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शिक्षा विभाग वित्तीय वर्ष 2026-27 के व्यय कुल 602 अरब 4 करोड़ 60 लाख 95 हजार रुपए सदन पटल पर रखा

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पटना / बिहार विधानसभा में शिक्षा विभाग के प्रो चंद्रशेखर के कटौती प्रस्ताव पर सरकार की ओर से उत्तर देते हुए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि शिक्षा विभाग वित्तीय वर्ष 2026-27 के व्यय कुल 602 अरब 4 करोड़ 60 लाख 95 हजार रुपए सदन पटल पर रखा।बिहार ज्ञान की भूमि है। राज्य के गौरवशाली शैक्षणिक इतिहास को संरक्षित करने तथा राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षा विभाग की संकल्पित है ।

कई शीर्ष निकाय एवं निदेशालय के साथ विभाग एक ऐसा शैक्षणिक व्यवस्था एवं वातावरण बनाने का काम कर रहा है ।जिसमें सभी बच्चे युवा एवं महिलाएं अपने ज्ञान और कौशल से समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सके।शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को शैक्षिक उपलब्धि के साथ ही उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहे हैं । सुयोग्य शिक्षकों की नियुक्ति से गुणात्मक शिक्षा को बल मिला है ।वहीं विभिन्न लाभों के आधारित योजनाओं निशुल्क पाठ पुस्तकों का वितरण, पीएम पोषण योजना आदि से गरीब एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा प्राप्त कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ है ।शैक्षणिक संस्थानों में आधारभूत संरचनाओं के विकास अनुश्रवण व्यवस्था एवं नवाचारी प्रयोग से शैक्षणिक माहौल में उपलब्धि मूलक सुधार प्ररिलक्षित हुआ है ।बदलते बिहार की तस्वीर दो दशक पूर्व में नए कलेवर के साथ अपनी तेज रफ्तार ,प्रखर नेतृत्व जो बिहार के भौगोलिक प्रदेश के अंदर करके समस्याओं का निवारण के दिशा में लोकदृष्टा के द्वारा दिशा देने का काम किया गया। जिसमें से शिक्षा विभाग भी इससे अछूता नहीं रहा ।शिक्षा एवं उससे जुड़े अन्य माध्यम के द्वारा बिहार समय-समय पर रूढ़ अवधारणाओं को परित्याग करते हुए वैज्ञानिक सोच के साथ सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन जी ने की ओर अग्रसर है । पहले स्कूल से बाहर 12 प्रतिशत था आज 01% हो गई है। महिला साक्षरता दर 74% हो गई हैं। सैनिक स्कूल गोपालगंज एवं नालंदा में खुल जाने से काफी संख्या में एनडीए कर रहे हैं।बीपीएससी पटना के माध्यम से अभी तक कुल तीन चरणों में विद्यालय अध्यापक के दिए गए परिणामों के आलोक में 2,25,178 शिक्षकों का योगदान दिया जा चुका है। माध्यमिक उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 4701 प्रधानाध्यापक को, प्रारंभिक विद्यालयों में 28,763 प्रधान शिक्षक ने अपना योगदान दिया है ।बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा स्थानीय निकाय के शिक्षकों की परीक्षा चार चरणों में साक्षमता परीक्षा हेतु राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2018-19 से बिहार वित्तीय वर्ष 2025 – 26 में राज्य योजना मद में वर्ष 2025 के इंटरमीडिएट की परीक्षा में उत्तीर्णता प्राप्त सभी कोटी की अविवाहित चार लाख4, 67,253 छात्रों को मुख्यमंत्री बालिका योजना के तहत प्रति छात्र 25,000 रुपए की दर से डीबीटी के माध्यम से कुल 11अरब 68 करोड़ 13 लाख ₹25हजार राशि उपलब्ध कराई गई है। वित्तीय वर्ष2026,-27 में इस योजना के लिए 700 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है। पीएम पोषण योजना के तहत केंद्र प्रायोजित2025 – 26 में एक करोड़ 3करोड़ 83 हजार 675 छात्राओं को पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराने में कुल 2452. 53 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई है वित्तीय वर्ष20 26- 27 में इस योजना के लिए 1625. 40 करोड़ की राशि का प्रावधान किया गया है ।

लाभुक आधारित योजना का लाभ प्रदान करने हेतु छात्राओं के आधारसीलिंग का बैंक खाते से होना अनिवार्य कर दिया गया है ।राज्य के सरकारी एवं आद्रसरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में आदरणीय जाती है छात्राओं की शिक्षा को पोर्टल पर उपस्थित से संबंधित संग्रहित लाखों से छात्र-छात्राओं का बैंक आधार खाता सीलिंग की जांच एवं सत्यापन कर भुगतान की प्रक्रिया अपनाई गई। इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष2025- 26 में राज्य के राजकीय राज्यकृत गैर सरकारी सहायता प्राप्त प्रारंभिक विद्यालयों में नामांकित छात्राओं की 75% उपस्थिति के आधार पर राज्य स्कीम से 145.08 राशि एवं समग्र शिक्षा से 902 करोड़ अर्थात कुल 247.8 करोड़ 93 12192 छात्राओं को डीबीटी के माध्यम से भुगतान की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी इसी डर से बालक बालिकाओं को पोशाक हेतु डीबीटी के माध्यम से राशि प्रदान की जाएगी। शिक्षा के क्षेत्र में विकास कौशलों से वंचित मानव संसाधन को कुशल संपन्न एवं योग बनाने के लिए शिक्षा पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। जहां प्रत्येक एक किलोमीटर पर प्राथमिक विद्यालय 3 किलोमीटर पर मध्य विद्यालय तथा प्रत्येक पंचायत में उच्च माध्यमिक विद्यालय तक की शैक्षणिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। प्रखंड स्तर पर स्नातक महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है। राज्य सरकार के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चे- बच्चियों की शिक्षा की समुचित व्यवस्था एवं आगे की योजनाएं संचालित की जा रही है ।वित्तीय वर्ष 2005 में शिक्षा विभाग का बजट प्रावधान योजना में योजना सहित 4438. 80 करोड रुपए से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025- 26 में 88382.78 करोड रुपए कर दिया गया है ।

जो राज्य के कुल बजट का लगभग 20% है लेकिन फिर भी शिक्षा के क्षेत्र में हमें मिलकर लगातार आगे काम करते रहना होगा। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने शिक्षकों को प्रशिक्षण के माध्यम से जवाबदेही बनाने की दिशा में विभाग के स्तर से कार्य किया जा रहा है ।शिक्षा विभाग के द्वारा विगत वित्तीय वर्ष की उपलब्धियां एवं20 26 – 27 के भावी कार्यक्रम की संक्षिप्त विवरण सदन के पत्र पर रखा गया हैं ।