नक्सल ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए हॉक फोर्स के बहादुर इंस्पेक्टर आशीष शर्मा ने जिस तरह अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी
नक्सल ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए हॉक फोर्स के बहादुर इंस्पेक्टर आशीष शर्मा ने जिस तरह अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी, वह किसी भी भारतीय के दिल को गर्व और दर्द दोनों से भर देता है। किसान परिवार से निकलकर दो-दो वीरता पदक पाने वाले इस जांबाज़ अधिकारी ने हमेशा अपने फर्ज़ को पहले रखा। जनवरी में उनकी शादी होने वाली थी, पूरे घर में खुशियों की तैयारी थी, लेकिन देश की रक्षा करते हुए उन्होंने अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र-एमपी बॉर्डर के घने जंगलों में चल रहे बड़े ऑपरेशन में लगी गोलियों के बाद भी आशीष शर्मा डटे रहे और टीम को सुरक्षित निकालने में सफल हुए। आज पूरा मध्य प्रदेश, पूरा भारत, इस सच्चे हीरो के बलिदान को नमन कर रहा है। उनकी शहादत सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस की मिसाल है जो भारत के हर जवान के भीतर धड़कता है।

