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पब्लिक परेशान प्रखंड लदनियां प्रशासन चुप्प ,15 वीं व अन्य योजनाओं के निर्माण स्थल पर बोर्ड नहीं

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मधुबनी /लदनियां प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में बड़े पैमाने पर 15 वीं एवं अन्य योजनाओं से पंचायत के विभिन्न वार्डों में निर्माण कार्य स्थल पर प्राक्कलन बोर्ड नहीं लगाये जाने एवं सरकारी पोखरा से पानी निकाल कर मिट्टी बेचने का मामला सामने आया है।
मिली जानकारी के मुताबिक गिधवास पंचायत में पंचायत के मुखिया अजय कुमार साह ने गांव के ही मिडिल स्कूल के समीप मुख्य पनबीवी पोखरा से घाट निर्माण के नाम पर आनन- फानन में पोखरा से पानी सूखा दिया। एक ओर घाट निर्माण कार्य आरम्भ किया गया है। वहीं दूसरी ओर पोखरा से बड़े पैमाने पर मिट्टी बेचना शुरू कर दिया। योजना स्थल देखने से ही सच्चाई सामने आ जाता है।
अब सवाल उठता है कि लोग तेज तपिश से परेशान है। जहां लोग व मवेशी तेज गर्मी में पानी के लिए तड़प रहे है। वहीं मिडिल स्कूल के समीप गांव के मुख्य पोखरा से पानी सूखा कर मिट्टी बेचा जा रहा है।

जबकि उक्त पोखरा के भिंडा पर सरकारी मिडिल, आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन के अलावा 50 से अधिक अल्पसंख्यक एवं अनुसूचित जाति परिवार वसे हैं।

स्थानीय लोगों का आक्रोश है कि क्या सरकारी पोखरा में पानी सूखा कर घाट निर्माण एवं पोखरा से मिट्टी बेचने का प्रावधान है ।अगर नहीं तो शिकायत के बाद भी बीडीओ इस सम्बंध में कौन सी कार्रवाई की।
गिधवास पंचायत के ग्रामीणों का शिकायत है कि इस पंचायत में निर्माण कार्य में पारदर्शिता को धज्जियां उड़ा कर वार्ड संख्या 9 में लाखों रुपये के लागत से सड़क किनारे घटिया सामग्री से नाला निर्माण किया जा रहा है। नाला निर्माण की गुणवत्ता जांच से ही सामने आ सकता है।
बिडंबना है कि पंचायत में 15 वीं अन्य योजनाओं से 3 कराए गए एक भी योजना निर्माण स्थल पर प्राक्कलन बोर्ड नहीं लगाया गया है।
वार्ड पंच परशुराम मंडल का शिकायत है कि हमने प्रखंड कार्यालय जाकर बीडीओ अखिलेश्वर कुमार से प्राक्कलन बोर्ड योजना स्थल पर नहीं रहने की शिकायत की। बावजूद एक भी योजना स्थल पर प्राक्कलन नहीं नहीं लगवाया जा सका।
सम्बंधित मुखिया अजय कुमार साह का इस सम्बंध कहना है कि पोखरा दुरुस्त करने के लिए पोखरा से पानी हटाया गया है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता अनदेखी नहीं किया गया है। मेरे ऊपर पोखरा से मिट्टी काटकर बेचवाना साजिश है।
अब देखना है कि आखिर डीएम मधुबनी इस आरोप को किस रूप में लेता है ।
अगर डीएम जिला के किसी निष्पक्ष पदाधिकारी से मामले की जांच करवाई जाती है तो सच्चाई सामने आ जायेगा।