वर्ष 2005 के 12 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2025 में 1 प्रतिशत से भी कम हो गई है। छात्र-शिक्षक अनुपात में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो 2005 में 65:1 से घटकर 2025 में 29:1 हो गया है। साक्षरता दर एवं जेंडर पैरिटी में निरंतर सुधार हो रहा है, जबकि उच्च शिक्षा में जेंडर पैरिटी इंडेक्स 0.92 तक पहुँच चुका है।

अपने वक्तव्य के दौरान माननीय शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के प्रति ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति सख्ती से लागू है और किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अंत में मंत्री महोदय ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा को मानव संसाधन विकास, सामाजिक न्याय एवं आर्थिक प्रगति की आधारशिला मानती है। राज्य का लक्ष्य बिहार को पुनः ज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाना है, जहाँ गुणवत्ता, समानता और अवसर साथ-साथ विकसित हों।