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सांसद पप्पू यादव का एक बड़ा संदेश

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बिहार/मुझे नहीं पता कि सरकार आज कौन चला रहे हैं।मुझे यह पता था कि नीतीश कुमार  के नेतृत्व में सरकार चल रही है। लेकिन अब लगता है कि जिस नीतीश कुमार का सम्मान मैंने हमेशा छोटे भाई की तरह किया उनके साथ खड़े रहे।पहली बार जब सरकार बन रही थी, तब भी हम उनके साथ एक सगे भाई की तरह जीने मरने को तैयार थे। उस नीतीश कुमार की सरकार नहीं है।

उस वक्त भी हम पाटलिपुत्रा में लालू यादव जी और शहाबुद्दीन साहब की गोली खाने को तैयार थे।जहाँ आज जदयू का कार्यलय है, वहां पर माननीय विधायक महाबली बाबू और बसपा के सभी विधायक जो आज जीवित हैं, वे उदाहरण है कि मैं नीतीश बाबू के लिए किस हद तक गया था।

ये मेरा नीतीश बाबू के लिए समर्पण था। जैसे मैं लालू यादव जी का सम्मान करता रहा हूँ, उसी तरह नीतीश कुमार  के हर अच्छे कार्यों में उनके साथ रहा. व्यक्तिगत तौर पर उनकी आलोचना कभी नहीं की उनके सकारात्मक कार्यों की प्रशंसा की जब नीतीश कुमार की आलोचना बीजेपी और राजद ने की, तब भी हम उनके साथ रहे। फिर भी पता नहीं, नीतीश  मुझसे किस बात का बदला लेना चाह रहे हैं, जबकि मैंने उनसे उनके 20 साल के कार्यकाल में कोई मदद तक नहीं मांगी। ना ही मैंने कभी शकुनी  और सम्राट  की व्यक्तिगत आलोचना की लेकिन हम जरुर जानना चाहेंगे कि क्या वैचारिक लड़ाई को निजी बनाया जाना सही है।क्या कथनी और करनी में फर्क नहीं है? आपक कहते हैं ना किसी को फंसाते हैं और ना किसी को बचाते हैं. मुझे और बिहार की जनता को जरुर बताईये कि मेरा गुनाह क्या है ।

साल 2017 में भी आपने मुझे छात्र की आवाज उठाने की वजह गिरफ्तार किया था। क्या मिला आपको, तंग करने के अलावा. सुकून मिल गया था, कि आप सरकार में हैं और आप कुछ भी कर सकते हैं।लोकतंत्र में जनता और न्यायालय सर्वोच्च है, ना कि सरकार फिर 5 साल बाद कोरोना के समय आपकी सरकार की कमियों को वैचारिक रूप से उजागर कर रहा था, तब भी जबरदस्ती केस बना कर गिरफ्तार किया था। फिर निजी दुश्मनी और सत्ता के अहंकार की हनक मुझ पर निकाली।फिर 5 साल बाद 2026 में अभी निजी दुश्मनी मेरी साथ निभाई।

नीट की बच्ची और हर घर की मां, बेटियों एवं बहन की सुरक्षा के लिए संघर्ष के परिणाम स्वरूप आपने अहंकार दिखाई। मेरा गुनाह क्या था? मैं तो आपकी साख के लिए सवाल उठा रहा था, जबकि आपका प्रशासन उस पर लगातार कालिख पोत रहा था।डीजी साहब और कुंदन कृष्णन साहब, मुझे नहीं पता कि आप दोनों में कौन बादशाह हैं और कौन गुलाम! लेकिन पब्लिक है, सब जानती है

परिस्थितियों के गुलाम सब लोग हैं। आप दोनों से हमारा व्यक्तिगत रिश्ता रहा है।दीपक बाबू, याद कीजिये कभी आप पूर्णिया के डीडीसी थे।फिर डीएम और फिर जसवंत सिन्हा जी के ओएसडी मेरी भूमिका को भी आप अपने परिवार और अपनी पारिवारिक जिन्दगी में मेरा आपसे पारिवारिक रिश्ता रहा है। घर का और बच्चे का मैंने आपसे कभी मदद नहीं ली, लेकिन आपको न्याय करनी चाहिए थी।

मैं महाभारत का अभिमन्यु नहीं हूँ। आज की परिस्थितियों में अगर महात्मा गाँधी, सुभाष चन्द्र बोस और स्वामी विवेकानंद जी भी होते, तो कब के खत्म हो गये होते. 85 से लेकर आज तक संघर्ष और सच्चाई के रास्ते चला हूँ। मेरी आवाज कभी रुकी नहीं। लेकिन ये नहीं समझ पा रहा हूँ कि महाभारत का धृतराष्ट्र कौन है? जी सरकार चलाने या बचाने के लिए सच्चाई और नैतिकता को कुचलना चाहता है।

