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महिषी विधायक डॉ. गौतम कृष्ण की प्रेम कहानी, सड़कों पर चप्पल पहनकर सदन तक का सफर

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बिहार /तारीख भले ही कैलेंडर के पन्नों में आती-जाती हो, लेकिन महिषी विधानसभा के लोकप्रिय राजद विधायक डॉ. गौतम कृष्ण के लिए यह दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि जीवन के स्वर्णाक्षरों में लिखा गया अध्याय है।एक ऐसी प्रेम कहानी की शुरुआत, जिसने संघर्ष, विश्वास, वादा, त्याग और विजय । सभी को अपने भीतर समेट रखा है। साल था 2004, पटना कॉलेज का सरल, संकोची, ठेठ देहाती पृष्ठभूमि से आया युवक—गौतम कृष्ण। दूसरी ओर मगध महिला कॉलेज की तेज-तर्रार, समझदार और शहरी परिवेश में पली-बढ़ी स्वेता। सामाजिक और आर्थिक असमानताएँ कहीं अधिक थीं, पारिवारिक पृष्ठभूमि बिल्कुल अलग। लेकिन शायद प्रेम का स्वभाव ही ऐसा है—वह जहाँ होना होता है, वहाँ रास्ते खुद बन जाते हैं। 12 दिसंबर 2004 को दोनों ने एक वादा किया ।“साथ रहेंगे, हर परिस्थिति में। ” यही वादा उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गया।
इन दस वर्षों का सफर आसान नहीं था। एक तरफ घर-परिवार का सपना IAS बनने की चाह। दूसरी तरफ दिल में धड़कता प्रेम स्वेता जी का साथ। पर ईश्वर की कृपा और बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद ने इस कहानी को एक नई दिशा दी। 2011 में स्वेता का JRF, 2012 में गौतम का JRF और 2013 में दोनों का BPSC में चयन। दोनों BDO बने। फिर परिवार की सहमति से 25 जून 2014 को शादी—एक दशक पुराने वादे की सच्ची परिणति।आज जब गौतम कृष्ण कहते हैं “जैसे सूर्य, चाँद, हवा, पानी सत्य हैं, वैसे ही प्यार, निष्ठा और त्याग भी सत्य हैं” तो उनके शब्दों में जीवन का अनुभव बोलता है, संघर्ष की तपिश और प्रेम की मधुरता साथ झलकती है। वे खुले मन से स्वीकारते हैं कि उनके जीवन की हर सफलता में स्वेता जी ऊर्जा का स्रोत बनी रहीं—“मेरे संघर्षों की माइटोकॉन्ड्रिया।”तीन प्यारे बच्चे—टीना, भोला और तुलसी—इस प्रेम की जीवंत मिसाल हैं।लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। 2014 में जब ईमान और स्वाभिमान के रास्ते पर चलते हुए उन्होंने BDO जैसे सुरक्षित पद से इस्तीफा दिया, तब जीवन ने एक नया मोड़ लिया। राजनीति में आए—2015 और 2020 में महिषी से चुनाव लड़ा। जीत के करीब पहुँचकर भी सत्ता की चाल व्यवस्था के खेल ने उन्हें हराया, पर जनता का प्यार उन्हें और मज़बूत करता गया।2025 चुनौतियों और उपलब्धियों का वर्ष रहा। एक ओर शिक्षा के क्षेत्र में ‘Assistant Professor (राजनीति विज्ञान)’ के रूप में चयन, दूसरी ओर लंबे संघर्ष के बाद राजद ने विश्वास जताया और महिषी विधानसभा की जनता ने उन्हें चप्पल में सड़कों से सदन तक भेजने का सौभाग्य दिया।