मेरी उम्र 59 में प्रवेश कर रही है 60 का पड़ाव बहुत खतरनाक होता है।धर्म और अधर्म की लड़ाई शुरू हो चुकी है। मुझे नहीं पता कि धर्म और अधर्म की इस लड़ाई में जीत किसकी होगी।लेकिन इतना जरुर पता है कि बिहार और बिहार की बेटियों की रक्षा के लिए हमेशा सच की लड़ाई लड़ता रहूँगा जो आदमी कभी मौत से नहीं डरा, वो आपकी पुलिस से कितना डरेगा।

2024 में जनता ने सांसद चुना। 2025 के बाद 2026 में प्रवेश किया। 2 साल आपके साथ काम करता रहा।आपकी मीटिंग अटेंड किया. आपको कभी नहीं लगा कि मुझ पर केस है । अचानक से ये केस कहां से आने लगे, जबकि ये सभी आचार संहिता और आन्दोलन के केस हैं।एक भी केस मुझ पर क्रिमिनल नहीं है।बेल टूटने में ऐसा क्या हो गया कि ये नौबत आई? जबकि 6 फरवरी को सूचना देकर पटना आया हूँ। दो दिन पहले भी पटना में था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के साथ मंच साझा किया। तब आपकी पुलिस को मेरा प्रोजक्शन नज़र नहीं आया। आज 3 – 3 केस में प्रोजक्शन भेजने की जरूरत क्यों पड़ी ऐसे सभी केस में बेल है।

जब मैंने आपको सहयोग किया, फिर भी दीपक ना का आदमी खुद को रंगदारी सेल का इंस्पेक्टर बताता है, जिसे आपके एसएसपी साहब ने भेजा था। मैं आपके एसएसपी साहब की कथा कहने लगू तो शायद आप सोच नहीं सकते क्या होगा? उनकी पूर्णिया से लेकर पटना तक की पूरी कहानी और कथा मेरे पास है। उनके फोटोज और वीडियोज साक्ष्य के रूप में मेरे पास है। मगर मैं अपनी मर्यादा जानता हूँ। मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा।आपके एसएसपी साहब पहले भी लोरेंस विश्नोई केस में गलत और निर्दोष लोगों को मेरे खिलाफ खड़ा किया था।इसमें मैंने उनको प्रिविलेज भी किया है।ये उसी का खुन्नस तो नहीं।

ये लड़ाई नयायालय तक जाएगी. माननीय सर्वोच्च्य न्यायालय तक जायेंगे। मुझे न्यायालय, जनता और ईश्वर पर पूरा भरोसा है. जब तक न्यायालय और जनता है, तब तक मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं है।मैंने डरना नहीं सीखा और एक आध चैनल से डरता नहीं हूँ। मुझे दुःख होता है कि जब सच्ची पत्रकारिता की आवाज आई, जिसने मुझे ताकत दी, उस दौर में भी सरकार की दरबारी करने वाले लोगों ने ना सिफ मेरे साथ, बल्कि बिहार की बेटी की लड़ाई में अपराधियों का साथ दिया।

मैं उनका आभार भी व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझे संकट में अकेले होने पर सच के लिए आवाज उठाई और बहुत हिम्मत दी, लोकसभा में नेता विपक्ष श्री राहुल गाँधी जी, बहन श्रीमती प्रियंका गाँधी जी, श्री चंद्रशेखर रावण जी, श्री अजय राय जी, श्री संजय सिंह जी, श्री मनोझ झा जी, हमेशा मेरा पितातुल्य रहे केंद्रीय मंत्री श्री जीतन राम मांझी जी, बिहार विधान सभा में कांग्रेस के सभी साथीगण, माननीय विधायक अख्तरुल इमाम साहब, पूर्व मंत्री मुकेश सहनी जी, माले और राजद के सम्मानीय नेता, भाई वीरेंद्र जी, आनंद मोहन जी, मनोहर यादव जी, झारखंड के माननीय मंत्री और वहां की जनता, पटना – जहानाबाद- पूर्णिया समेत कोसी सीमांचल की जनता आप सबों ने मुझे एक असीम ताकत सच की लड़ाई लड़ने में दी, इसके लिए आभारी रहूँगा।राहुल जी और प्रियंका जी ने मुझे नई ऊर्जा दी।

शिवानंद तिवारी जी से मेरे पिताजी के भी मित्र रहे हैं, जिन्होंने इस विपरीत परिस्थिति में पिता की तरह मुझे समझा और पिता के साया होने का एहसास दिलाया।शिवानंद तिवारी जी मुझे सिखने को मिलता रहा और गर्व है कि उन्होंने मुझे एक बेटे की तरह गौरवान्वित किया।यही गर्व मुझे हमेशा से मांझी जी के प्रति रहा. जिन दोचार लोगों ने किसी कारणवश मेरी आलोचना की, मैं हमेशा उसकी मदद करता रहा हूँ. उनकी कहानी को मैं जनता हूँ और उनका सम्मान करता हूँ. वैसे वो स्वतंत्र हैं इसके लिए।

मुझे आश्चर्य है कि सम्राट जी सतरंज के पीछे कौन है, ये दुनिया जानना चाहती है।आपको बताना चाहिए कि नीट्स की बेटी को न्याय के लिए आपने सीबीआई को दिया है और हम भी लड़ रहे हैं, तो इसमें गलत क्या है? एक पूर्व आईपीएस अमिताभ दास जी के बयान से मैं इत्तेफाक नहीं रखता हूँ मेरी जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार जी के बेटे निशांत का गलत चीजों से को लेना देना नहीं है।वे हमेशा विनम्र और शालीन रहे हैं। मैं उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता रह हूँ । मगर अक्सर वे सच बात दुनिया के सामने रखते हैं। फिर भी मैं इतना जरुर कहूँगा कि इस घटना में दो रजनीतिक घराने के लोग हैं।

फिर मैं अपनी बातों पर कायम हूँ। नीट्स की बेटी निर्भया को न्याय मिलकर रहेगा. हर बेटी की रक्षा एक लिए जितनी क़ुरबानी देना होगा, दूंगा । जिस तरह न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया और इसकी जरूरत आपको क्यों पड़ी. रविवार के दिन कौन सा भारत – पकिस्तान का युद्ध हो रहा था। जिसमें आपने हमको बिना जांच पूरे हुए अस्पताल से जेल भेज दिया।

आखिर कब आपको ठंडक मिलेगी और कब पप्पू यादव को तंग कर आपके अहंकार को संतुष्टि मिलेगी ? तभी तो पूर्णिया समेत अन्य जगहों पर पूछने लगे कि और किस किस केस में वारंट है।हम आपके अहंकार को संतुष्टि मिलेगी. मुझ पर आन्दोलन और आचार संहिता के अलावा कोई केस आपके पुरे बिहार में नहीं है, जिसकी धारा मुझे रोक पाए। ये केस विपक्ष को तंग करने के लिए सत्ता का हथकंडा जरुर है, लेकिन विचलित करने के लिए नहीं।

किसी की आलोचना किये बगैर मैं यही कहूँगा कि सदन में सरकर के बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनपर दर्जों केस होने के बावजूद वो आपके साथ बैठते हैं। मेरे ये संदेश अगर नीतीश बाबू/सम्राट बाबू/संजय बाबू/ललन बाबू तक पहुंचे, तो उनसे यही कहूँगा कि आप हमेशा से वैचारिक रूप से लड़े हैं।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन जी को बधाई, कि आप कम उम्र में एक बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. आपको ये जरुर देखना चाहिए कि आपकी सरकार जबरन किन विचार और आवाज को दबाना चाहते हैं।

नित्यानंद बाबू, आपसे पारिवारिक संबंध रहा है।परिवार के सदस्य के रूप में आपको देखा है हमने कभी आपकी आलोचना नहीं की आप करिए, लेकिन रिश्ते का कद्र भी कर लिया कीजिये।अंत में ये जरुर कहूँगा कि नीतीश बाबू/ दीपक बाबू और निशांत जी की टीम से, अगर मैं सही मामले में गलत हूँ तो इतना मरने से बेहतर है कि एक बार ही मरवा दीजिए। लेकिन वैचारिक और सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए इस तरह से तंग मत कीजिये।आपकी छवि तंग करने की नहीं रही है ।अगर और भी कोई केस बचा है, तो वो भी लगा दीजिए।

मेरा इलाज ना करा करके अच्छा किया।इलाज किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है।हम आपके कैदी वार्ड में ही थे, ना कि स्वतन्त्र वार्ड में फिर आपकी सरकार को क्यों डर लग गया। सम्राट बाबू, नियति अपने रस्ते से सबके लिए तक़दीर लिखती है। कृपया सच्चाई को ज़िंदा रहने दीजिए और स्वच्छ विचार वाले विपक्ष को ज़िंदा रहने दीजिए।